विदेश सचिव स्तर की बातचीत रद्द होने के बाद से ही पाकिस्तान गोलीबारी कर हमें उकसा रहा है। संघर्षविराम का लगातार उल्लंघन करते हुए पाक सेना अब जिस भीषण तरीके से गोलीबारी कर रही है, उसके पीछे ज्यादा से ज्यादा आतंकियों को धकेलने की कोशिश है। पाकिस्तान ने कठुआ से लेकर पुंछ तक की 150 किलोमीटर सीमा पर भारी गोलीबारी की है। इस कारण कुछ मौतें हुईं और कई गांवों को खाली कराया गया है।
दरअसल कश्मीर घाटी में सुरक्षा बलों की चौकसी एवं सघन अभियान के कारण कश्मीर में आतंकियों की संख्या घटकर अब केवल दो सौ रह गई है। आतंकियों की यह संख्या घाटी में सुरक्षा बलों को चुनौती देने के लिए अपर्याप्त है। इसी कारण भीषण बाढ़ तथा बर्बादी के समय सेना पूरे जम्मू-कश्मीर में श्रीनगर से लेकर कठुआ तक जनता को तबाही से बचाकर उनके खाने-पीने एवं चिकित्सा की पूरी व्यवस्था सुचारु ढंग से कर पाई। इससे जनता का रवैया सेना के प्रति बदलने लगा है। लेकिन यह पाकिस्तानी सेना, आईएसआई एवं आतंकी सरगना हाफिज सईद को रास नहीं आ रहा। कश्मीर में अपने खूनी इरादों को बल प्रदान करने के लिए गोलीबारी की आड़ में भारी संख्या में आतंकियों को घुसाने का विफल प्रयास किया जा रहा है।
इस गोलीबारी के पीछे पाक सेना के तीन उद्देश्य हैं। पहला, कुछ दिन पहले इमरान खान एवं ताहिर उल कादिरी के धरने-प्रदर्शन की आड़ में सेना ने शरीफ सरकार को पूर्ण विफल दिखाने का प्रयास किया। पर अमेरिका की बेरुखी के कारण सेना एवं इमरान खान अपने प्रयासों में सफल नहीं हो पाए। पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र में भी कश्मीर का मामला उठाकर जनमत संग्रह की मांग की है। लेकिन संयुक्त राष्ट्र ने यह मसला आपस में सुलझाने को कहकर पाकिस्तान की दाल नहीं गलने दी। अमेरिका में नरेंद्र मोदी के जोरदार स्वागत एवं उनकी बढ़ती लोकप्रियता से भी पाक सेना घबरा गई है।
जनमत संग्रह की मांग पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए की थी। यदि राज्य की जनता चुनाव में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती है, तो विश्व बिरादरी के सामने फिर साफ हो जाएगा कि वहां की जनता भारतीय लोकतंत्र में विश्वास करती है। लोकसभा चुनाव में वहां भारी मतदान हुआ था। ऐसे में, अब वहां भय का वातावरण बनाकर और विधानसभा चुनाव में कम मतदान कराकर आतंकवादी दुनिया को गलत संदेश देना चाहते हैं। पाकिस्तान का तीसरा उद्देश्य घाटी में सेना की बढ़ती लोकप्रियता को खत्म करना है। इसी कारण बाढ़ के समय अलगाववादियों ने सेना के राहत दस्तों पर पथराव कर लोगों को मदद लेने से मना किया। पर सेना ने वहां की जनता का दिल जीत लिया है। इन्हीं कारणों से अब पाकिस्तान व उसकी सेना करो या मरो की स्थिति में आ गई है।
परंतु भारत में इस समय एक मजबूत सरकार है और सेना में नया जोश है। मोदी सरकार ने साफ कह दिया है कि अब कोई फ्लैग मीटिंग की प्रार्थना नहीं होगी। उम्मीद करनी चाहिए कि केंद्र सरकार पाकिस्तान की चालों को सफल नहीं होने देगी।