जब पिछली यूपीए सरकार ने मल्टी ब्रांड रिटेल में शत प्रतिशत अनुमति देने की बात कही थी, तो उसके घटक दलों में भी गंभीर मतभेद पैदा हो गए थे, क्योंकि इससे लाखों छोटे कारोबारियों की रोजी-रोटी छिन जाने की आशंका थी। पर विगत छह अक्तूबर को जो हुआ, उसने पूरे देश को हैरान कर दिया। उस दिन भारतीय ऑनलाइन रिटेल कंपनी फ्लिपकार्ट ने महज 10 घंटे में 600 करोड़ रुपये का सामान बेच दिया। इनमें मोबाइल फोन से लेकर तमाम इलेक्ट्रॉनिक सामान, कपड़े, कॉस्मेटिक, जूते वगैरह थे। कंपनी ने जिस पैमाने पर डिस्काउंट की घोषणा की थी, उतनी तो हाल के वर्षों में कभी सुनाई भी नहीं पड़ी थी।
अब तक देश में ऑनलाइन रिटेल इंडस्ट्री की क्षमता का आकलन नहीं किया गया था। लेकिन इस घटना ने अनायास ही ऐसा करवा दिया। देश में एक साल पहले कदम रखने वाली अमेरिकी ऑनलाइन रिटेल कंपनी अमेजन ने एक अरब डॉलर (6,000 करोड़ रुपये) की बिक्री की। इस साल उसका इरादा इसे दोगुना करने का है। उसके सीईओ जेफ बेजोस ने भारतीय बाजार से काफी उम्मीदें लगाई हैं। अब यह कंपनी रोजमर्रा के सामान और खाद्य पदार्थ भी बेचने की योजना बना रही है। भारतीय कंपनी स्नैपडील ने भी कई तरह के उत्पाद भारी छूट पर बेचे हैं। ऐसे ग्राहक, जिन्हें घर से निकले बगैर सामान चाहिए, ऐसी शॉपिंग में दिलचस्पी ले रहे हैं।
देश में क्रेडिट कार्ड का चलन बढ़ा है और क्रेडिट कार्ड व ऑनलाइन शॉपिंग में गहरा रिश्ता है। लेकिन ज्यादा ऑनलाइन रिटेलर सामान मिलने पर भुगतान की नीति पर काम कर रहे हैं। इस जाल में फंसकर ग्राहक कई बार अच्छी शॉपिंग कर लेते हैं। ऑनलाइन रिटेलर ज्यादा विकल्प देते हैं। ग्राहकों को कहीं जाना नहीं पड़ता, सामान खुद उसके पास आता है। भारत में ऑनलाइन रिटेल कारोबार अभी कुल रिटेल का एक प्रतिशत ही है।
इसके जरिये पिछले साल कुल 3.1 अरब डॉलर की खरीद-बिक्री हुई, पर अंदाजा है कि पांच वर्षों में देश में इसके जरिये 22 अरब डॉलर का कुल कारोबार होगा। भारत में अभी महज 20 प्रतिशत लोगों के पास इंटरनेट है और उनमें से भी 20 प्रतिशत ही ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं। पर जैसे-जैसे कंप्यूटर साक्षरता में वृद्धि होगी, यह कारोबार फैलता चला जाएगा। छूट ही इन ऑनलाइन रिटेलरों का असली हथियार है, जिससे लाखों दुकानदारों के लिए चुनौती खड़ी हो गई है।
इतना छूट ये कैसे दे पाती हैं? बड़े पैमाने पर बिक्री करने से शायद वे कम मार्जिन पर भी काम चला लेती हैं। सीधे उत्पादकों से बात कर उनका सामान बेचती हैं, जिससे कीमत बाजार की तुलना में काफी कम हो जाती है। कई बार वे लागत मूल्य से भी कम में सामान बेचती हैं। लेकिन अब छोटे दुकानदार इसके खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।
सरकार भी इस मामले में उलझ गई है। अभी तक ऑनलाइन रिटेलरों ने कोई कानून नहीं तोड़ा है, तो उन पर कार्रवाई क्यों और कैसे होगी? वाणिज्य मंत्री निर्मला सीतारमन ने कहा है कि वह इस मामले को देखेंगी, पर एक नए बिजनेस मॉडल का अनुकरण करके इन कंपनियों ने बाजार को नई दिशा ही दी है। इससे रोजगार की संभावनाएं पैदा हो रही हैं।