आपके पास ऑस्ट्रेलिया का वह नक्शा है? वह नक्शा गलत है। अब पूरा देश आधिकारिक रूप से उस गलती को दुरुस्त करने जा रहा है। इसकी शुरुआत प्लेट टेक्टॉनिक्स के कारण हुई, जिसमें धरती का एक बड़ा हिस्सा अपनी जगह से खिसक जाता है।
ऑस्ट्रेलिया में धरती की निचली सतह के खिसकने की गति सबसे तेज है, जीववैज्ञानिक मानक के हिसाब से देखें, तो सतह वास्तव में उड़ रही है-यह सालाना 2.7 इंच उत्तर की ओर खिसकती जा रही है।
संभव है, धरती पर रह रहे लोगों को सतह के खिसकने का पता नहीं चल पाता हो, लेकिन जीपीएस (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) को इसका पता लग जाता है। ऐसे में, ऑस्ट्रेलिया को अपने अक्षांश और देशांतर दुरुस्त करने होंगे, ताकि वे जीपीएस से मेल खा सकें।
धरती की सतह के खिसकने की गति को देखते हुए पिछले पचास वर्षों में ऑस्ट्रेलिया को चार बार अपना नक्शा ठीक करना पड़ा है। आखिरी बार 1994 में उसने ऐसा किया था। तब तो यह संशोधन करीब 656 फीट था। यह इतना अधिक था कि सामान पहुंचाने वाला ड्राइवर आपके घर की घंटी बजाने के बजाय संभवतः आपके पड़ोसी के घर की घंटी बजा देता।
'ऐसे में, संभवतः आप अपने पिज्जा के लिए चिंतित होते', जियोसाइंस ऑस्ट्रेलिया के डेन जैक्सा कहते हैं। जियो साइंस ऑस्ट्रेलिया एक सरकारी संस्था है, जो सतह के खिसकने और उसके अनुरूप नक्शे को दुरुस्त करने की लगातार कवायद से चिंतित है। लेकिन डेन जैक्सा के मुताबिक, इससे भी अधिक बड़ी चीज दांव पर है। वह कहते हैं, अगली पीढ़ी की जीपीएस तकनीक में इंटेलीजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम्स आ जाएगा, जो अक्षांश और देशांतर की परिशुद्धता पर निर्भर करता है।
इस साल के आखिर में एक बार फिर यहां मानचित्र दुरुस्त करने का काम होगा; हालांकि इस बार यह संशोधन करीब 1.5 मीटर (4.9 फीट) होना है, धरती की सतह का यह खिसकाव उतना ज्यादा नहीं है।
लेकिन अगली पीढ़ी के जीपीएस उपकरण, जो उपग्रह और ग्राउंड स्टेशन, दोनों का इस्तेमाल करते हैं, एकदम सटीक होंगे, जिसमें धरती की सतह के एक इंच से भी कम खिसकने का ठीक-ठीक पता चल जाएगा। ऐसे में ये उपकरण ऑस्ट्रेलिया के भविष्य के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होंगे।
सालोंसाल धरती की सतह के खिसकने वाले इस देश में बगैर ड्राइवर वाले कारों के बारे में तो पूछिए ही मत। 'अगर ऐसी कार 1.5 मीटर भी इधर-उधर हो गई, तो इसका मतलब होगा कि आप सड़क की गलत दिशा में हैं,' जैक्सा कहते हैं।