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तेजी से कम हो रही है गरीबी

अवधेश कुमार Published by: Nootan Gupta Updated Mon, 18 Feb 2019 06:02 PM IST
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अवधेश कुमार
 

हाल ही ही में भारत से जुड़ी दो ऐसी रिपोर्टें आई हैं, जो देश में गरीबों की संख्या में आई तेज गिरावट के बारे में बताती हैं। ब्रुकिंग्स का एक अध्ययन बताता है कि हर मिनट पर 44 भारतीय अत्यंत गरीबी की श्रेणी से बाहर निकल रहे हैं। 


हाल ही में भारत में गरीबी को लेकर ऐसी रिपोर्टें आईं, जिनसे हर भारतवासी प्रसन्न होगा। वर्ल्ड डाटा लैब ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 2030 तक भारत में केवल 30 लाख लोग ही ऐसे होंगे, जिन्हें अति गरीब कह सकते हैं। वर्ल्ड डाटा लैब उन्नत सांख्यिकी मॉडल के जरिये वैश्विक गरीबी को मॉनिटर करती है।


विश्व भर में गरीबी का इसका आकलन मान्य है। ऐसे ही ब्रुकिंग्स के फ्यूचर डेवलपमेंट ब्लॉग में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, हर मिनट पर 44 भारतीय अत्यंत गरीबी की श्रेणी से बाहर निकल रहे हैं। इसके अनुसार, भारत का अत्यंत गरीब आबादी वाला स्थान मई, 2018 से नाइजीरिया ने हासिल कर लिया है। वैश्विक मानक के अनुसार, अत्यंत गरीबी के दायरे में वे लोग आते हैं, जिनके पास जीवन यापन के लिए रोजाना 1.90 डॉलर यानी 134 रुपये भी नहीं होते।


भारत सरकार के आंकड़ों के अनुसार, 2012 में ग्रामीण क्षेत्र में गरीबी दर 25.7 प्रतिशत और शहरों में 13.7 प्रतिशत थी। वर्ल्ड डाटा लैब ने कहा है कि 2018 में भारत में ग्रामीण क्षे़त्र में केवल 4.3 प्रतिशत तथा शहरी क्षेत्र में 3.8 प्रतिशत आबादी को ही गरीब माना जाएगा।


भारत सरकार ऐसा आंकड़ा दे, तो हंगामा मच जाए। ब्रुक्रिंग्स का अध्ययन कहता है कि 2022 तक भारत में अत्यंत गरीब जनसंख्या केवल तीन प्रतिशत रहेगी। इसका भी मानना है कि 2030 तक भारत से अत्यंत गरीबी की परिधि में आने वाली आबादी पूरी तरह खत्म हो जाएगी। इसी अध्ययन रिपोर्ट के मुताबिक, मई 2018 में भारत में सात करोड़ 30 लाख लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे थे। इनकी संख्या नाइजीरिया में आठ करोड़ 70 लाख है। वर्ल्ड डाटा लैब के मुताबिक, अब भी भारत में करीब पांच करोड़ लोग ऐसे हो सकते हैं, जो 1.90 डॉलर प्रतिदिन पर गुजारा करते हैं।


संयुक्त राष्ट्र का उद्देश्य 2030 तक दुनिया से गरीबी हटाना है। इसका मानना है कि तब तक गरीबी पूरी तरह समाप्त करने के लिए भारत को सात से आठ फीसदी की दर से विकास करना होगा। इस समय हमारी विकास दर इसी के आसपास है।


सहस्राब्दी विकास लक्ष्य रिपोर्ट, 2014 में कहा गया था कि दुनिया के समस्त निर्धनतम लोगों का 32.9 प्रतिशत हिस्सा भारत में रहता है। विश्व बैंक ने आठ वर्ष पहले कहा था कि विश्व की संपूर्ण गरीब आबादी का तीसरा हिस्सा भारत में है।
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आज के आंकड़ों से तुलना करें, तो पता चलता है कि देश में गरीबी तेजी से कम हो रही है। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर, मनरेगा, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, स्वच्छता कार्यक्रम, जनवितरण प्रणाली, बच्चों व माताओं के लिए पोषण पर आधारित योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन, पीने का साफ पानी, शौचालय की सुविधा और स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुंच आदि से चीजें बदल रही हैं। तेजी से बनती सड़कें, बंदरगाह, हवाई अड्डे आदि विकास की गति तीव्र करने के साथ रोजगार के साधन तो हैं ही।


किसानों को फोकस करके जो योजनाएं बनी हैं उनका एक सीमा तक लाभ अवश्य मिला है। ये ठीक तरीके से आगे बढ़ें, तो जैसा नीति आयोग ने माना है, 2022 तक ही हम गरीबी मुक्त भारत का लक्ष्य हासिल कर सकते हैं। 


यह तो नहीं कहा जा सकता कि देश के निचले तबके के जीवन की दुश्वारियां मिट गई है। वहां तक पहुंचने तथा मानक जीवन स्तर पर पूरी आबादी को लाने के लिए काफी कुछ करना शेष है। पर जितना हुआ है, उसे स्वीकारने की जरूरत है।
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