1986 में तत्कालीन सोवियत संघ ने अपने पहले मॉड्यूलर लो अर्थ ऑर्बिट अंतरिक्ष स्टेशन मीर का प्रक्षेपण किया, जिसके बाद अंतरिक्ष यात्रियों ने अंतरिक्ष में लंबे समय तक रहना भी शुरू किया। लेकिन 1995 में मीर में रह रहे एक अंतरिक्ष यात्री ने अपनी मानसिक स्थिति को लेकर चेतावनी दी थी कि अगर उसका मिशन छह महीने और बढ़ा दिया गया, तो वह इसे सहन नहीं कर पाएगा। यही वह समय था, जब नासा बेहद शांत ढंग से मनोवैज्ञानिकों की एक यूनिट तैयार कर रहा था, जो लंबी अंतरिक्ष यात्राओं के दौरान यात्रियों को मानसिक तौर पर शांत रख सके।
2011 के करीब एक बार एक अंतरिक्ष यात्री की मां गुजर गईं, एक अन्य अभियान में अंतरिक्ष यात्री की भाभी की हत्या हो गई, तो जब सुनामी ने जापान को तबाह किया, तो वे दृश्य भी चालक दल के सदस्यों ने देखे। मनोवैज्ञानिक यूनिट ने इन तनावपूर्ण क्षणों को संभालने के लिए अंतरिक्ष यात्रियों का भरोसा जीतना शुरू किया। यूनिट ने एक अंतरिक्ष यात्री को वह फिल्म भेजी, जिसमें वह बच्चे को जन्म दे चुकी थी, इसी तरह एक अंतरिक्ष यात्री और धरती पर मौजूद उसकी मंगेतर का विवाह भी संपन्न कराया। लेकिन मंगल मिशन की बात अलग होगी, जहां तक आने और जाने में ही तीन साल लगेंगे। इस दौरान संचार पूरी तरह से टूट भी सकता है। ऐसे में अब अंतरिक्ष यात्री भी वैसे चुने जा रहे हैं, जो लंबे समय तक अलगाव के मानसिक तनाव को झेल सकें। सुनीता विलियम्स व विलमोर जैसे अंतरिक्ष यात्री भी तेजी से स्थितियों से तालमेल बैठाना सीख रहे हैं। जैसा सुनीता विलियम्स एक वीडियो में कहती भी दिख रही हैं, ‘यही वह जगह है, जहां मुझे सबसे ज्यादा खुशी मिलती है।’ ©The New York Times 2025