इन दिनों प्रकाशित हो रही विदेशी निवेश संबंधी अध्ययन रिपोर्टें बता रही हैं कि प्रवासी भारतीय देश में विदेशी निवेश का प्रवाह बढ़ा रहे हैं। विश्व बैंक की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, विदेशों में धन कमाकर अपने देश में धन भेजने वालों में प्रवासी भारतीय पहले क्रम पर हैं। एसोचैम की अध्ययन रिपोर्ट में भी बताया गया है कि चालू वित्त वर्ष 2014-15 में देश में विदेशी निवेश का आंकड़ा 85 अरब डॉलर संभावित है। पहली बार भारत आने वाले विदेशी संस्थागत निवेश और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के प्रवाह में 500 फीसदी से भी अधिक की वृद्धि दिख रही है। इतना ही नहीं, प्रवासियों के सहयोग से 2015-16 में 100 अरब डॉलर का विदेशी निवेश मिलने का भी अनुमान है।
यकीनन इन दिनों भारत की बढ़ती हुई वैश्विक प्रतिष्ठा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बढ़ते प्रभाव के कारण प्रवासी भारतीयों में नया उत्साह दिख रहा है। गौरतलब है कि पिछले दिनों प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका यात्रा के दौरान प्रवासी भारतीयों के सपनों का समृद्ध और शक्तिशाली भारत बनाने का संकल्प व्यक्त करने के साथ ही प्रवासी भारतीयों से देश के आर्थिक और सामाजिक विकास में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करने का आह्वान किया था। चूंकि मोदी प्रवासी भारतीयों और विश्व के नेताओं के साथ व्यक्तिगत समीकरण विकसित कर रहे हैं, इसलिए प्रवासी भारतीयों का उत्साह और स्वाभिमान बढ़ना स्वाभाविक है।
हालांकि इस समय प्रवासी भारतीयों के उत्साह बढ़ने का एक कारण अमेरिका का आव्रजन सुधारों के तहत अवैध रूप से रहने वाले भारतीय प्रवासियों को वैधता संबंधी राहत देना भी है। इस महत्वपूर्ण कदम से अमेरिका से निर्वासन का खतरा झेल रहे 4.5 लाख अवैध प्रवासी भारतीयों को फायदा होने की उम्मीद है। नए सुधारों से उन कुशल कामगारों एवं उनके जीवनसाथियों को भी काम करने का अधिकार मिलेगा, जो वैध स्थायी दर्जा (एलपीआर) मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
पिछले दिनों प्रकाशित विश्व बैंक की रिपोर्ट में यह कहा गया है कि दुनिया में सबसे अधिक प्रवासी भारत के हैं। भारतीय कारोबारियों, वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और उद्योगपतियों की प्रभावी भूमिका दुनिया के विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाओं में सराही जा रही है। ऐसे में देश के विकास में प्रवासी भारतीयों से सहयोग की नई संभावनाएं दिख रही हैं। एक ओर प्रवासी कार्यरत देशों में रहते हुए भारत के विकास में सहभागी बनने का संकल्प ले रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, बड़ी संख्या में स्वदेश लौटकर भी वह देश की चमकीली तस्वीर बनाने में सहभागी बनने की डगर पर आगे बढ़ रहे हैं।
ऐसे में, हम क्यों न आशा करें कि मोदी सरकार विदेशों से गहरे कार्य अनुभव एवं संसाधनों के साथ लौटने वाले प्रवासी भारतीयों को देश की नई आर्थिक ताकत बनाने के लिए हरसंभव प्रयास करेगी। जिस तरह कोई तीन दशक पहले प्रवासी चीनियों ने सारी दुनिया से कमाई हुई अपनी दौलत चीन में लगाकर देश की तकदीर हमेशा के लिए बदल डाली, उसी प्रकार क्या हमारे देश की तकदीर बदलने में भी प्रवासी भारतीय कारगर सहयोग नहीं कर सकते?