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प्रेम की ऑनलाइन खोजबीन

Sun, 06 Sep 2015 04:32 PM IST
मनीषा सिंह
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दुनिया में प्रेम को नए ठिकाने मिल चुके हैं। फेसबुक, इंस्टाग्राम और ऑनलाइन डेटिंग की वेबसाइटों के जरिये युवा बड़ी संख्या में इंटरनेट पर प्रेम की तलाश करते हैं। बेवफाई का भी एक मंच इस आभासी दुनिया में है, जिसका थोड़ा-बहुत अंदाजा हाल में एक वेबसाइट की हैकिंग से हुआ है। ‘छोटी सी इस जिंदगी में क्यों न एक अफेयर कर लें’ यह नारा देने वाली वेबसाइट ऐश्ले मैडिसन को विगत 18 अगस्त को हैक कर इसके 3.7 करोड़ उपभोगकर्ताओं की निजी जानकारी दुनिया के सामने खोलकर रखी गई, तो पता चला कि उनमें से 1,21,900 लोग भारत के हैं। दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, कोलकाता,पुणे, बंगलूरू आदि शहरों के लोगों ने इस वेबसाइट पर खुद को रजिस्टर करवाकर यह आमंत्रण स्वीकार किया था।
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अगर कोई आदमी अपनी शादी के अलावा कहीं और जरा-सी ताक-झांक कर लेता है, तो इसे बेवफाई कहना थोड़ी ज्यादती तो है। पर अक्सर बेवफाई और फिर शादियों में तड़कन की शुरुआत ऐसी ही कोशिशों से होती है। फिर परिवार और समाज के कुछ कायदे भी हैं। शायद यही वजह है कि यह जरा-सी ताकझांक ही अक्सर जमी-जमाई शादियों में खटास पैदा करती है। जिन शहरों के बारे में खुलासे हुए हैं, वहां तलाक लेने-देने की दर इधर तेजी से बढ़ी है।

गांवों-कस्बों में तो आज भी प्रेम और शादी जाति-गोत्र के बाहर गुनाह है। लिहाजा वहां शादी के बेहद सीमित विकल्पों में यदि थोड़ा पढ़ा-लिखा, कमाई-धमाई के मामले में स्वावलंबी और दिखने में ठीक-ठाक विकल्प मिल जाए, तो जीवन धन्य मानकर शादी को ताउम्र निभाने का चलन है, भले शादी के चंद वर्षों बाद रिश्ते में पड़ी गांठें टीस बनकर रिसने ही क्यों न लगें। शहरों में लड़के-लड़कियां अपना विकल्प चुनने को कुछ तो आजाद हैं ही, इसके बावजूद शहरी समाज में तलाक की बढ़ती दर बताती है कि वहां सब कुछ ठीक नहीं है। युवा पीढ़ी परिवार के दबाव में सात फेरे तो ले लेती है, लेकिन शादी के बाद उसे अपनी गलती पर पछतावा होने लगता है। ऐसे पछतावे भी अक्सर लोगों को उन प्रलोभनों की तरफ ले जाते हैं, जो एश्ले मैडिसन जैसी वेबसाइटें सुझाती हैं।
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लगातार बढ़ती प्रेम की ऑनलाइन खोजबीन में फरेब की आशंकाएं भी बढ़ती जा रही हैं। एक अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन डेटिंग मैगजीन के अनुसार, अमेरिका में 20 फीसदी युवा ऐसे लोगों के साथ डेट पर बाहर जाते हैं, जिनसे वे पहली बार ऑनलाइन ही मिले होते हैं। अमेरिका में ऑनलाइन जान-पहचान करने वालों में से औसतन सालाना 2 लाख 80 हजार युवा शादी कर रहे हैं। दोस्ती और डेटिंग के लिए भी युवक-युवतियां इंटरनेट का सहारा ले रही हैं। लेकिन दोस्ती से लेकर शादी तक के ऑनलाइन तामझाम में थोड़े-बहुत झूठ की आशंक से विशेषज्ञ भी इनकार नहीं करते। ऐश्ले मैडिसन जैसी वेबसाइटों और इसी किस्म के अनेक गोपन तरीकों से बेवफाई की गलियों में पहुंचने वालों की लगातार बढ़ती तादाद रिश्तों में ऐसी ही कठिनाइयां पैदा कर रही हैं।

ऐश्ले मैडिसन का यह नया किस्सा हमें उन संकेतों की तरफ ले जा रहा है, जो बताते हैं कि भारत के पारिवारिक-दांपत्य जीवन में भी अब पश्चिमी समाजों की जीवन शैलियों का घुन लग गया है। कैसी विडंबना है कि इस जीवन शैली ने पहले हमारे संयुक्त परिवारों को तोड़कर एकल परिवारों में बांटा और अब एकल परिवार भी टूट के कगार पर हैं। समाजशास्त्रियों को ही नहीं, आम लोगों को भी यह सोचना होगा कि शादीशुदा जिंदगी के ये असंतोष और बेहतर पाने-खोजने की लालसा ऐसे अंतहीन दुष्परिणामों की तरफ लोगों को न ले जाएं, जहां शुरुआती फरेब के बाद सिर्फ हताशा है।
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