उस दिन मैं राष्ट्रपति भवन में मौजूद थी, जहां बेनजीर ने अपने समर्थकों से भरे विशाल कक्ष में शपथ ली थी। आगे की पंक्ति में उनके पति आसिफ अली जरदारी, जो बाद में राष्ट्रपति बने और उनकी मां नुसरत भुट्टो बैठी थीं। जैसे ही घबराई हुई-सी बेनजीर हरे रंग की कमीज, सलवार और पारंपरिक सफेद दुपट्टे में मुस्कराते हुए आईं, हॉल में सन्नाटा पसरा था। मैंने उनकी मां नुसरत भुट्टो की तरफ देखा, जिनकी आंखों से आंसू ढरक रहे थे। उन्होंने धीरे से कहा, 'अभी वह बहुत कम उम्र की है।'
बेनजीर ने अपने मंत्रिमंडल के गठन की कोशिश की, तो सुरक्षा प्रतिष्ठान ने सुनिश्चित किया कि वह अपनी पसंद का विदेशमंत्री नहीं चुन सकतीं। मैं उस शाम अमेरिकी दूतावास में एक स्वागत समारोह में थी, जहां हर कोई इसी के बारे में बात कर रहा था कि अगला विदेशमंत्री और वित्तमंत्री कौन बनेगा। इन दोनों मंत्रालयों के लिए सुरक्षा प्रतिष्ठान अपनी पसंद के व्यक्ति को चुनना चाहता था। एक वरिष्ठ अमेरिकी राजनयिक, जो घरेलू राजनीति में दिलचस्पी रखने के लिए जाने जाते थे, से बात करते हुए मैंने उनसे भावी विदेशमंत्री के बारे में पूछा।
उस अमेरिकी राजनयिक ने कहा, 'ओह! हमने तो सुना है कि साहिबजादा याकूब खान विदेश मंत्रालय संभालने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।' मैं उस समय लाहौर के एक अखबार द नेशन के लिए लिखती थी, मैं तुरंत एक्सक्लूजिव खबर लिखने के लिए अपने कार्यालय चली गई। तब खबर भेजने के लिए स्मार्टफोन नहीं था। वर्ष 1988 में पीछे मुड़कर देखने का कारण यह है कि आज 2022 में बेनजीर भुट्टो के बेटे बिलावल भुट्टो जरदारी ने पाकिस्तान के सबसे कम उम्र के विदेशमंत्री के रूप में शपथ ली।
उनके नाना जुल्फिकार अली भुट्टो भी राष्ट्रपति जनरल अयूब खान के शासन में पाकिस्तान के विदेशमंत्री थे। नए प्रधानमंत्री, शाहबाज शरीफ की पूरी कैबिनेट को सीनेट अध्यक्ष ने शपथ दिलाई थी, क्योंकि पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के कट्टर समर्थक राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने अस्वस्थ होने का बहाना बनाकर शाहबाज शरीफ और उनके मंत्रिमंडल को शपथ दिलाने से इनकार कर दिया था। संविधान के अनुसार, यदि किसी कारण से राष्ट्रपति अपने कर्तव्यों का पालन करने में सक्षम नहीं हैं, तो कार्यवाहक राष्ट्रपति, जो कि सीनेट के अध्यक्ष होते हैं, उनके कर्तव्यों का पालन करते हैं।
बिलावल भुट्टो मुस्लिम लीग (एन) के नेता नवाज शरीफ से बातचीत के लिए लंदन गए थे और वहां से लौटने के बाद शपथ ग्रहण के लिए इस्लामाबाद पहुंचे। वहीं इस हफ्ते कुछ रिपोर्टों में यह संकेत था कि नई सरकार ने संविधान का उल्लंघन करने के लिए मुल्क के तेरहवें राष्ट्रपति आरिफ अल्वी पर महाभियोग चलाने का फैसला किया है। अब यह महाभियोग का डर हो या कुछ और, बुधवार को राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने ही बिलावल भुट्टो को शपथ दिलाई।
आरिफ अल्वी पहले राष्ट्रपति हैं, जिनके खिलाफ सरकार गंभीरता से कह रही है कि उसके पास राष्ट्रपति के खिलाफ ठोस मामला है कि उन्होंने कम से कम दो मौकों पर संविधान का उल्लंघन किया, इसलिए उनके खिलाफ सरकार महाभियोग की कार्यवाही को आगे बढ़ाएगी। राष्ट्रपति को हटाने या महाभियोग लगाने से संबंधित संविधान के अनुच्छेद 47 में कहा गया है कि राष्ट्रपति को शारीरिक या मानसिक अक्षमता के आधार पर पद से हटाया जा सकता है या संविधान के उल्लंघन या घोर कदाचार के आरोप में उनके खिलाफ महाभियोग चलाया जा सकता है।
एक वकील का कहना है कि राष्ट्रपति आरिफ अल्वी का संविधान का उल्लंघन करने का एक ट्रैक रिकॉर्ड है, इसलिए हम महाभियोग लगाएंगे। इमरान खान की सरकार के दौरान पिछले तीन साल से लगातार संसद को दरकिनार किया गया और राष्ट्रपति को अध्यादेश जारी करने के लिए कहा गया, जो आरिफ अल्वी ने खुशी-खुशीकिया। कानून को सदन के पटल पर बहस के लिए नहीं लाया गया, क्योंकि डर था कि विपक्ष के कारण वह पारित नहीं हो पाएगा। एक के बाद एक अध्यादेश लाए गए।
लेकिन सबसे गंभीर गलती, जो आरिफ अल्वी ने की और अब इमरान खान भी कहते हैं कि यह उनके द्वारा की गई एक बड़ी गलती थी कि सर्वोच्च न्यायालय के एक सम्मानित और मौजूदा न्यायाधीश, न्यायमूर्ति फैज ईसा के खिलाफ राष्ट्रपति के संदर्भ का सहारा लिया गया था। जब भी सरकार कानूनी मुद्दों या जनहित के मामलों के बारे में संदेह में होती है, तो वह 'राष्ट्रपति के संदर्भ' का सहारा लेती है। ऐसे में, मामला सर्वोच्च न्यायालय को भेजा जाता है, जो इस पर विचार करके राष्ट्रपति को अपनी राय देता है।
न्यायाधीश मुखर हैं और सुरक्षा प्रतिष्ठान के बारे में सोच-समझकर बोलते हैं। इस राष्ट्रपति के संदर्भ को भी महाभियोग नोटिस में जोड़ा जा सकता है। पहले पाकिस्तान के संविधान में अनुच्छेद 58-2 बी था, जो राष्ट्रपति को मौजूदा सरकार को हटाने की शक्ति देता था। यह कानून सैन्य तानाशाह जनरल जिया उल हक द्वारा लाया गया था। लेकिन राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के एक साहसिक कदम ने संसद को इसे हटाने के लिए प्रेरित किया और इस प्रकार भविष्य के राष्ट्रपति दंतहीन बन गए।
यदि राष्ट्रपति आरिफ अल्वी को हटाया जाता है तो इस शीर्ष पद का दावेदार कौन हो सकता है? कई रिपोर्टों से पता चलता है कि पीपीपी नेता आसिफ अली जरदारी दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के लिए उत्सुक हैं। लेकिन शहबाज शरीफ की एकता सरकार मौलाना फजलुर रहमान की पार्टी जेयूआईएफ के समर्थन के बिना ऐसा नहीं कर सकती है। मौलाना ने स्पष्ट कह दिया है कि वह पाकिस्तान का अगला राष्ट्रपति बनना चाहते हैं। पाकिस्तान की सियासत में आगे क्या होगा, यह समय ही बताएगा।