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रेल विस्तार: बाकी हैं चुनौतियां, गति के साथ संतुलन और समावेशन की दरकार

अमर उजाला Published by: पवन पांडेय Updated Sat, 03 Jan 2026 07:55 AM IST

सार

भारतीय रेल एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां उपलब्धियां और चुनौतियां साथ-साथ चल रही हैं। बुलेट ट्रेन के ख्वाब के नजदीक पहुंचना और दूरस्थ क्षेत्रों में रेल विस्तार नई सीमाएं खोलते हैं, पर यातायात का बढ़ता बोझ व माल ढुलाई की जटिलताएं नीति नियंताओं से दूरदृष्टि और निरंतर निवेश की मांग भी करती हैं।
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Vande Bharat Train - फोटो : अमर उजाला


पिछले वर्ष ही इसने कश्मीर घाटी व मिजोरम की राजधानी आइजोल, देश की उत्तर और पूर्व की अंतिम सीमाओं को शेष भारत से जोड़ा। यह देश के पहले ऊर्ध्वाधर-लिफ्ट रेलवे समुद्री पंबन पुल तक पहुंची, जो पाक जलडमरूमध्य पर बना है और रामेश्वरम को दक्षिण में भारतीय मुख्य भूमि से जोड़ता है।


वहीं पश्चिम में, पश्चिमी समर्पित माल ढुलाई गलियारे पर वैतरणा से जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह तक बिछाई गई 102 किलोमीटर लंबी नई पटरी पर पहली रेलगाड़ी चलाई गई। हालांकि, इन उपलब्धियों के समानांतर सबसे बड़ी परीक्षा यातायात प्रबंधन और माल ढुलाई की है। त्योहारों और खास अवसरों पर यात्रियों की सहूलियत के लिए विशेष ट्रेनें जरूर चलाई जाती हैं, पर प्लेटफॉर्म पर भीड़भाड़ के चलते भगदड़ जैसे हादसे भी हो रहे हैं। पिछले वर्ष नई दिल्ली स्टेशन पर हुआ ऐसा ही एक हादसा इसकी बानगी है।


दरअसल, क्षमता में वृद्धि के लिए अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत स्टेशनों का पुनर्विकास चल रहा है, पर यह लक्ष्यों से पीछे है। कवच जैसी सुरक्षा प्रणालियां पूर्ण कवरेज से अब भी दूर हैं। इसके अतिरिक्त, माल ढुलाई भारतीय रेलवे की रीढ़ है और इसकी कुल आय का 65 फीसदी हिस्सा माल ढुलाई से आता है, लेकिन तथ्य यह भी है कि माल ढुलाई में फिलहाल सड़क परिवहन की तुलना में रेलवे की हिस्सेदारी महज 27 फीसदी ही है, जिसे बढ़ाने की आवश्यकता है। हालांकि यह भी है कि एक हरित परिवहन प्रणाली के तौर पर रेल उम्मीद की किरण प्रस्तुत करती है, क्योंकि परिवहन उत्सर्जन में इसका योगदान करीब एक फीसदी ही है।


भारतीय रेल एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां उपलब्धियां और चुनौतियां साथ-साथ चल रही हैं। बुलेट ट्रेन के ख्वाब के नजदीक पहुंचना और दूरस्थ क्षेत्रों में रेल विस्तार नई सीमाएं खोलते हैं, पर यातायात का बढ़ता बोझ व माल ढुलाई की जटिलताएं नीति नियंताओं से दूरदृष्टि और निरंतर निवेश की मांग भी करती हैं। अगर गति के साथ संतुलन, तकनीक के साथ समावेशन और विस्तार के साथ सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, तो भारतीय रेल यकीनन वैश्विक स्तर पर भी एक भरोसेमंद मॉडल के रूप में उभरेगी।



 
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