मुझे अच्छी तरह याद है कि स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने ‘चलता है’ वाली सोच से हटकर ‘बदल सकता है’ वाली सोच अपनाने की बात कही थी। यह बात मुश्किल समस्याओं के प्रति उनके दृष्टिकोण के एक अहम पहलू को दिखाती है। वह समस्याओं से समझौता करने में विश्वास नहीं रखते। इसके बजाय, वह कदम-दर-कदम स्थिति को बदलने का काम करते हैं। मैं नरेंद्र भाई मोदी को पहले पार्टी संगठन में और बाद में सरकार में एक सहकर्मी के तौर पर जानता हूं। हममें से जो लोग दशकों तक भारतीय जनता पार्टी में काम करते रहे हैं, उनके लिए अनुच्छेद 370 और राम जन्मभूमि कोई मामूली राजनीतिक मुद्दे नहीं थे। लेकिन, मैं ईमानदारी से कहूंगा कि कुछ पल ऐसे भी आए, जब हमारे अपने कार्यकर्ताओं को भी यह शक होने लगा था कि क्या वे अपने जीवन में कभी इन मुद्दों का समाधान होते देख पाएंगे। लेकिन, नरेंद्र भाई मोदी ने इसे संभव कर दिखाया।
जब वह अक्तूबर 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री बने, तो राज्य उसी साल आए भूकंप की तबाही से जूझ रहा था। मोदी जी समझ गए थे कि सबसे पहला काम लोगों का भरोसा बहाल करना है। मुख्यमंत्री के तौर पर उनकी पहली दिवाली गांधीनगर में मनाई जा सकती थी। इसके बजाय, उन्होंने इसे कच्छ में भूकंप से प्रभावित परिवारों के साथ मनाया। वर्षों तक चली उनकी नीतियों ने कच्छ को नए सिरे से खड़ा होने में मदद की। गुजरात में पानी की कमी एक स्थायी चुनौती थी। सरदार सरोवर परियोजना की योजना दशकों पहले बनी थी और इसकी आधारशिला 1961 में रखी गई थी। दशकों तक यह परियोजना उलझनों और देरी की शिकार रही। मोदी जी ने कई वर्षों तक मुश्किलों के बावजूद इस परियोजना को आगे बढ़ाया और आखिरकार यह सुनिश्चित किया कि बांध बनकर तैयार हो और नर्मदा का पानी गुजरात के पानी की कमी वाले इलाकों तक पहुंचे।
2014 में, नरेंद्र भाई मोदी तब प्रधानमंत्री बने, जब भारत की अर्थव्यवस्था को कमजोर पांच अर्थव्यवस्थाओं में से एक माना जाता था और बैंकिंग प्रणाली कई तरह की समस्याओं से घिरी हुई थी। उन्होंने इन समस्याओं की पहचान करने और उन्हें हल करने की प्रक्रिया शुरू की। इसके बाद, भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बन गई। बहुत-से लोगों का मानना था कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के लिए जरूरी राजनीतिक सहमति कभी नहीं बन पाएगी। लेकिन, मोदी जी की राजनीतिक इच्छाशक्ति और प्रतिबद्धता की बदौलत ऐसा संभव हुआ। आज, हम भारत को डिजिटल भुगतान के मामले में दुनिया में नंबर एक के तौर पर देखते हैं। लेकिन, यह भी चुनौतियों से पार पाकर ही हुआ है। कई अनुभवी नेताओं ने मजाक में पूछा था कि सड़क किनारे सामान बेचने वाले को डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम में कैसे शामिल किया जा सकता है। प्रधानमंत्री मोदी ने व्यवहार में यह बदलाव संभव कर दिखाया।
गरीबी एक अन्य ऐसी समस्या थी, जिसे भारत ने स्थायी मान लिया था। आज, 25 करोड़ भारतीय बहुआयामी गरीबी से बाहर आ चुके हैं। अगर हम पद्म पुरस्कारों की बात करें, तो आधुनिक भारत के इतिहास में पहली बार नरेंद्र भाई मोदी की सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि जिन्हें पहचान नहीं मिली, उन्हें पहचान मिले और जो लोग चुपचाप, बिना दिखे काम कर रहे थे और हकदार थे, उन्हें देखा जाए और अहमियत दी जाए। 2014 के बाद, हमारे देश के गुमनाम नायकों को हर साल नागरिक सम्मानों की सूची में जगह मिली।
कई दशकों तक, नक्सलवाद देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ी समस्या बना रहा, जिसमें हजारों लोगों की जान गई। सुरक्षा और विकास की दोहरी रणनीति अपनाकर, लगभग छह दशकों से चली आ रही इस समस्या को अब प्रभावी ढंग से खत्म कर दिया गया है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की सबसे अहम बात यह नहीं है कि हर समस्या गायब हो गई है, बल्कि यह है कि उन्होंने समस्याओं के सामने असहाय महसूस करने की पुरानी सोच को खत्म कर दिया है। कोविड-19 महामारी के समय, दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं और स्वास्थ्य प्रणालियों पर भारी दबाव पड़ा। लेकिन, नरेंद्र भाई मोदी ने एक-दूसरे से दूरी बनाए रखने और टीकाकरण अभियान, दोनों ही समय में देश को एकजुट रखा। कई अन्य बड़े देशों की तुलना में भारतीय अर्थव्यवस्था अधिक तेजी से पटरी पर वापस लौटी।
हाल ही में पश्चिम एशिया में आए संकट ने ऊर्जा सुरक्षा, पोत परिवहन और व्यापार से जुड़ी नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। लेकिन, सरकार और समाज को साथ लेकर चलने वाला भारत का दृष्टिकोण परिपक्व और जिम्मेदार रहा है। पिछले कुछ वर्षों में एक नारा लोकप्रिय हुआ है, जो इस बदलाव को बखूबी बयां करता है: ‘मोदी है, तो मुमकिन है।’ इसे भारत के राजनीतिक बदलाव में भी देखा जा सकता है। भाजपा को एक ऐसी पार्टी माना जाता था, जो कुछ खास भौगोलिक और सामाजिक क्षेत्रों तक ही सीमित थी। प्रधानमंत्री मोदी की कड़ी मेहनत का ही नतीजा है कि आज, पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत जैसे क्षेत्रों में पार्टी का विस्तार और गरीबों, ग्रामीणों व वंचित समुदायों के बीच पार्टी का बढ़ता समर्थन देश के राजनीतिक मानचित्र को बदल चुका है।
जिन्होंने उनके सफर को करीब से देखा है, वे जानते हैं कि नरेंद्र भाई मोदी यह सोचकर शुरुआत नहीं करते कि मौजूदा हालात क्या इजाजत देते हैं। वह यह सोचकर शुरुआत करते हैं कि देश को किस चीज की जरूरत है और फिर उसे पूरा करने के लिए जरूरी हालात बनाते हैं। यह सोच उस देश के लिए बेहद जरूरी है, जो 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनना चाहता है।