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ओ मांझी रे

Wed, 17 Jun 2015 07:50 PM IST
तमाशा
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साधो, सिर के ऊपर बरसाती बादल मंडराने लगे हैं। बिहार के सूखे खेत को खेवनहार मिल गया है। छोटे मोदी का दिल उछलायमान होकर ओ मांझी रे गाने को मचल रहा है। मगर मन शंकित है कि भवसागर पार करने के लिए गाय की पूंछ कोई और न थाम ले। पासवान भी टकटकी बांधे हैं। सच्ची जानो बिहारी शत्रु बड़े दिलेर होते हैं। वे दलीय दीवारों को तोड़कर लालू को जन्मदिन की बधाई दे रहे हैं। लालू भी गदगद हैं। इन दिनों वैसे भी वह खुद को नीलकंठ शंकर बता रहे हैं, जिन्होंने गरल पिया था। सांप्रदायिकता से लड़ने के लिए जहर पीना गुनाह है क्या!
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खबर है कि एक अणे मार्ग के आम पक गए हैं। देखो, किसकी झोली में टपकें! चचा गालिब जिंदा होते, तो ताक-झांक कर इन पर लिखे अपने नाम के हरूफ पढ़ते। वहां की लीचियां पासवान को भी कम नहीं ललचा रहीं, पर होगा वही, जो मंजूरे शाह होगा। अयोध्या का मंदिर बनाने की जिम्मेदारी सरकार की नहीं। रामजी जब चाहेंगे, तब बन जाएगा। सिंघल ने बहुत सोच-समझकर गेंद भगवान के पाले में डाल दी है।

उधर मुशर्रफ ने कह दिया कि उन्होंने परमाणु बम शबे-बरात पर फोड़ने के लिए नहीं बनाया है। दरअसल, हम इस पूर्व तानाशाह को भूल ही गए थे। इधर-उधर करके ही वह अपनी उपयोगिता साबित कर रहे हैं। वैसे कैसी विडंबना है कि लाठीधारी स्वयंसेवकों के मुखिया भी अब सुरक्षा के घेरे में चलने लगे हैं। उन पर सवाल उठाना गुनाह की जद में आता है।
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आजकल हर कोई अपने घरों को नकली फूलों से सजा रहा है। मेरी पुरानी अलमारी में रखी असली डिग्रियां भी गंधा कर फर्जी लगने लगी हैं। ऐसे में तोमर पर इसकी तोहमत क्यों? किसे याद रहता है कि पहली कक्षा में कहां पढ़े और किसने पढ़ाया था? तोमर पर टमाटर और अंडे फेंकने वाले पूंजीवादी किस्म के लोग हैं। उन पर महंगाई का असर होता, तो वे ऐसी हरकत नहीं करते। खबर है कि आप के एक नेता ने अपनी पत्नी पर कुत्ते दौड़ा दिए। आदमी इस जानवर को पालता ही इसलिए है कि वह जरूरत पर काम आए और सनद रहे।
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