इस पृष्ठभूमि में भारत ने अब जो आक्रामकता दिखाई है, वह रणनीतिक अधिक प्रतीत होती है, जो साफ संकेत देती है कि भारत अब अपनी वैश्विक छवि को तोड़ने या कमजोर करने की किसी भी कोशिश को नजरअंदाज नहीं करेगा। उल्लेखनीय है कि चीन और तुर्किये का पाकिस्तान के साथ गठजोड़ कोई नया नहीं है।
तुर्किये द्वारा पाकिस्तान को भारत के खिलाफ हथियार उपलब्ध कराए जाने और उसके एक युद्धपोत के कराची बंदरगाह तक पहुंचने की खबरें इसके ही उदाहरण हैं। दूसरी ओर चीन, पाकिस्तान में जिसके एयर डिफेंस सिस्टम की भारत ने हवा निकाल दी थी, का पाकिस्तान को आर्थिक और रणनीतिक रूप से समर्थन देना भी छिपा नहीं है।
भारत ने इन देशों की मदद से हुए हमलों को तो नाकामयाब किया ही, अब इनके दुष्प्रचार तंत्र पर भी निशाना लगाया है। हालांकि, यह कार्रवाई केवल डिजिटल दुष्प्रचार रोकने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसे भारत की आतंकवाद और उसे बढ़ावा देने वाले देशों के खिलाफ एक बहुस्तरीय रणनीति के हिस्से के रूप में देखा जाना चाहिए।
युद्ध विराम की घोषणा के बाद जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों की धर-पकड़ जारी है, जो दर्शाती है कि सुरक्षाबलों ने अपनी सतर्कता और सक्रियता को बढ़ाया ही है। यह भी कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई को किसी भी स्थिति में कमजोर नहीं होने देगा। सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड (एसडीएएल) द्वारा विकसित एंटी ड्रोन सिस्टम भार्गवास्त्र का सफल परीक्षण इस दिशा में एक मील का पत्थर है और अब भारत विरोधी प्रोपेगेंडा चलाने वाले देशों की आधिकारिक मीडिया के सोशल मीडिया अकाउंट पर प्रतिबंध से यही जाहिर होता है कि भारत द्वारा पाकिस्तान और आतंकवाद को नेस्तनाबूद करने के लिए समानांतर व्यूह रचना जारी है।
चूंकि सूचना के इस युग में प्रोपेगेंडा भी एक हथियार बन चुका है, ऐसे में, आतंकवाद के खिलाफ कोई भी लड़ाई इसका समाधान किए बगैर प्रभावी नहीं बन सकती। सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचनाओं के जाल को देखते हुए, सरकार के सांकेतिक कदम का महत्व है, जिसे आतंकवाद और दुष्प्रचार के खिलाफ देश की निर्णायक लड़ाई का हिस्सा माना जाना चाहिए।