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सियासत: पाकिस्तान में साजिशों का 'जहर', PM शहबाज की अग्निपरीक्षा; इमरान खान और शीर्ष जजों के आरोप बेहद गंभीर

मरिआना बाबर
Updated Fri, 05 Apr 2024 05:31 AM IST

सार

पाकिस्तान के विपक्षी नेताओं एवं सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के न्यायाधीशों द्वारा लगाए गए जहर देने और धमकाने के आरोपों से मुल्क में सनसनी फैल गई है। यह निश्चित रूप से प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की नई सरकार के लिए एक गंभीर मुद्दा है, जो टीटीपी के आतंकवादी हमलों और महंगाई से पहले ही जूझ रही है।
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पाकिस्तान का सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया


यह निश्चित रूप से प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की नई सरकार के लिए एक गंभीर मुद्दा है, जो अफगानिस्तान स्थित तहरीक-ए तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के लगातार आतंकवादी हमलों, आम पाकिस्तानियों की कमर तोड़ने वाली महंगाई और सबसे महत्वपूर्ण पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के नेता इमरान खान के निरंतर पलटवार से निपटने की कोशिश कर रही है। जेल में होने के बावजूद इमरान खान ने 2024 के चुनाव परिणामों को स्वीकारने से यह कहते हुए इन्कार कर दिया है कि पाकिस्तान चुनाव आयोग ने सुरक्षा प्रतिष्ठान के साथ मिलकर उनकी पार्टी के समर्थित उम्मीदवारों को मिले वोटों की संख्या में हेराफेरी की और उन्हें चुनाव जीतने से वंचित कर दिया।


जहर का आरोप इमरान खान की पत्नी बुशरा बेगम ने लगाया था, जो इस्लामाबाद के बाहरी इलाके बनिगाला में स्थित खान के महलनुमा घर में नजरबंद हैं। यह वही संपत्ति है, जिसे इमरान खान की पूर्व पत्नी जेमिमा खान ने खरीदकर इमरान खान को उपहार में दिया था। बनिगाला स्थित आवास को अदालत द्वारा उप-जेल घोषित कर दिया गया है, जहां बेगम बुशरा रहती हैं। इस बीच उनके पति इमरान खान पंजाब प्रांत के रावलपिंडी की अदियाला जेल में कैद हैं।


अपने एक मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में मीडिया से एक संक्षिप्त बातचीत के दौरान इमरान खान ने पत्रकारों को यह कहकर चौंका दिया कि बुशरा बेगम के खाने में टॉयलेट क्लीनर की तीन बूंदें मिला दी गई थीं, जिससे उनकी आंखों में तकलीफ हुई और पेट एवं छाती में दर्द महसूस हुआ। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने अदालत को भी इसके बारे में बताया और अदालत से मांग की कि उनकी पत्नी की पूरी तरह से स्वास्थ्य जांच उनके लाहौर स्थित कुलसुम अस्पताल के डॉक्टरों द्वारा करवाई जानी चाहिए, क्योंकि उन्हें अन्य किसी भी डॉक्टर पर भरोसा नहीं है, जिसे सरकार नामित करना चाहती हो।


उस समय बुशरा बेगम भी अदालत में मौजूद थीं, क्योंकि उन्हें अपने खिलाफ एक मामले में पेश होना था, लेकिन उन्होंने वहां मीडिया से बात करने से साफ इन्कार कर दिया और एक असामान्य अनुरोध किया कि वह वहां मौजूद एक व्लॉगर से बात करना चाहती हैं। लेकिन अदालत ने उन्हें इसकी इजाजत नहीं दी।


हालांकि, जब उनसे पूछा गया कि उन्हें कैसे पता चला कि उनके खाने में टॉयलेट क्लीनर की बूंदें मिलाई गई हैं, तो उन्होंने कहा कि यह सूचना देने वाले का नाम वह उजागर नहीं करेगी।


दूसरा मामला तो इससे भी ज्यादा खतरनाक है और यह वाकई अविश्वसनीय है, क्योंकि इससे पहले पाकिस्तान में ऐसा कभी नहीं हुआ था। इस्लामाबाद उच्च न्यायालय के छह न्यायाधीशों ने पाकिस्तान के प्रधान न्यायाधीश काजी फैज ईसा को पत्र लिखकर शिकायत की कि उन्हें खुफिया एजेंसी की ओर से लगातार धमकाया जा रहा है और वे इससे सुरक्षा चाहते हैं, ताकि बिना भय के अपना काम कर सकें।
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इसके बाद प्रधान न्यायाधीश को स्वतः कार्रवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ा और उन्होंने इन छह न्यायाधीशों के आरोपों की सुनवाई करने के लिए एक पीठ का गठन किया। उसके ठीक अगले दिन इस्लामाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एवं सात अन्य जजों को संदिग्ध एंथ्रेक्स-युक्त पत्र मिला, जो अब पुलिस के पास है। इन पत्रों में इन न्यायाधीशों को धमकी दी गई है। एक दिन बाद लाहौर उच्च न्यायालय के चार जजों को भी धमकी भरा पत्र मिला।


आखिर इसके पीछे कौन है? और क्या ये वाकई गंभीर धमकियां थीं या किसी ने शरारत की थी? जजों के पते पर भेजे गए पत्र के लिफाफे से पता चला कि उन्हें रेशम नाम की किसी महिला ने भेजा है, लेकिन पुलिस अब भी इन धमकी भरे पत्रों के असली स्रोत की जांच कर रही है। लेकिन तहरीक-ए नामूस-ए पाकिस्तान नामक एक अल्पज्ञात आतंकवादी गुट ने शीघ्र ही इस संबंध में एक बयान जारी किया। यह बयान सार्वजनिक रूप से जारी किया गया और सोशल मीडिया पर भी यह प्रसारित हो रहा है। इस बयान पर खोपड़ी का निशान बना हुआ है। बयान में तहरीक-ए-नामूस-ए पाकिस्तान ने इन पत्रों को भेजने की जिम्मेदारी ली है, जिनमें एंथ्रेक्स पाउडर भी था और पाकिस्तान की उच्चतम न्यायपालिका के प्रति स्पष्ट गुस्सा भी दर्शाया गया था। नामूस का मतलब सम्मान होता है, इसलिए यह सम्मान के लिए एक आंदोलन प्रतीत होता है।


जजों को भेजे गए पत्र में लिखा गया है-'अब और नहीं। हम आपको अपने मुल्क को और कमजोर नहीं करने देंगे। पाकिस्तान की अदालतों में बैठे आप लोग इस मुल्क की स्थापना के बाद से ही न्याय करने का दिखावा कर रहे हैं। पाकिस्तान का सुप्रीम कोर्ट मातृभूमि की समस्या और बीमारी का हिस्सा बन गया है।'


तहरीक-ए नामूस-ए पाकिस्तान नामक इस गुट की जब जांच की गई, तो नवीनतम रिपोर्टों के अनुसार पता चला कि यह एक नया आतंकवादी गुट है, जिसकी उत्पत्ति और उद्देश्य के बारे में कुछ पता नहीं है। पिछले वर्ष जब प्रधान न्यायाधीश काजी फैज ईसा ने पद की शपथ ली थी, तो वन्यजीव विभाग की टीम ने इस्लामाबाद के बाहरी इलाके मार्गल्ला हिल्स में रेड जोन स्थित संवेदनशील इमारतों से संबंधित मानचित्रों और विस्फोटकों का पता लगाया था। मार्गल्ला हिल्स पर मिले पत्रों  में मुल्क की न्यायपालिका और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को धमकी दी गई थी।


जहां तक इस्लामाबाद उच्च न्यायालय के छह न्यायाधीशों की बात है, जिन्होंने खुफिया एजेंसियों पर परेशान करने और धमकाने का गंभीर आरोप लगाया है, ज्यादातर लोगों का मानना है कि इन न्यायाधीशों ने अवैध कार्रवाई को चुनौती दी है, इसलिए लोकतंत्र एवं कानून के शासन के लिए लड़ने वाले लोगों को इनका समर्थन करना चाहिए।

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