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जीवन धारा: वह लिखें, जो अब तक लिखा नहीं गया... शिकायत जीवन से नहीं, स्वयं से करें

राइनेर मारिया रिल्के Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Sat, 01 Feb 2025 06:01 AM IST

सार

अपने दुखों, इच्छाओं, मौन और विनम्र ईमानदारी सब पर लिखें। एक बार अपनी प्रकृति के नजदीक पहुंच गए, तो आप जो लिखेंगे, वह वही होगा, जो अब तक लिखा नहीं गया।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी


वही लिखें, जो जिंदगी का नजराना है। अपने दुखों, इच्छाओं, हृदय को छूने वाली घटनाओं, अपने मौन, अपनी विनम्र ईमानदारी के बारे में लिखें और जब ये सब लिखना आ जाए, तब आसपास दिखने वाली उन सब सरल चीजों पर लिखें, अपने सपनों की कल्पनाओं पर लिखें और जो कुछ भी याद रख सकें, उन सब पर भी लिखें। अगर अपनी जिंदगी रिक्त लगे, उसमें वह सौष्ठव न दिखे, तो शिकायत जीवन से नहीं, स्वयं से करें।


अगर आप किसी कैद में भी हों, तब भी आपके पास बहुत कुछ होगा सृजन के लिए। कम से कम वे स्मृतियां तो होंगी, जिनके बीच से आपका बचपन गुजरा-इन स्मृतियों के घर से बड़ा और कौन-सा सुख होगा। इस कैद में आप अपने बीते पलों को सत्कार दें, कोशिश करें कि वे प्रचुर कोमल, उजली भावनाएं आपके अतीत से बरस सकें; आप उन्हें कुरेद कर निकाल पाएं। तब आपका व्यक्तित्व निखार पर होगा, आपकी निविड़ता विस्तार पर होगी और इस विस्तार में गोधूलि होने तक आपके पास सार्थक जीवन के ढेर सारे क्षण होंगे-वे क्षण, जिनके पास से दुनियावी आवाजें बिना छुए निकल जाती हैं और आप अपनी तरफ पूरी तरह मुड़ चुके होते हैं, जिसमें डूबकर कविता निसृत होती है।


फिर आप जो लिखेंगे, वह केवल आपकी पूंजी होगी, आपके जीवन की कलाकृति और आपकी अपनी आवाज। वह कलाकृति सर्वोत्कृष्ट है, जो आपकी जरूरत से निकली है। एक कलाकार अपना संसार खुद रचता है-उसी में बसता है तथा उस प्रकृति के लिए पूरी तरह समर्पित हो जाता है, जो उसका निर्माण कर रही है।  (19 वर्षीय छात्र व कवि बनने के इच्छुक काप्पुस को लिखे गए पत्र के अंश)

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