राजनेताओं के फोन टेप हो रहे हैं और मैं टुकुर-टुकुर देख रहा हूं। मैं सार्वजनिक घोषणा करता हूं कि मेरा फोन भी टेप किया जाए। मैं फोन टेपिंग से डरता नहीं हूं। पता नहीं राजनेता इससे डरते क्यों हैं? डरने की इसमें बात क्या है, राजनेता का जीवन तो खुली किताब की तरह होता है। उनके फोन भी राष्ट्रीयता से ही भरे हुए होंगे, इसमें आरोप-प्रत्यारोप की बात ही क्या है!
वे डरें तो डरें, लेकिन मैं फोन टेपिंग से तनिक भी नहीं घबराता हूं, क्योंकि मेरे फोन में कोई आपत्तिजनक वार्ता सम्मिलित है ही नहीं। सरकार से मैं करबद्ध प्रार्थना करता हूं कि वह मेरा फोन मुझे बता कर टेप कर ले या चुपचाप करा ले, मैं दोनों ही स्थितियों के लिए तैयार हूं। अरे भाई, मैं कोई साजिश तो रच नहीं रहा अथवा देशद्रोह जैसा अपराध भी नहीं कर रहा। मुझे सांसदों अथवा विधायकों की खरीद-फरोख्त भी नहीं करनी, किसी की सरकार न बनानी और न गिरानी, तो मैं डरूं क्यों?
मैं थोड़ा-सा अपने फोनों का विवरण बता दूं कि मेरे फोन मेरे एकदम वैयक्तिक हैं, किसी षड़यंत्र का भाग नहीं हैं। मित्रों व परिजनों से कुशल क्षेम के फोन, हारी-बीमारी में एक-दूसरे के हाल-चाल जानने के फोन और गांव में माता-पिता कैसे हैं, उनकी कुशलता जानने के अलावा फोनों में रखा क्या है! मेरे एक मित्र हैं, वह पढ़े-लिखे हैं, बुद्धिजीवी हैं, उनके फोन अवश्य देश की चिंता को लेकर आते हैं। उसमें भी यही विश्लेषण होता है कि आखिर देश को और सरकार को अथवा राजनेताओं को हो क्या गया है कि वे इसे रसातल में ले जाने को उतारू हो रहे है।
इस फोन वार्ता में आपत्तिजनक है क्या? देश को सरासर लूटो, गबन-घोटाला करो, तो उस आदमी की आलोचना तो आम आदमी भी करेगा ही। एक फोन मुझे नियमित रूप से डॉक्टर से और अपने दवा वाले को करना पड़ता है। भाई यह दवा खत्म हो गई दे जाना और बिल बनाकर पैसे ले जाना। अब यह कोई हवाला का तो लेन-देन है नहीं, जो मैं डरूं! महिलाओं के भी फोन आते हैं। कुछ महिलाएं मुझसे बात करना चाहती हैं, तो कुछ मेरी धर्मपत्नी से। लेकिन इनमें भी सीडी बनाने लायक वार्तालाप कुछ नहीं है।
कोई अवैध व्यवसाय करता नहीं हूं, जिसमें डरने जैसी कोई बात हो। मेरा मतलब न तो मैं कोई काम करवाने का पैसा लेता हूं, न किसी की हत्या की सुपारी लेता अथवा तस्करी करता हूं। इसलिए आराम से करो मेरा फोन टेप, मुझे खुशी होगी।