बरसात की शाम थी। मुंबई के ताजमहल का आलीशान कमरा था। रोशनियों से चमकती दावत थी। इस दावत में खास मेहमान थे, देश के वित्त और रक्षा मंत्री। शहर के उद्योगपतियों को जब मालूम हुआ कि इंडियन एक्सप्रेस के अड्डे में आ रहे हैं अरुण जेटली, तो बड़े से बड़े धनवान पहुंच गए मंत्री जी के आने से बहुत पहले, ताकि आगे जगह मिले। जल्दी आने वालों में मैं भी थी, इसलिए कि मंत्री बनने के बाद पहली बार जेटली साहिब से मिलने का मौका था।
मुझे आगे बैठने दिया गया। अच्छी सीट मिलने के बाद मैं उस पर चिपक गई, क्योंकि कई लोग ऐसे थे इस महफिल में, जो खुद को वीआईपी समझने के नाते आगे बैठने की कोशिश में लगे थे। यह संघर्ष तभी खत्म हुआ, जब मंत्री जी वहां पहुंचे। उनके साथ थे भाजपा के स्थानीय सांसद और नेता, जिनके लिए खाली कुर्सियां नहीं थीं। कुर्सियां लाई गईं और हमारे सामने जब रखने की कोशिश की गई, तो हल्ला मच गया। कई लोगों ने याद दिलाया राजनेताओं को कि नरेंद्र मोदी के आने से जमाना बदल गया है और राजनीतिक तौर-तरीका भी। हल्ला मचाने वालों में मैं भी थी, क्योंकि मेरे दिमाग में कई सवाल थे मंत्री जी के लिए, जिनमें सबसे महत्वपूर्ण यह था कि चुनाव तो आप लोगों ने जीता है परिवर्तन और विकास के नाम पर, मगर सरकार बन जाने के बाद क्रांतिकारी परिवर्तन के संकेत क्यों नहीं नजर आ रहे हैं।
अफसोस कि मुझे सवाल पूछने का मौका नहीं मिला, क्योंकि मेरे से कहीं ज्यादा वीआईपी लोग मौजूद थे, जिनके पास भी कई सवाल थे। भूमि अधिग्रहण कानून को लेकर, अर्थव्यवस्था की सेहत को लेकर, विदेशी निवेशकों को फिर से आकर्षित करने को लेकर, शिक्षा को लेकर और अन्य कई विषयों पर भी। मंत्री जी ने इत्मीनान और ईमानदारी से जवाब दिए। भूमि अधिग्रहण के नए कानून पर उन्होंने स्वीकार किया कि सोनिया-मनमोहन की सरकार ने देश को ऐसा कानून बख्शा है, जिसके तहत भूमि अधिग्रहण को असंभव कर दिया गया है। देश की सुरक्षा के लिए यदि जमीन लेनी हो, तो भी दस साल लग सकते हैं।
मंत्री जी ने आश्वासन दिया कि मंदी के बादल दूर होने वाले हैं। यह भी कहा उन्होंने कि सरकार निवेशकों की मदद करना चाहती है, क्योंकि रोजगार पैदा करना प्रधानमंत्री की प्राथमिकता है और नई नौकरियां पैदा हो सकती हैं सिर्फ निजी निवेशकों की बदौलत।
इंडियन एक्सप्रेस की पत्रकार कोमी कपूर ने जब मंत्री जी से पूछा कि नरेंद्र मोदी और अटल बिहारी वाजपेयी के साथ काम करने में फर्क क्या महसूस कर रहे हैं, तो उन्होंने मुस्कराकर कहा, अटल जी की सरकार में जब मंत्री था, तब छह बजे तक दफ्तर से निकलकर मैं इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में कॉफी पीने आपके पति के साथ चला जाता था। अब हाल यह है कि रात के ग्यारह बजे तक मैं दफ्तर नहीं छोड़ सकता।...यही हाल अन्य मंत्रियों का भी है। कोमी ने जब पूछा कि अच्छे दिन कब आने वाले हैं, तो जेटली साहिब ने कहा कि उनकी नजर में तो आ गए हैं।
जिस दिशा में चल पड़ा है देश, वह दिशा सही है, सो अच्छे दिन आ चुके हैं। मंत्री जी की बातें सुनने के बाद तसल्ली तो हुई मुझे। वह इसलिए कि धीरे-धीरे ही सही, देश की गाड़ी चल तो पड़ी है दोबारा। अब जरूरी है रफ्तार में तेजी लाने की।