बीते दिनों पाकिस्तान की इमरान सरकार ने पाक अधिकृत कश्मीर के एक हिस्से गिलगित-बाल्टिस्तान को अस्थायी प्रांत का दर्जा प्रदान किया था, जिस पर भारत ने तीखी प्रतिक्रिया जताई थी। कल पाकिस्तान ने अपने अवैध कब्जे को कानूनी जामा पहनाने के लिए वहां चुनाव कराया है, जिस पर कड़ा विरोध जताते हुए भारत ने कहा है कि पाकिस्तान को इस क्षेत्र में चुनाव कराने का कोई अधिकार नहीं है।
वास्तव में यह पाकिस्तान की एक नई चाल है असल में तहरीक-ए-इंसाफ के नेता इमरान खान जब विपक्ष में थे, तो उन्होंने एलान किया था कि अगर वह सत्ता में आएंगे, तो साल भर के भीतर पाकिस्तान का नक्शा बदल देंगे। लेकिन वास्तविकता यह है कि पिछले ढाई साल से इमरान प्रधानमंत्री के पद पर हैं, लेकिन मुल्क का नक्शा बदलना तो दूर, वहां के आर्थिक हालात बद से बदतर होते चले गए हैं।
इमरान सरकार रोज नई-नई मुश्किलों में फंसती जा रही है। एक तरफ वहां के ग्यारह विपक्षी दलों ने पीपल्स डेमोक्रेटिक मूवमेंट नामक संयुक्त मोर्चा खोल रखा है, तो दूसरी तरफ उसे आतंकवादियों को शरण देने व पड़ोसी देश भारत-अफगानिस्तान में हिंसक गतिविधियां कराने के लिए बदनामी झेलनी पड़ रही है। इन सबके चलते इमरान सरकार की नींद उड़ी हुई है और जनता का ध्यान बंटाने के लिए ही वह गिलगित-बाल्टिस्तान को अस्थायी प्रांत का दर्जा देने तथा वहां की विधानसभा के लिए चुनाव कराने का नाटक कर रही है। विपक्षी गठबंधन का आरोप है कि सेना ने 2018 के चुनाव में हेराफेरी और धांधली की, जिसके चलते इमरान खान की पार्टी सत्ता में आई।
इसलिए प्रदर्शनकारी पाक सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा को भी निशाना बना रहे हैं। इमरान खान व उनकी सरकार पर बदले की भावना से काम करने का आरोप भी लगाया जा रहा है। सत्ता में रहे कई विपक्षी नेताओं के पुराने भ्रष्टाचार के मामले खुलवाने और उन्हें सजा दिलवाने में वह जुटी हुई है। देश की चौपट हुई अर्थव्यवस्था, महंगाई, बेरोजगारी की तरफ उनका ध्यान नहीं जाता। पाकिस्तान की अर्थव्यवथा पूरी तरह लड़खड़ा गई है। अधिकांश देशों ने जैसे अमेरिका, सऊदी अरब ने कर्ज देना बंद कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय निगरानी संस्था एफएटीएफ ने हाल ही में बड़ा फैसला लेते हुए पाकिस्तान को फरवरी तक फिर से ग्रे सूची में रख दिया है, क्योंकि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सका।
उस पर काली सूची में डाले जाने का खतरा अब भी मंडरा रहा है। उधर पाकिस्तान के मंत्री फवाद चौधरी ने संसद में कबूल किया कि पुलवामा में हुआ आतंकी हमला प्रधानमंत्री इमरान खान ने करवाया था और यह उसकी सरकार की बड़ी कामयाबी है। अब जब संसद में सरकार के मंत्री ने पाक के झूठ की पोल खोल दी है, तो इसके बाद एफटीएफ को अब किसी सबूत की जरूरत नहीं रह जाती। पाकिस्तान में महंगाई चरम पर है। गरीब जनता को दो समय की रोटी नसीब नहीं हो रही है। बिजली, गैस, पेट्रोल समेत प्रतिदिन प्रयोग में आने वाली चीजों की कीमतों में भी बढ़ोतरी से जनता में हाहाकार है। सरकार इसकी जिम्मेदारी प्रांतीय सरकारों पर डाल रही है।
बड़ी आबादी भुखमरी के कगार पर खड़ी है और सरकार के पास इसका कोई हल भी नहीं। एक तरफ बेरोजगारी बढ़कर 6.4 प्रतिशत हो गई है, तो दूसरी तरफ महंगाई ने कमर तोड़ रखी है। इस बात की आशंका है कि इस चुनाव के बाद शीघ्र ही गिलगित-बाल्टिस्तान को स्थायी रूप से पाकिस्तान का एक प्रांत घोषित कर दिया जाएगा। भारत सरकार ने इस पर कड़ा एतराज जताया है। इसके अलावा उस क्षेत्र के निवासियों ने भी पाकिस्तान सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किए हैं और आक्रोश व्यक्त किया है। भारत सरकार को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की इस कार्रवाई का विरोध करना चाहिए और उसके नापाक इरादे पर अंकुश लगाने के लिए सख्त कदम उठाना चाहिए।