फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बेईमान कोई ढूंढे न मिला

Mon, 06 Apr 2015 08:19 PM IST
सहीराम
विज्ञापन
विज्ञापन
हरियाणा में भाजपा के मंत्री लोग कह रहे हैं कि और भी ईमानदार अफसर हैं राज्य में खेमका के सिवा। यही बात जब पिछली सरकार में कांग्रेस के मंत्री कहते थे, तो भाजपा वालों को यकीन नहीं होता था। उनका मानना था कि अगर ऐसा होता, तो सभी अफसर वाड्रा की जान को न पड़े होते। बेचारे खेमका को अकेले ही मिशन वाड्रा में अपनी अफसरी होम करनी पड़ रही है। इसीलिए उन्हें सिर्फ एक खेमका ही ईमानदार नजर आते थे।
विज्ञापन


इसीलिए तो कहते हैं कि राज मिलने के बड़े फायदे होते हैं जी। सबसे पहला फायदा यह होता है कि नेता की निगेटिव सोच खत्म हो जाती है। विपक्ष में रह-रहकर वह इतना निगेटिव हो लेता है कि खुद सरकार को भी उसकी चिंता सताने लगती है कि यार, इसे हो क्या गया है? यह चिंता सिर्फ सरकार को नहीं, जनता को भी सताने लगती है। इसीलिए निगेटिव सोचने वालों को वह सत्ता में ले आती है, ताकि वे अपनी निगेटिव सोच छोड़ राष्ट्र निर्माण में योगदान करें।

सरकार बनते ही नेता फौरन पॉजिटिव सोचने लगता है। वह सावन का अंधा हो जाता है और उसे सब हरा ही हरा दिखाई देता है। फिर वह चरैवेति-चरैवेति कहते हुए सब कुछ चरने निकल जाता है। हरियाणा में भी सरकार में आते ही भाजपा वालों की सोच पॉजिटिव हो गई है। इसके बड़े फायदे हैं जी। देखना, अब ट्रांसपोर्ट लॉबी की तरह विभिन्न लॉबियां ढूंढ-ढूंढकर ईमानदार अफसर लाएंगी। और एक दिन मध्य प्रदेश की तरह हरियाणा में भी इतने ईमानदार अफसर हो जाएंगे कि उनकी ईमानदारी की कमाई गिनने के लिए नोट गिननेवाली मशीनें लगानी पड़ेंगी।
विज्ञापन


हरियाणा सरकार चाहे, तो मध्य प्रदेश की सरकार से टिप्स ले सकती है। आखिर अपनी ही पार्टी की सरकार है। खैर जी, कोई हरियाणा सरकार से यह न पूछे कि क्या संजीव चतुर्वेदी ईमानदार हैं? अगर किसी ने हां कर दी, तो नड्डा साहब नाराज हो जाएंगे, क्योंकि वह तो उन्हें एम्स से भी हटा चुके हैं। और प्रदीप कासनी के बारे में भी यह सवाल न पूछा जाए। सरकार को क्यों परेशान करना जी?
विज्ञापन

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें