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राहुल अपनी नीतियां तो बताएं

तवलीन सिंह Updated Sun, 06 May 2018 06:52 PM IST
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तवलीन सिंह
राहुल गांधी का भाषण जन आक्रोश रैली में मैंने बहुत ध्यान से सुना। यह रैली पिछले सप्ताह दिल्ली में हुई थी और देश भर से कांग्रेस कार्यकर्ता आए थे अपने अध्यक्ष का भाषण सुनने। मंच पर कांग्रेस के सारे बड़े राजनेता थे और राहुल गांधी की माताजी के चेहरे पर गर्व भी था, मुस्कराहट भी थी। उनकी इस मुस्कुराहट को देखकर मैंने और भी ध्यान से सुना उनके बेटे का भाषण। क्या कुछ ऐसी नई बात कह दी थी कांग्रेस अध्यक्ष ने जो मैंने सुनी नहीं? क्या सिर्फ मैं ही थी, जिसे उनके भाषण से निराशा हुई?


क्या सिर्फ मैं ही थी, जिसे अच्छा नहीं लगा जब कांग्रेस अध्यक्ष ने नरेंद्र मोदी के बारे में यह कहा, ‘प्रधानमंत्री चीन में बैठा है, वहां बिना एजेंडा बात कर रहा है। ऐसा सत्तर वर्षों में किसी प्रधानमंत्री ने नहीं किया है।’ एक तो असभ्य है ‘प्रधानमंत्री बैठा है’ कहना, लेकिन इस असभ्यता के लिए क्षमा की जा सकती है, क्योंकि कांग्रेस अध्यक्ष की हिंदी अभी तक कमजोर है, लेकिन क्या चीन के साथ मोदी सरकार की नीति पर यही उनकी टिप्पणी है?


किसी ने हिसाब लगाया है कि आधे घंटे लंबे भाषण में मोदी का नाम राहुल गांधी ने 17 बार लिया। आरोप बहुत थे। मोदी ने किसानों के कर्ज माफ नहीं किए हैं। मोदी ने नौजवानों को धोखा दिया है। मोदी लोकतंत्र की संस्थाओं को कमजोर कर रहे हैं। मोदी के दौर में बेरोजगारी बढ़ी है।


मोदी किसानों की जमीनें छीनकर अपने अमीर दोस्तों को दे रहे हैं। मोदी के दौर में महिलाओं और बच्चियों पर अत्याचार बढ़ गया है। इतने सारे आरोप लगाने के बाद राहुल ने पूरे आत्मविश्वास से कहा कि कांग्रेस पार्टी कर्नाटक में जीतने जा रही है। मध्य प्रदेश और राजस्थान में भी, और अगले वर्ष का आम चुनाव भी जीतने जा रही है।


दूरदराज से आए अपने कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे, सो उनकी हौसला अफजाई करना जरूरी था। मुझे यह भाषण सुनने के बाद निजी तौर पर निराशा इसलिए हुई, क्योंकि राहुल ने कहीं नहीं कहा कि उनकी नीतियां क्या होंगी भविष्य में। क्या इस देश के मतदाताओं को अधिकार नहीं है यह पूछने का कि चार वर्ष विपक्ष में रहने के बाद कांग्रेस ने क्या सीखा है? स्वतंत्र भारत के 70 वर्षों में से कांग्रेस सत्ता में पचास वर्ष से अधिक समय तक रही है।


इस दौरान चीन जैसे देश, जो हर क्षेत्र में हमारे पीछे हुआ करते थे, इतने आगे निकल गए हैं कि चीन के आम नागरिक की वार्षिक कमाई हमारे आम नागरिक से पांच गुना अधिक है। शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों में चीन आज विकसित पश्चिमी देशों का मुकाबला करता है। आर्थिक तौर पर इतना धन है चीन के पास आज, कि हमारे पड़ोसी देशों में बड़ी-बड़ी योजनाओं का निर्माण कर रहा है अपने पैसों से। सड़कें, बिजली घर, बंदरगाह बन रहे हैं पाकिस्तान, श्रीलंका और मालदीव में। सो इन देशों के साथ चीन की दोस्ती बढ़ रही है इतनी कि हमें खतरा महसूस होने लगा है। रही बात सैनिक बल की, तो यहां भी चीन हमें बहुत पीछे छोड़ चुका है।


राहुल गांधी जब मोदी पर अपने हर भाषण में हमले करते फिर रहे हैं चुनावों के इस मौसम में, तो क्या कभी एकांत में बैठकर इस पर भी विचार करते हैं कि भारत इतना पीछे कैसे रह गया है? चीन के अलावा हमें पीछे छोड़ गए हैं दक्षिण-पूर्वी एशिया के तकरीबन सारे देश? क्या इसका भी दोष राहुल आप मोदी को देते हैं? नहीं देते हैं, अगर तो क्या आप बता सकते हैं कि आपको और कांग्रेस को दोबारा सत्ता में आने का मौका मिलेगा, तो आप कौन-सी नई नीतियां लेकर आएंगे? कौन-सा चमत्कार करके दिखाएंगे अगली बार?
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