पाकिस्तान के लोग पूछ रहे हैं कि सरकार कहां है? ऐसा लगता है कि शासन में गतिरोध आ गया है, क्योंकि प्रधानमंत्री इमरान खान और उनके मंत्रिमंडल के दिमाग में खाली विपक्षी राजनीतिक पार्टियां हैं। ग्यारह विपक्षी दलों का नवगठित गठबंधन पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) लगातार मजबूत होता जा रहा है और पूरे मुल्क में लोकप्रिय होता जा रहा है, जिसने पाकिस्तान तहरीक-ए इंसाफ (पीटीआई) सरकार की नींद उड़ा दी है। यदि ढाई साल पहले सत्ता में आई सरकार के शासन और लोगों तक उसकी पहुंच का रिपोर्ट कार्ड तैयार किया जाए, तो सरकार के किसी भी विभाग में किसी को ज्यादा सफलता नहीं दिखेगी।
हर रोज एक नया घोटाला हो रहा है। विशेष रूप से अरब जगत के साथ विदेशी संबंध तनावपूर्ण हो रहे हैं। सऊदी अरब अपना कर्ज वापस मांग रहा है। संयुक्त अरब अमीरात ने पाकिस्तानियों के लिए सभी वीजा को रोक दिया है। अर्थव्यवस्था पहले से ही सुस्त है। इस्राइल को मान्यता देने का दबाव बना हुआ है और बाकी दुनिया के साथ कोविड-19 पाकिस्तान के लोगों के भी जीवन और जीविका के साथ खिलवाड़ कर रहा है। कुशासन के स्तर को इस उदाहरण से समझा जा सकता है कि इस हफ्ते विदेश मंत्री ने एक प्रेस कांफ्रेंस का आयोजन किया, लेकिन वह विदेश नीति के मुद्दे पर नहीं था, बल्कि लाहौर जलसे के बाद पीडीएम की आलोचना को लेकर था। सरकार के अन्य सभी प्रवक्ता पीटीआई का समर्थन करने में विफल रहे थे, इसलिए इमरान खान ने अपने मुखर विदेश मंत्री को उनका बचाव करने के लिए कहा।
ऐसे माहौल में एक महिला विपक्षी नेता संयुक्त विपक्ष की आवाज बनकर उभरी हैं। जिस तरह अतीत में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की बेनजीर भुट्टो सैन्य तानाशाहों के लिए परेशानी का सबब बनी थीं, उसी तरह इस बार इमरान खान के लिए पीएमएल (एन) की उपाध्यक्ष मरियम नवाज हैं। जांच आयोग की रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि ताजा घोटाला पेट्रोलियम संकट से संबंधित है। पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की बेटी मरियम नवाज कहती हैं कि हम जो पहले से जानते थे, तेल संकट की रिपोर्ट उसकी पुष्टि करती है। यह निर्वाचित सरकार की अक्षमता, गलत फैसले लेने और सबसे बढ़कर भ्रष्टाचार का प्रत्यक्ष परिणाम है। कुछ ही दिन पहले पीडीएम ने मीनार-ए पाकिस्तान में एक विशाल जलसे का आयोजन किया था, जहां न तो कड़कती सर्द रात और न ही कोविड-19 लोगों को इकट्ठा होने से रोक सका। उस कार्यक्रम के प्रमुख सितारे मरियम नवाज, पीपीपी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो थे। वहां लंदन से वीडियो लिंक के सहारे नवाज शरीफ का तल्ख लहजे में एक भाषण प्रसारित किया गया।
हालांकि सभी भाषणों को टीवी पर लाइव प्रसारित किया गया, लेकिन सेना की आलोचना वाले अंश को मौन कर दिया गया था। नवाज शरीफ के भाषण को टीवी पर प्रतिबंधित कर दिया गया था। लाहौर जलसे के बाद पीडीएम ने इमरान खान को 31 जनवरी तक इस्तीफा देने की चेतावनी दी है। अगर वह पद से नहीं हटे, तो पीडीएम ने धमकी दी है कि वे मुल्क के हर कोने से लांग मार्च करेंगे और इस्लामाबाद को घेर लेंगे। पर क्या वे सफल होंगे, क्योंकि नवाज शरीफ के खिलाफ इस्लामबाद में महीनों धरना देने के बाद इमरान खान सफल नहीं हुए थे, जबकि सेना भी उनका समर्थन कर रही थी।
राजनीतिक विश्लेषक जाहिद हुसैन कहते हैं कि सरकार विरोधी भावनाओं के उफान का कोई संकेत नहीं है, जो बड़ी संख्या में लोगों को सड़कों पर उतार सके। सरकार के लिए गंभीर खतरा पेश करने के लिए अब भी ताकतवर सेना का पूर्ण समर्थन आवश्यक है। दूसरा दृष्टिकोण यह है कि पीडीएम को आत्मविश्वास कहां से मिलता है और क्या सुरक्षा प्रतिष्ठान का कोई वर्ग ऐसा है, जो इसका समर्थन कर रहा है। पीडीएम ने नेशनल असेंबली, प्रांतीय विधानसभाओं और सीनेट से इस्तीफा देने की भी धमकी दी है। यह इमरान खान के लिए एक समस्या बन जाएगा, क्योंकि मार्च में सीनेट के चुनाव होने वाले हैं और अगर इतने सारे सांसद और सीनेटर इलेक्टोरल कॉलेज से इस्तीफा दे देते हैं, तो यह अधूरा होगा।
इमरान खान ने इसका जवाब देते हुए कहा कि वह पीडीएम के इस्तीफे का स्वागत करेंगे, क्योंकि वह तुरंत ही खाली सीटों पर उपचुनाव कराएंगे। इमरान खान के अहंकार ने, क्योंकि उन्होंने पीडीएम से बातचीत करने से इन्कार कर दिया, सबको चौंका दिया। कई लोगों का कहना है कि यह राष्ट्रीय संवाद का समय है, जिसमें सरकार और विपक्ष के अलावा न्यायपालिक, सिविल सोसायटी और सेना को भी शामिल किया जाना चाहिए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर कोई अपने सांविधानिक कर्तव्यों का पालन करे और अपनी सीमा-रेखा का उल्लंघन न करे। इस बीच, आश्चर्यजनक तरीके से बेनजीर भुट्टो और आसिफ अली जरदारी की सबसे छोटी बेटी आसिफा भुट्टो भी पीडीएम से जुड़ गईं, जिन्होंने हाल ही में मुल्तान में हुए जलसे से अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की। मुल्तान में आसिफा छाई रहीं। बेनजीर के बाद आसिफा भुट्टो परिवार की पहली महिला हैं, जिन्होंने राजनीति में प्रवेश किया है। जिन लोगों ने उन्हें देखा और सुना है, वे कहते हैं कि उनके हाव-भाव, और वक्तृत्व कला उनकी मां बेनजीर भुट्टो की तरह हैं।
पीपीपी के मुल्तान महिला इकाई की प्रमुख आबिदा बोखारी कहती हैं, 'ऐसा लगता है कि शहीद बेनजीर भुट्टो लौट आई हैं! अपने राजनीतिक जीवन में पहली बार आसिफा को सुनकर मैं दंग रह गई। अति उत्साही, भावुक, सशक्त उर्दू लहजे के साथ आसिफा अपनी मां की तरह एक राजनेता लगती हैं।' भाई बिलावल भुट्टो कोविड- 19 से बीमार थे, इसलिए उनकी जगह आसिफा मुल्तान में थीं। बड़ी बहन बख्तावर भुट्टो की हाल ही में सगाई हुई है और उन्हें राजनीति में दिलचस्पी नहीं है। आसिफ जरदारी असीफा भुट्टो को अपना गुप्त हथियार कहते हैं। कुछ लोगों ने आलोचना की कि महिला राजनेताओं को अपने परिवार के पुरुषों की जगह नहीं लेनी चाहिए, बल्कि उनकी योग्यता के आधार पर उन्हें राजनीति में भागीदारी की अनुमति मिलनी चाहिए। फिलहाल इंतजार करके यह देखना होगा कि आसिफा राजनीतिक क्षेत्र में अपना सफर कैसे जारी रखती हैं, कुछ लोग तो उन्हें बिलावल भुट्टो से ज्यादा बेहतर मानते हैं।