फुर्सत के क्षणों में एक छुटभैये नेता ने दूसरे से कहा, यार मेरी तमन्ना है कि पार्टी मुझे भी किसी स्टडी टूर पर भेज दे, ताकि मैं भी पार्टी के खर्च पर विदेश यात्रा का लुत्फ उठा सकूं। दूसरा बोला, जब स्टडी की उम्र थी, तब तो क्लास बंक करते रहे, अब इस उम्र में क्या खाक स्टडी करेंगे!
पहला बोला, केंद्र और राज्य सरकारों के जो मंत्री सरकारी खर्च पर विदेश में स्टडी टूर पर जाते हैं, वे सब हमारी तरह उम्रदराज ही तो होते हैं। वैसे भी स्टडी की कोई उम्र नहीं होती। दूसरा बोला, हम और आप एमएलए भी नहीं हैं, पार्टी विदेश यात्रा पर हमें भेजे भी तो कैसे!
इस वार्तालाप के चौथे दिन ही दोनों को एक ‘मेल’ मिला, जिसमें लिखा था-तुरंत दिल्ली आ जाएं, आपको स्टडी टूर पर भेजा जाना है। ‘मेल’ पढ़कर दोनों छुटभैये नेताओं की बांछें खिल गईं! दोनों ने अपने-अपने पासपोर्ट संभाल कर रख लिए। परिजनों ने उन्हें विदेश से खरीदी जाने वाली वस्तुओं की सूची थमा दी।
पार्टी मुख्यालय में उनका गर्मजोशी से स्वागत हुआ! दोनों गद्गद थे, चलो पार्टी ने उनके लिए कुछ सोचा तो। जिंदगी भर पार्टी के लिए फंड जोड़ते रहे, आज उस फंड के कुछ हिस्से को ठिकाने लगाने का समय आ गया! पार्टी दफ्तर से दोनों को एक-एक गाड़ी मिल गई। उन्होंने विनम्रता से कहा, सर, हम दोनों एक ही गाड़ी से एयरपोर्ट चले जाएंगे, दो की क्या जरूरत है? पार्टी महासचिव ने कहा, आप दोनों पार्टी के वीआईपी सदस्य हैं, आप अलग-अलग गाड़ियों में ही जाएं।
दोनों वीजा को लेकर चिंतित थे। उन्हें पूरी उम्मीद थी कि पार्टी ने सारे इंतजाम कर लिए होंगे। पार्टी अध्यक्ष ने दोनों को बुलाकर कहा, बधाई हो, आप एक माह के स्टडी टूर पर जा रहे हैं! पार्टी रोज शाम को आपसे रिपोर्ट मांगेगी। इसके अलावा, आप दोनों मुझे मेल करके भी ब्रीफ करेंगे।
दोनों को एक-एक लिफाफा थमाया गया। लिफाफा खोला, तो दोनों के होश उड़ गए! उन्हें दिल्ली की विभिन्न बस्तियों में स्टडी टूर पर भेजा गया था। उन्हें लोकसभा चुनाव के लिए एक नई पार्टी की तरह, जन-समस्याओं का अध्ययन करना था, ताकि उनकी पुरानी पार्टी घोषणा-पत्र तैयार कर सके। एक माह तक उन्हें दिल्ली में रुकना था। इस आशय का पत्र लिफाफे में संलग्न था।
दिल्ली की बस्तियों की स्टडी करते हुए एक ने दूसरे नेता से फोन पर पूछा, भैया, वहां नीदरलैंड में आपको मौसम कैसा लग रहा है, तो दूसरे ने कहा, जैसा आप ब्रिटेन में महसूस कर रहे हैं।