पाकिस्तान में पाकिस्तान तहरीक-ए इंसाफ पार्टी की सरकार को सत्ता में आए लगभग 18 महीने हो गए हैं। लेकिन चुनाव के समय जनता से जो वादे किए गए थे, उनमें से एक भी पूरा नहीं किया गया है। इससे अवाम का सरकार व प्रधानमंत्री इमरान खान में भरोसा दिन-ब-दिन कम होता जा रहा है। पाक की अर्थव्यवस्था बद से बदतर हो गई है। महंगाई आसमान छू रही है। गरीबों को दो समय की रोटी भी नसीब नहीं हो रही। बेरोजगारी और बढ़ गई है। सत्ताधारी पार्टी ने अभी यह नहीं कहा कि उसकी सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग जीत ली है। वह कह रही है कि अभी चीजें ठीक करने में समय लगेगा।
पेरिस में अगले चंद दिनों में वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (एफएटीएफ) की बैठक होनी है। इससे पाक के खिलाफ तेवर सामने आ जाएंगे। अभी तक पाक एफएटीएफ की ग्रे सूची में है। अगर उसे काली सूची में डाल दिया गया, तो इसका पाक के आर्थिक सुधार कार्यक्रम पर विनाशकारी असर पड़ेगा। चीन के वित्तीय पोषण से पाक पर कर्ज बढ़ रहा है। जानकारों का कहना है कि पाक कर्ज चुकाने के लिए पाक अधिकृत कश्मीर का कुछ भाग चीन को देने की तैयारी कर रहा है, अगर ऐसा होता है, तो भारत इसका जबर्दस्त विरोध करेगा।
पाकिस्तान के चारों प्रांतों- सिंध, बलूचिस्तान, पंजाब व खैबर पख्तूनख्वा में इन दिनों आटे की सख्त किल्लत हो गई है। इसका मुख्य कारण है कि पाक सरकार ने उम्मीद से कम फसल होने के बावजूद गेहूं का अत्यधिक निर्यात किया। खराब प्रबंधन और सरकारी स्तर पर तालमेल की कमी ने भी कम आय वाले लोगों को संकट में डाल दिया है। पाक में महंगाई दर जनवरी 2019 में 7.3 प्रतिशत थी, जो दिसंबर, 2019 में 12.42 प्रतिशत हो गई। गेहूं का आयात करने के अलावा सरकार के पास हालात को काबू करने की कोई ठोस योजना नहीं है। इमरान खान ने सत्ता संभालने के पहले सौ दिन की जो योजना पेश की थी, उसमें बेरोजगारों को एक करोड़ नौकरियां एवं 50 लाख घर देने का एलान किया था। अभी तक इसमें कुछ भी नहीं हुआ है। गौरतलब है कि सरकार अपने महकमों में रोजगार सृजित करना तो दूर, अनेक महकमों को बंद करने का विचार कर रही है। उसने यह भी कहा कि हम रोजगार देने लगेंगे, तो अर्थव्यवस्था तबाह हो जाएगी। जाहिर है कि वादा करने से पहले इमरान खान को अंदाजा ही नहीं था कि वह क्या वादे कर रहे हैं।
पाकिस्तान की विदेश नीति भी लड़खड़ा रही है। दुनिया जानती है कि पाक की भारत, अफगानिस्तान, बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों से संबंध तनावपूर्ण बने हुए हैं। अनुच्छेद 370 हटाने के बाद भारत-पाक में तनाव बढ़ गया है। विरोधस्वरूप पाक ने भारत के साथ कूटनीतिक और व्यापारिक रिश्ते का स्तर भी कम कर दिया है। दरअसल आतंकवाद पर विश्व बिरादरी से पूरी तरह बेनकाब होने के बाद हताश और निराश इमरान दुनिया को बरगलाने में लगे हुए हैं। उधर सऊदी अरब ने पाक की कश्मीर पर इस्लामी सहयोग संगठन (ओआईसी) की बैठक बुलाने की कोशिश विफल कर दी है।
कहने का तात्पर्य यह कि इमरान खान सरकार घरेलू और विदेशी मोर्चे पर विफल साबित हुई है। इमरान खान को स्वीकार करना होगा कि देश के नेतृत्व की ताकत अवाम है। लेकिन वह अवाम को रोटी, कपड़ा, मकान का आसरा न देकर उनकी हर महीने की क्रयशक्ति को कम करते हुए नजर आए। अगर यही हालात रहे, तो इमरान खान शायद ही अपना कार्यकाल पूरा कर पाएं।