फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स

वायु प्रदूषण: पाकिस्तान भी पराली से परेशान, इसी बहाने भारत से संबंध बहाली का रास्ता देख रहे पड़ोसी हुक्मरान

मरिआना बाबर
Updated Sat, 16 Nov 2024 12:33 AM IST

सार

प्रदूषण की वजह से दोनों मुल्कों के पंजाब प्रांत परेशान हैं, जिसने नागरिकों के जीवन को खतरे में डाल दिया है। लाहौर और नई दिल्ली, दोनों इस बार बारी-बारी से दुनिया के सबसे प्रदूषित शहर बताए जा रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर।


मरियम नवाज ने भारत आने की इच्छा भी जाहिर की है और भगवंत मान को पाकिस्तान आने का न्योता दिया है। पाकिस्तानी पंजाब प्रांत के पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन सचिव राजा जहांगीर अनवर ने मीडिया को बताया, ‘हम मानते हैं कि ये मामले विदेश मंत्रालय के तहत आते हैं, जिसके लिए केंद्र सरकार और संबंधित हितधारकों की मंजूरी जरूरी है, लेकिन मौजूदा स्थिति गंभीर एवं अत्यावश्यक है। अगर यह मसला भारत एवं पाकिस्तान को अन्य मुल्कों के साथ एक साथ ला सकता है, तो इस मौके को क्यों गंवाया जाए?’

जब इन पंक्तियों की लेखिका ने इस्लामाबाद में विदेश मंत्रालय से पूछा कि क्या मरियम नवाज शरीफ ने मंत्रालय को इस आशय का पत्र भेजा है, जिसे कूटनीतिक मानदंडों के अनुसार नई दिल्ली स्थित भारतीय विदेश मंत्रालय को भेजा जाएगा, तो जवाब मिला कि ‘नहीं, पंजाब प्रांत की मुख्यमंत्री मरियम नवाज शरीफ से हमें अब तक ऐसा कोई भी पत्र नहीं मिला है।’


लगता है कि मरियम नवाज इस आशय का औपचारिक पत्र इसलिए नहीं भेज रही हैं, क्योंकि भारतीय पंजाब की तरफ से पाकिस्तानी प्रस्ताव पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। अगर मीडिया के जरिये कोई संकेत भी मिलता, जिसका इस्तेमाल आम तौर पर दोनों मुल्क एक-दूसरे को संदेश देने के लिए करते हैं, तो मरियम नवाज इस मामले में पहल करतीं। हाल ही में मैंने एक वीडियो देखा, जिसमें भगवंत सिंह मान हंसते हुए कह रहे थे कि लाहौर और नई दिल्ली, दोनों ही धुंध और प्रदूषण के लिए दोनों मुल्कों के पंजाब को दोषी ठहराते हैं। दरअसल, दोनों पंजाबों में पराली जलाना जारी है और यह हवा पर निर्भर करता है कि वह धुएं को किस दिशा में ले जाए। पीटीआई के पूर्व मंत्री चौधरी फवाद हुसैन ने टिप्पणी की, ‘दो बड़े शहर लाहौर और नई दिल्ली धुंध में डूब रहे हैं। ऐसे में, सहयोग महत्वपूर्ण है।’


पाकिस्तान के लोगों का मानना है कि अब इसकी जिम्मेदारी भारत पर है। अगर वह जलवायु परिवर्तन कूटनीति में शामिल होने से इन्कार करता है, तो दोनों पंजाबों में धरती और आकाश को धुंधला करने वाला यह धुंध अंततः नागरिकों के लिए जानलेवा साबित होगा, फिर यह एक और दरवाजा बंद हो जाएगा, जिस पर पाकिस्तान दस्तक दे रहा है।


इस बीच एक तरफ जहां ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एकदिवसीय किक्रेट मैच की सीरीज जीतने पर पाकिस्तान जश्न मना रहा था, वहीं दूसरी तरफ भारत से एक निराश करने वाली खबर आई। भारत ने आधिकारिक तौर पर चैंपियंस ट्रॉफी टूर्नामेंट के लिए पाकिस्तान आने से इन्कार कर दिया है। पाकिस्तान के लोगों के लिए क्रिकेट का मतलब सिर्फ भारत और पाकिस्तान की टीमों को मैदान में देखना है। बाकी टीमें टाइम पास हैं। मैंने जिस भी पाकिस्तानी से बात की, सबका कहना है कि अभी इंग्लैंड की टीम पाकिस्तान आई थी, जिसकी सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा गया। उसी तरह भारत और अन्य मुल्कों की टीमों को भी पूरी सुरक्षा दी जाएगी, इसलिए कोई चिंता की बात नहीं है। कई अन्य विदेशी टीमें भी यहां खेलने के लिए आईं। इस साल विभिन्न खेलों की कई टीमें खेलने के लिए पाकिस्तान आई थीं। अब इसी महीने भारतीय ब्लाइंड क्रिकेट टीम के आने का पाकिस्तान इंतजार कर रहा है।


क्रिकेट एक ऐसा खेल है, जो दोनों मुल्कों को जोड़ता है, ऐसे में क्रिकेट का राजनीतिकरण क्यों किया जा रहा है? पाकिस्तान ने भारत में खेलने से कभी संकोच नहीं किया, भले ही वहां दर्शकों ने उतनी गर्मजोशी से उसका स्वागत नहीं किया। विश्वास कीजिए, अगर भारतीय टीम पाकिस्तान खेलने आती है, तो पिछली बार की तरह इस बार भी उसका उत्साह बढ़ाया जाएगा। कई भारतीय खिलाड़ियों का पाकिस्तान में बहुत बड़ा फैन क्लब है, जहां प्रशंसकों को राजनीति से कोई मतलब नहीं होता, बल्कि उन्हें एक शानदार खेल से मतलब होता है।
विज्ञापन


वास्तव में पाकिस्तान सरकार ने भी भारत से संपर्क किया था और उनसे उनकी पसंद का स्थल भी पूछा था, जहां वे खेलना चाहेंगे, ताकि वे सहज महसूस कर सकें। भारत के इस फैसले पर इसलिए भी हैरानी हो रही है, क्योंकि हाल ही में भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर इस्लामाबाद आए थे और जाते समय उन्होंने ट्वीट कर पाकिस्तानी सरकार को उनके ‘शानदार मेजबानी’ के लिए धन्यवाद दिया था। उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री, उपप्रधानमंत्री और पाकिस्तान के लोगों को भी गर्मजोशी से स्वागत के लिए धन्यवाद दिया।


अगर भारत के इतने वरिष्ठ मंत्री यहां आकर खुश होकर घर लौट सकते हैं, तो भारतीय क्रिकेट टीम को यहां आने में क्या दिक्कत है? किसी भी बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन में राजनीतिक दखल ठीक नहीं है। लेकिन क्रिकेट बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि अब बहुत हो चुका और वे भारत की मांग के अनुसार, पाकिस्तान-भारत क्रिकेट मैच दुबई में नहीं कराएंगे।


इस मसले पर द न्यूज इंटरनेशनल ने अपने संपादकीय में लिखा, ‘क्रिकेट के मैदान पर भारत-पाकिस्तान के बीच स्वस्थ प्रतिद्वंद्विता जरूरी है, यानी खेल को राजनीति से अलग रखना चाहिए।’ यह वही समाचार पत्र समूह है, जिसने दोनों पड़ोसियों के बीच बेहतर संबंधों को बढ़ावा देने के लिए ‘अमन की आशा’ की स्थापना की थी।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next