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क्रिकेट से खिलवाड़ करने वाले

विवेक शुक्ला Updated Tue, 27 Mar 2018 07:05 PM IST
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विवेक शुक्ला

स्टीव स्मिथ ने अपना नाम खेलों की दुनिया के खलनायकों की काली सूची में लिखवा लिया है। इसमें दक्षिण अफ्रीका के पूर्व कप्तान हैंसी क्रोनिए और कनाडा के फर्राटा धावक बेन जॉनसन भी हैं। ये सभी मोहम्मद अली, सचिन तेंदुलकर, पेले, उसेन बोल्ट जैसे सर्वकालिक महानतम खिलाड़ी नहीं बन सके। स्मिथ, जॉनसन और हैंसी क्रोनिए में महान खिलाड़ी बनने के गुण मौजूद थे, पर उन्होंने छोटे-मोटे लाभ के लिए खेल भावना के साथ खिलवाड़ किया। अगर हैंसी क्रोनिए पैसा कमाने के चक्कर में सट्टेबाजों के चंगुल में फंसे, तो स्मिथ और जॉनसन ने जीतने के लिए धोखेबाजी की। केप टाउन टेस्ट को किसी भी हालत में जीतने की फिराक में स्मिथ ने अपने युवा साथी से बॉल टैंपरिंग करवाई। इस मामले में कप्तान स्मिथ के फंसने के बाद यह कौन और कैसे मानेगा कि आस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों ने ऐसी हरकत पहले कभी नहीं की होगी?



और जरा गुजरे दौर के पन्ने खंगाल लेते हैं। कनाडा के धावक बेन जॉनसन ने 1988 के सियोल ओलंपिक खेलों में सौ मीटर फर्राटा दौड़ रिकॉर्ड 9.79 सेंकड में पूरी करके खेल जगत में हलचल मचा दी थी। लेकिन बाद में ड्रग टेस्ट में उन्हें पॉजिटिव पाया गया और उनसे फौरन स्वर्ण पदक वापस ले लिया गया। दूसरे स्थान पर रहे कार्ल लुईस को यह स्वर्ण पदक प्रदान किया गया।


खेलों में धोखेबाजी करने वाले भूल जाते हैं कि वे विश्व नागरिक हैं। उन्हें उनके प्रशंसक अपना सब कुछ मानते हैं। ये अपने चाहने वालों के रोल मॉडल होते हैं। अगर रोल मॉडल ही घूस लेते हुए पकड़ा जाए या बॉल टेंपरिंग करेगा, तो फिर बचेगा क्या!


बॉल टेंपरिंग की इस ताजा घटना के बाद अब आस्ट्रेलियाई टीम खेलों में नैतिकता, खेल भावना, स्लेजिंग जैसी बातें करना भूल जाएगी। उसकी छवि तार-तार हो चुकी है। अब क्रिकेट प्रेमियों को याद आ रही है, वह घटना, जब स्टीव स्मिथ भारत-आस्ट्रेलिया के बीच बंगलूरू टेस्ट मैच में डीआरएस लेने से पहले पेवेलियन में बैठे अपने कोच की राय जानना चाह रहे थे। तब भारतीय कप्तान कोहली ने उन्हें पकड़ा था। अपने को विश्व की सर्वश्रेष्ठ क्रिकेट टीम होने का दावा करने वाली आस्ट्रेलिया टीम के पूर्व कप्तान ग्रेग चैपल ने 1981 में क्रिकेट को अपनी हरकत से भारी नुकसान पहुंचाया था। आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच बेंसन एंड हेजेस वर्ल्ड सीरिज कप का मैच चल रहा था। पहले खेलते हुए ऑस्ट्रेलिया ने चार विकेट पर 235 रन बनाए। अब खेलने की बारी थी न्यूजीलैंड की। उसका स्कोर था आठ विकेट पर 229 रन। अंतिम गेंद पर न्यूजीलैंड को छह रन की जरूरत थी, मैच को टाई करवाने के लिए। गेंद फेंक रहे थे ट्रेवर चैपल। वे ऑस्ट्रेलिया के कप्तान रहे इयान और ग्रेग चैपल के अनुज थे। कप्तान ग्रेग ने ट्रेवर से कहा कि वह ब्रायन मक्केनी को अंडरआर्म गेंद फेंकें। अंडरआर्म मतलब लुढ़काकर। ट्रेवर ने मक्केनी को अंडरआर्म गेंद फेंकी। जाहिर है कि वह मैच आस्ट्रेलियाई टीम जीत गई, क्योंकि उस गेंद पर छक्का नहीं लग सकता था। यानी आस्ट्रेलियाई टीम जीतने के लिए तमाम गलत पैंतरे अपनाने से परहेज नहीं करती।


तो स्पष्ट है कि खेल भावना की अवहेलना करने वाले कभी मोहम्मद अली, पेले, रोजर फेडरेर जैसे खेलों के विश्व नायक नहीं बन सकते। जब भी मुक्केबाजी, फुटबॉल और टेनिस की चर्चा होगी, तो इन तीनों का नाम बड़े आदर से लिया जाएगा। यही बात अपने सचिन तेंदुलकर के संबंध में भी कही जा सकती है। महान बनने के लिए लंबा तप और त्याग करना होता है। और यह करने में स्टीव स्मिथ नाकाम रहे।

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