फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स

फार्मा सेक्टर में भारत के लिए हैं कितने अवसर, बता रहे हैं जयंतीलाल भंडारी

जयंतीलाल भंडारी Published by: जयंतीलाल भंडारी Updated Fri, 16 Oct 2020 04:34 AM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
पीपीई किट - फोटो : amar ujala

इस समय कोविड-19 की चुनौतियों के बीच देश की अर्थव्यवस्था को गतिशील करने और देश के लिए विदेशी मुद्रा की कमाई करने में फार्मा सेक्टर अहम भूमिका निभाते हुए दिखाई दे रहा है। हाल ही में आठ अक्तूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कनाडा इंडिया इन्वेस्ट सम्मेलन में कहा कि कोरोना के दौर में भारत ने दुनिया के करीब 150 देशों में कई दवाइयों का निर्यात करके फार्मेसी के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है। भारतीय फार्मा उद्योग मात्रा के आधार पर दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा बाजार है। विकासशील देशों के लिए दवाओं की लागत कम करने में भारत ने अग्रणी भूमिका निभाई है। भारत विश्व को सबसे अधिक जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराने वाला देश है। भारत अकेला ऐसा देश है, जिसके पास अमेरिकी दवा नियामक यूएसएफडीए के मानकों के अनुरूप अमेरिका से बाहर सबसे अधिक संख्या में दवा बनाने के संयंत्र हैं।



पिछले कुछ वर्षों में भारत शोध एवं नवाचार विकास (आरऐंडडी) के क्षेत्र में जैसे-जैसे आगे बढ़ा है, वैसे-वैसे भारत का फार्मा सेक्टर भी तेजी से आगे बढ़ा है। विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (डब्ल्यूआईपीओ) द्वारा जारी वैश्विक नवाचार सूचकांक (ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स-जीआईआई) 2020 में भारत चार पायदान ऊपर चढ़कर 48वें स्थान पर पहुंच गया है। भारत पिछले वर्ष 2019 में इस इंडेक्स में 52वें पायदान पर था और 2015 में 81 वें स्थान पर था। कोविड-19 की चुनौतियों के बीच नवाचार में सुधार के परिदृश्य से भारत का फार्मा सेक्टर लाभान्वित होता हुआ दिखाई दे रहा है।


वर्तमान समय में भारत के फार्मा उद्योग का आकार 40 अरब डॉलर से अधिक का है। केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री डी. वी. सदानंद गौड़ा के मुताबिक, भारत का फार्मा उद्योग 2024 तक 65 अरब डॉलर और 2030 तक 120 अरब डॉलर की ऊंचाई तक पहुंचने की संभावना रखता है। यह कोई छोटी बात नहीं है कि भारत कोरोना-काल में फार्मा और मेडिकल सेक्टर की कई वस्तुओं का बड़ा उत्पादक और नया निर्यातक देश बन गया है। भारत दुनिया में पीपीई किट का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक बन गया है, जिसकी दैनिक उत्पादन क्षमता प्रतिदिन पांच लाख से अधिक है। इसी तरह देश में बहुत कम समय में वेंटिलेटर की स्वदेशी उत्पादन क्षमता बढ़कर तीन लाख प्रति वर्ष हो गई है।


देश ने एन-95 मास्क के उत्पादन में भी आत्मनिर्भरता हासिल की है। भारत सर्जिकल मास्क, मेडिकल गॉगल्स और पीपीई किट का बड़े पैमाने पर निर्यात भी कर रहा है। स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि कोविड-19 के दौर में चिकित्सकीय शोध और टीका बनाने में भी भारत की भूमिका अहम हो गई है। भारत में करीब 30 समूह कोरोना वायरस के खिलाफ टीका विकसित करने की कोशिश में लगे हैं। दुनिया में टीका बनाने के लिए ख्याति प्राप्त पुणे की सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई), भारत बायोटेक, जाइड्स कैडिला जैसी औषधि कंपनियां वैक्सीन के क्लीनिकल ट्रायल कर रही हैं। सरकार का मानना है कि जनवरी 2021 तक देश में एक से ज्यादा कंपनियों की वैक्सीन उपलब्ध होगी और जुलाई 2021 तक देश के 20-25 करोड़ लोगों को टीके लग चुके होंगे। 


यहां यह भी उल्लेखनीय है कि कोरोना वायरस महामारी के कारण चीन के प्रति नाराजगी से चीन में कार्यरत कई वैश्विक दवाई मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां अपना काम चीन से बाहर स्थानांतरित करते हुए दिखाई दे रही हैं। ऐसी कुछ वैश्विक दवाई मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों को प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेटिव स्कीम जैसी कई योजनाओं के तहत भारत की ओर आकर्षित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। चूंकि भारत अपने फार्मा सेक्टर में कच्चे माल के रूप में उपयोग में आने वाले एक्टिव फार्मास्यूटिकल इन्ग्रीडियेंट (एपीआई) का करीब 80-90 फीसदी चीन से आयात करता है। इसलिए अब सरकार आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत एपीआई के घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए तेजी से आगे बढ़ी है। निस्संदेह कोविड-19 की आपदाओं के बीच भारत के लिए फार्मा सेक्टर में वैश्विक ऊंचाई पर पहुंचने का अवसर निर्मित हुआ है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next