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पाकिस्तान : काली सूची का खतरा टला नहीं

के. एस. तोमर Published by: केएस तोमर Updated Mon, 19 Oct 2020 03:18 AM IST
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पाकिस्तान - फोटो : iStock

अपनी धरती से मनी लॉन्डरिंग-विरोधी अभियान को कमजोर करने और आतंकवाद के वित्तपोषण का मुकाबला करने को लेकर इमरान खान की सरकार की प्रतिबद्धता की कमी के बावजूद पाकिस्तान काली सूची में जाने और दुनिया के शीर्ष आतंकवाद-विरोधी निगरानी समूह फाइनेंशियल ऐक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) द्वारा अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध से किसी तरह से बच तो गया, पर आतंकवाद के वित्तपोषण पर पर्याप्त रूप से नकेल कसने में विफल रहने के लिए उसे सख्त फटकार सुनने को मिली। अगर वह आतंकी समूहों को समर्थन देने के अपने पुराने रवैये पर कायम रहता है, तो उसके सिर पर प्रतिबंध की तलवार लटक रही है, जो तीन महीने के बाद लगाया जा सकता है। आतंकी गतिविधियों पर निगरानी रखने वाली इस संस्था ने उत्तर कोरिया और ईरान पर पहले ही प्रतिबंध लगा दिया है।



एशिया-पैसेफिक ग्रुप (एपीजी) द्वारा हाल ही में जारी पाकिस्तान के म्यूचुअल इवैल्यूएशन पर पहली फॉलोअप रिपोर्ट में रेखांकित किया गया कि देश में एंटी-मनी लॉन्डरिंग एवं आतंकवाद की वित्तपोषण प्रणाली की प्रभावकारिता से संबंधित एफएटीएफ की चालीस सिफारिशों की प्रगति में काफी हद तक कोई बदलाव नहीं हुआ है। एपीजी की रिपोर्ट का कहना है कि आश्चर्यजनक रूप से पाकिस्तान एफएटीएफ की 40 सिफारिशों में से मात्र दो पर पूरी तरह से अमल कर सकता है और अगले तीन महीनों में जब समूह की बैठक होगी, तो उसे काली सूची में डाला जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान को आगामी फरवरी में भी काली सूची में डाला जा सकता है, जब एफएटीएफ की अगली बैठक होगी। पाकिस्तान को पिछले साल टास्क फोर्स की ग्रे सूची में रखा गया था, जिसने सरकार के लिए तब अंतरराष्ट्रीय बॉन्ड बाजार में पैसा जुटाना अधिक कठिन बना दिया। ऐसा तब है, जब पाकिस्तान का कर्ज संकट उसकी अर्थव्यवस्था पर भारी पड़ रहा है, और जो पहले से ही चीन के भारी कर्ज से दबा है। पाक अधिकारी अमेरिका को खुश करने के लिए आतंकी गतिविधियों पर अंकुश लगाने के बारे में झूठा दावा कर रहे हैं। 


विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान को प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाला प्रमुख कारक अमेरिका द्वारा अफगान तालिबान के साथ शांति समझौते तक पहुंचने का निरंतर प्रयास था। पाकिस्तान के सहयोग को उसके लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। चीन भी पाकिस्तान को अपने खेमे में लाने के लिए उसकी मदद में कूद पड़ा। हालांकि पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने उस आतंकी नेटवर्क पर नकेल कसी है, जो कभी उसकी सरजमीं से अपनी गतिविधियां चलाता था। वे दावा करते हैं कि मुजफ्फराबाद में आतंकी ठिकानों को, जो कभी आतंकवाद का प्रमुख केंद्र था और जहां के ऑफिसों का उपयोग धन जुटाने और रंगरूटों की भर्ती के लिए किया जाता था, बंद कर दिया गया है। पाक नौकरशाहों को भरोसा है कि सरकार द्वारा किए गए उपायों से उसकी ब्लैकलिस्टिंग को रोका जा सकेगा। पिछले दिनों चीन, तुर्की और मलयेशिया जैसे सहयोगियों ने एपीजी की बैठक के दौरान पाकिस्तान का समर्थन किया था।


वित्तीय मामलों में प्रधानमंत्री के सलाहकार अब्दुल हफीज शेख ने कसम खाई कि सरकार देश के लिए कार्यबल की कार्य-योजना पर बेहतर ढंग से अमल करेगी। उन्होंने कहा कि मनी लॉन्डरिंग पर अंकुश लगाना प्रधानमंत्री का एक बड़ा लक्ष्य है। सिर्फ इसलिए नहीं कि एफएटीएफ ऐसा करने के लिए कह रहा है, बल्कि वह देशहित में भी है। और इन प्रयासों से मुल्क जल्द ही ग्रे सूची से बाहर आ जाएगा। पाकिस्तान के अधिकारियों ने जमात-उद दावा के चार सरगनाओं को गिरफ्तार करने का दावा किया, लेकिन पता चलता है कि आतंकी सरगनाओं के खिलाफ पाकिस्तान की कार्रवाई मात्र सतही है और इसका उद्देश्य केवल पश्चिमी देशों को गुमराह करना है।


पाकिस्तान सरकार एफएटीएफ की कार्रवाई को रोकने और ग्रे सूची से बाहर आने के लिए अमेरिकी लॉबिंग कंपनी पर बार-बार भरोसा करती है। कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि ट्रंप प्रशासन को मनाने के लिए पाकिस्तान ने टेक्सास स्थित लिंडन स्ट्रेटजीज की सेवाएं ली हैं। इसके जरिये पाकिस्तान अमेरिका को  प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है, जो गंभीरता से आतंकी समूहों के खिलाफ कार्रवाई का दावा करता है, हालांकि वास्तविकता कुछ और है। पाकिस्तान को ग्रे सूची से अपना नाम हटाने के लिए 39 सदस्य देशों में से कम से कम 12 के समर्थन की आवश्यकता है और यह काफी हद तक अमेरिका और चीन के दृष्टिकोण पर निर्भर है। 


पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद के वित्तपोषण एवं मनी लॉन्डरिंग का मुकाबला करने के लिए की गई कार्रवाई से नाराजगी जाहिर करते हुए एफएटीएफ ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। हालांकि पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय का कहना है कि वह एफएटीएफ की कार्य-योजना को पूरी तरह से लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। खैर, एक वीडियो में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने के लिए लाखों डॉलर के एक नए उद्योग की खोज की, जो इंटरनेट पर मनोरंजन का साधन बन गया है। उस वीडियो में 2018 में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए इमरान खान को देखा जा सकता है, जो पॉल्ट्री फॉर्मिंग में एक अनूठे प्रयोग की चर्चा कर रहे हैं कि किस तरह से हजारों मुर्गी से उससे ज्यादा अंडे और उससे ज्यादा चूजे बेचे जा सकते हैं। दर्शक उनके इस सुझाव का मजाक उड़ा रहे हैं।


मौजूदा परिदृश्य में नेटिजन्स (इंटरनेट दर्शक) इमरान खान के महत्वाकांक्षी पॉल्ट्री फार्मिंग प्रयोग की तुलना परेश रावल उर्फ तेजा की फिल्म अंदाज अपना-अपना के उस दृश्य से करते हैं, जिसमें तेजा उर्फ श्याम गोपाल बजाज (परेश रावल) पॉल्ट्री फॉर्म खोलने की अपनी योजना के बारे में बात करता है। परेश रावल के लोकप्रिय डॉयलॉग-'ब्रेड का बादशाह और आमलेट का राजा-बजाज' की तर्ज पर नेटिजन्स इमरान खान को 'आमलेट का नया बादशाह' कह रहे हैं।

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