फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ऐसे में भाजपा ही क्या कर लेगी

Sun, 04 Aug 2013 08:38 PM IST
तवलीन सिंह
विज्ञापन
विज्ञापन
आज सुनिए राजनाथ सिंह की हाल में हुई अमेरिका यात्रा की अजीब दास्तान। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अपने दल के तीन वरिष्ठ नेताओं को साथ लेकर पहुंच तो गए थे अमेरिका छह दिन के दौरे पर, लेकिन क्या उपलब्धि रही इस यात्रा की, इस सवाल का जवाब न उनके पास है, न किसी और के पास। उनका एक ही वक्तव्य देश के अखबारों में छपा उनकी यात्रा के दौरान, और वह यह था कि वह अमेरिका गए हैं नरेंद्र मोदी के लिए वीजा दिलवाने की बातचीत करने। लेकिन वह किससे वीजा के बारे में बातचीत करने गए थे, यह कोई नहीं जानता।
विज्ञापन


वाशिंगटन पहुंचने के बाद भाजपा अध्यक्ष से अमेरिकी राष्ट्रपति का एक भी अधिकारी नहीं मिलने गया और न ही उन जगहों में कोई पहुंचा, जहां अध्यक्ष जी बुद्धिजीवियों से बातें करने गए थे। इन छोटे सम्मेलनों में मेरे कुछ दोस्त उपस्थित थे, जिनसे मुझे मालूम हुआ है कि राजनाथ सिंह ने वहां यूपीए सरकार की नीतियों का पूरा समर्थन किया। तारीफें कीं खाद्य सुरक्षा कानून की और मनरेगा की प्रशंसा करते वह नहीं थके। मेरे एक दोस्त के शब्दों में, हम वहां गए थे यह सुनने कि भाजपा और कांग्रेस की आर्थिक नीतियों में फर्क क्या है। और हैरान हुए, जब भाजपा अध्यक्ष ने ऐसी बातें कीं, जैसे वह कांग्रेस की बी टीम के सदस्य हों। जब जनाब अध्यक्ष जी अपने साथियों को लेकर अमेरिकी जनप्रतिनिधियों से मिलने गए, तो सुनने में आया है कि वहां भी बातें ऐसी कीं, जिन्हें सुनकर सांसदों को समझ में नहीं आया कि भाजपा का प्रधानमंत्री अगर बनता है 2014 के चुनाव के बाद, तो उसकी नीतियों और सोनिया-मनमोहन सरकार की नीतियों में क्या फर्क रहेगा।

इससे भी ज्यादा भ्रमित हुए वाशिंगटन में राजनाथ सिंह से मिलने वाले, जब उन्होंने अफगानिस्तान मुद्दे पर तकरीबन वही भाषण दिया, जो उनसे एक घंटा पहले कंवल सिब्बल दे गए थे उसी जगह। पूर्व विदेश सचिव इन दिनों जुड़े हैं एक ऐसी संस्था से, जो बनी है भाजपा के समर्थन से। तो सबको मालूम हो गया कि राजनाथ सिंह का अंग्रेजी में यह भाषण किसने लिखा होगा। भाषण में राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत की अच्छी दोस्ती है हर पड़ोसी देश के साथ। क्या उन्हें इतना भी नहीं मालूम, कि 26/11 के बाद पाकिस्तान के साथ हमारी औपचारिक तौर पर बातचीत भी शुरू नहीं हो सकी है आज तक? क्या उन्हें मालूम नहीं है कि बांग्लादेश, नेपाल, मालदीव और श्रीलंका के साथ अक्सर तनाव रहता है रिश्तों में, और हाल में तो यूपीए सरकार की नीतियों के कारण भूटान के साथ भी रिश्ता थोड़ा मुश्किल हो गया है?
विज्ञापन


राजनाथ सिंह की इस अमेरिका यात्रा ने दो चीजें बिल्कुल साफ कर दी हैं। एक यह कि हमारे राजनेता अक्सर बेमतलब निकल पड़ते हैं विदेश यात्राओं पर जनता का पैसा खर्च करने। इस गलत आदत का दोष सिर्फ भाजपा पर नहीं लग सकता, क्योंकि सब करते हैं ऐसा। गर्मी शुरू होते ही दिल्ली में हमारे राजनेताओं और सांसदों के विदेशी दौरे शुरू हो जाते हैं और अक्सर देश के लिए कुछ हासिल नहीं करके लौट आते हैं। ऐसी बुनियादी चीजें भी नहीं सीखकर आते कि यदि अन्य देशों के शहर साफ-सुथरे हो सकते हैं, तो हमारे क्यों नहीं हो सकते।

दूसरी बात, जो राजनाथ सिंह के इस अमेरिकी दौरे ने साबित कर दी है, वह यह कि नरेंद्र मोदी अगर प्रधानमंत्री बन भी जाते हैं 2014 में, तो उनके पास काबिल लोगों का गंभीर अभाव होगा। सोचिए जरा कि अगर इस दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष का यह हाल है, तो औरों का क्या हाल होगा! कहां से लाएंगे नरेंद्र भाई ऐसे लोगों को, जिनमें उस परिवर्तन को लाने की क्षमता होगी, जिसका सुनहरा सपना उन्होंने देश के सामने रखा है? मैंने जब यह सवाल उनके एक करीबी से किया हाल में, तो उनका जवाब यह था कि नरेंद्र मोदी पूरी कोशिश करेंगे ऐसे लोगों को लोकसभा का टिकट देने की, जिनमें काबिलियत हो, भले उनके पास राजनीतिक अनुभव न हो। ऐसा अगर वास्तव में करने की सोच रहे हैं नरेंद्र मोदी, तो अभी से शुरू करें ऐसे लोगों को जोड़ने का काम। समय बहुत कम है उनके पास, और राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के राजनेताओं का इतना बुरा हाल है कि उनके सामने तो कांग्रेस के घिसे-पिटे मंत्री भी अच्छे दिखते हैं।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें