फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स

सांसद विकास निधि पर सवाल

अवधेश कुमार Published by: Raman Singh Updated Thu, 03 Jan 2019 05:41 PM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
अवधेश कुमार

सांसद निधि के इस्तेमाल संबंधी ताजा रिपोर्ट पहली नजर में निराश करती है। केंद्रीय सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने जो आंकड़ा जारी किया है, उसके अनुसार, वर्ष 2014 से अब तक यानी 16 वीं लोकसभा के अब तक के कार्यकाल में 545 में से केवल 35 लोकसभा क्षेत्रों में ही सांसद निधि का इस्तेमाल कर स्वीकृत परियोजनाएं पूरी की गई हैं। यानी करीब पांच वर्षों के दौरान 25 करोड़ रुपये खर्च करने वाले केवल 35 लोकसभा सांसद हैं। इनमें सबसे ज्यादा पश्चिम बंगाल के 10 सांसद हैं। उसके बाद उत्तर प्रदेश में छह, मध्य प्रदेश में चार, पंजाब में तीन, असम, गुजरात एवं हरियाणा में दो-दो, राजस्थान, अरुणाचल, मणिपुर, बिहार, नगालैंड और छत्तीसगढ़ में एक-एक सांसदों को पूरी निधि निर्गत की गई है।



दरअसल, सांसद क्षेत्रीय विकास योजना या सांसद निधि की नियमावली के अनुसार, प्रत्येक वर्ष की राशि ढाई-ढाई करोड़ की किस्तों में दो बार निर्गत होती है। यदि आपने एक किस्त का काम पूरा कर उसका उपयोग प्रमाण पत्र जमा करा दिया, तभी दूसरी किस्त जारी होती है। इसी में विलंब होता है और दूसरी किस्त जारी नहीं होती। 19 दिसंबर को लोकसभा में इस पर बयान देते हुए केंद्रीय सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्री डीवी सदानंद गौड़ा ने कहा कि कई कारणों से जिला प्रशासन द्वारा उपयोग प्रमाण पत्र जमा करने में देरी होती है। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार प्रत्येक साल एक बार में ही पूरी राशि जारी करने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है।

 

योजना के तहत सांसद अपने संसदीय क्षेत्र में स्थानीय लोगों की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए टिकाऊ सामुदायिक संपदा के निर्माण की सिफारिश करते हैं। इसके तहत वे पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और सड़क इत्यादि का निर्माण कराते हैं।


अगर आप सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना की वेबसाइट देखें, तो पता चलेगा कि चार सितंबर तक किसी भी लोकसभा सदस्य को वित्त वर्ष 2018-19 का सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास निधि योजना का धन आवंटित नहीं हुआ है। इस वित्त वर्ष में सांसद विकास निधि की कुल 2,920 किस्तें रुकी हुईं हैं। 2.5 करोड़ रुपये की एक किस्त से 2,920 को गुणा कर दें, तो यह 7,300 करोड़ रुपये होती है। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि 14वीं और 15वीं लोकसभा तथा राज्यसभा को मिलाकर 1,156 सांसदों के कामकाज का खाता अभी तक बंद नहीं हुआ है। जाहिर है, या तो काम समय पर खत्म नहीं हुआ और यदि हो गया, तो उसका उपयोग प्रमाण पत्र तथा ऑडिट प्रमाण पत्र सही तरीके से विभाग को मिला नहीं है।


नरेंद्र मोदी सरकार ने सांसद निधि से कराए कामों की समीक्षा और जानकारी मोबाइल ऐप के जरिये देने की व्यवस्था शुरू की है। अपेक्षा यह है कि सांसद अपने काम के वीडियो और फोटोग्राफ अपलोड करेंगे, जिससे किस्तों में कोई रुकावट न आए। इसका उद्देश्य पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना भी है। निस्संदेह, इस योजना में भ्रष्टाचार सहित कई प्रकार की अनियमितताएं आदि की शिकायतें और कहीं-कहीं इनके प्रमाण भी सामने आते हैं। किंतु ये बातें लगभग हर योजना के साथ है। इनको दूर करने के उपाय किए जा रहे हैं। यह आलोचना स्वीकार नहीं की जा सकती कि सांसद निधि का सारा धन व्यर्थ चला जाता है। 1993-94 से लेकर अगस्त 2017 तक इसके लिए 44,929.17 करोड़ रुपये के 18,82,180 कार्यों और योजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनमें से 75 प्रतिशत कार्यों के पूरे होने की भी बात है। भारत जैसे देश में सांसद के क्षेत्र को देखते हुए पांच करोड़ की राशि अत्यंत ही छोटी है। किसी प्रमाण पत्र के अभाव में इसे रोके रखना उचित नहीं होगा।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next