2024 को भारत में सबसे गर्म वर्ष दर्ज किया गया, जिसके कारण मई 2024 में बिजली की अधिकतम मांग 250.2 गीगावाट तक पहुंच गई। इलेक्ट्रिक पावर सर्वे के अनुसार, 2030 तक आवासीय क्षेत्र में बिजली की मांग दोगुनी होने की उम्मीद है। ऐसे में, घरों को रूफटॉप सोलर से जोड़ना बहुत जरूरी हो गया है। काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू) का आकलन है कि भारत में आवासीय छतों पर 118 गीगावाट सौर ऊर्जा क्षमता है, जो आवासीय क्षेत्र की 353 अरब यूनिट की वार्षिक बिजली मांग (2023 तक) को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। आवासीय रूफटॉप सोलर से विद्युत वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) को भी लाभ होता है, क्योंकि यह बिजली सब्सिडी पर निर्भरता घटाता है, उनकी वित्तीय स्थिति सुधारता है, विद्युत वितरण का नुकसान घटाता है और बिजली की मांग का बेहतर प्रबंधन करने में मदद करता है। हालांकि, इस क्षमता को पाने में कुछ बाधाएं भी हैं, जैसे उपभोक्ता जागरूकता के साथ-साथ वेंडर्स की उपलब्धता सीमित होना, अनुमोदन में देरी, जटिल नीतियां व नियम, और सीमित वित्तीय विकल्प इत्यादि। ऐसे में, आवासीय रूफटॉप सोलर क्षमता को बढ़ाने के लिए चार कदम उठाए जा सकते हैं। सबसे पहले, लक्षित उपभोक्ता जागरूकता अभियानों के जरिये रूफटॉप सोलर को लगाने की प्रक्रिया को तेज करना जरूरी है।
पीएम सूर्य घर योजना ने उपभोक्ताओं में रुचि पैदा की है और बड़े पैमाने पर रजिस्ट्रेशन भी हुए हैं। लेकिन इन्हें लगाने की दर अब भी कम है। मोबाइल एप और वेबसाइटों पर वीडियो के रूप में उपलब्ध गाइड्स से उपभोक्ताओं का सीधा जुड़ाव सीमित रहता है, जिससे उनके प्रभावित होने और रूफटॉप सोलर लगाने की संभावनाएं घट जाती हैं। चूंकि पीएम सूर्य घर योजना के कुल बजट का एक प्रतिशत (657 करोड़ रुपये) हिस्सा जन-जागरूकता और शैक्षणिक गतिविधियों के लिए आवंटित है, इसलिए इसे स्पष्ट और सर्वसुलभ जानकारी देने के लिए लक्षित रूप से इस्तेमाल करने की जरूरत है। दूसरा, रूफटॉप वेंडर्स के इकोसिस्टम को मजबूत बनाना बहुत जरूरी है। सभी राज्यों में सोलर वेंडर्स की उपलब्धता एक समान नहीं है।
जनवरी 2025 में, गुजरात में 1200 से अधिक वेंडर थे, जबकि झारखंड में इनकी संख्या 68 थी। चूंकि पीएम सूर्य घर योजना पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर सब्सिडी देती है, इसलिए वेंडर्स की असमान उपलब्धता के कारण राज्यों में इनकी स्थापना भी असमान रह सकती है। रूफटॉप सोलर सिस्टम के बेहतर प्रदर्शन और उपभोक्ताओं का भरोसा जगाने के लिए, इनकी इंस्टॉलेशन गुणवत्ता सुनिश्चित करना भी जरूरी है। गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए वेंडर रेटिंग कार्यक्रम को भी तेजी से लागू करना चाहिए। तीसरा, रूफटॉप सोलर के लिए नियमों को आसान बनाना जरूरी है। पीएम सूर्य घर पोर्टल ने कुछ प्रगति की है, लेकिन अलग-अलग राज्यों में मंजूरी मिलने में एक से सात महीने तक का समय लगता है। इससे उपभोक्ताओं को सब्सिडी मिलने में देरी होती है और उन्हें ज्यादा कर्ज लेना पड़ता है। चौथा, कार्बन उत्सर्जन कटौती तेज करने के लिए रूफटॉप सोलर को अन्य मौजूदा योजनाओं से जोड़ना जरूरी है।
ऐसा एक उदाहरण पीएम आवास योजना और पीएम सूर्य घर योजना को जोड़ना है। सरकार का एक करोड़ शहरी गरीब और मध्यम आय वर्ग के परिवारों को पक्के मकान देने के लिए 10 लाख करोड़ रुपये निवेश करने का लक्ष्य है। इन घरों की छतें मजबूत हैं और ये रूफटॉप सोलर लगाने के लिए आदर्श हैं। इन परिवारों को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाकर राज्य के ऊपर से बिजली सब्सिडी का बोझ घटाया जा सकता है। ऐसे ही पीएम सूर्य घर योजना का मॉडल सोलर विलेज ग्रामीण आजीविका प्रयासों और पीएम कुसुम योजनाओं का पूरक हो सकता है, जिसका लक्ष्य कृषि से संबंधित बिजली की मांग को सौर ऊर्जा से पूरा करना है। भारत को अपनी अर्थव्यवस्था को कार्बन मुक्त बनाने और घरों तक भरोसेमंद बिजली आपूर्ति को सुनिश्चित करने के लिए, मौजूदा प्रयासों को उपभोक्ता-केंद्रित बनाने के लिए रूफटॉप सोलर एक सतत और ऊर्जा-स्वतंत्र भविष्य सुनिश्चित कर सकता है।
-प्रोग्राम लीड, काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू)