फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स

अनुत्तरित प्रश्नों का कोलाहल: पक्ष-विपक्ष क्षुद्र राजनीति के बंधक बने... मुद्दों की अनदेखी और भाषणबाजी सामान्य

शंकर अय्यर
Updated Sat, 30 Aug 2025 06:46 AM IST

सार

जब पक्ष व विपक्ष, दोनों ही क्षुद्र राजनीति के बंधक बने हों, तब अनुत्तरित प्रश्नों के कोलाहल के बीच कोई भी खुद को निर्दोष कैसे कह सकता है? निर्वाचित सांसद अगर जनता के कम और अपने राजनीतिक दल के प्रतिनिधि ज्यादा लगें, तब सदनों के स्थगन, महत्वपूर्ण मुद्दों की अनदेखी और बेवजह भाषणबाजी सामान्य हो जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
संसद भवन - फोटो : ANI


यहां कुछ झलकियां दी गई हैं। फिलहाल भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए एकतरफा टैरिफ का खतरा है। इस मुद्दे पर लोकसभा में सात और राज्यसभा में 13 सवाल उठे। इस मुद्दे पर बहस शुरू होनी चाहिए थी, यहां तक कि रणनीतियों पर एक सर्वदलीय चयन समिति भी गठित होनी चाहिए थी। लेकिन बयानबाजी के शोर में ऐसा नहीं हो सका। बहरहाल, सरकार ने घरेलू अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करके सही ही किया है और आर्थिक व सामाजिक क्षेत्र में सुधारों के लिए मंत्रियों के दो अनौपचारिक समूह बनाए हैं। इन्हें विधायी और नीतिगत सुधारों के एजेंडे तैयार करने का काम सौंपा गया है। बेशक यह स्वागत योग्य है, लेकिन यह बजट-2025 में किए गए उपायों की घोषणाओं पर सवाल खड़े करता है। बजट में नियामक सुधारों के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति के गठन की घोषणा की गई थी, जो मंजूरी राज के परिदृश्य की समीक्षा करेगी। नियामकीय बोझ से व्यवसाय भयभीत हैं। अवंतिस रेगटेक के एक अध्ययन से पता चलता है कि उद्यमियों को 1,500 कानूनों और 69,000 से ज्यादा अनुपालनों का सामना करना पड़ता है। क्या सांसदों ने सरकार से सवाल किए? सच तो यह है कि इस काम में दो समितियां लगी हुई हैं और उनकी पहली बैठक 21 अगस्त को ही हुई थी।


सर्वविदित है कि बहुप्रतीक्षित सुधारों का बड़ा हिस्सा राज्यों में लंबित है। सरकार ने बदलाव को गति देने के लिए फरवरी में राज्यों के निवेश अनुकूलता सूचकांक की घोषणा की थी—इसके लिए नीति आयोग द्वारा मुहूर्त और लॉन्च का इंतजार है। प्रतिस्पर्धा करने के लिए भारत को अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। निजी क्षेत्र में नवाचार और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए जुलाई, 2024 में एक कोष की घोषणा की गई थी। इस वर्ष के लिए इसका बजट आवंटन 20,000 करोड़ रुपये है। अगस्त तक इस कोष का वितरण नहीं हुआ है। डेयरी क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है, फिर भी पशु चिकित्सकों के 10,839 पद रिक्त हैं। मनरेगा कार्यक्रम ग्रामीण भारत की जीवन रेखा है। अगस्त तक 17,238 करोड़ रुपये का बकाया भुगतान नहीं किया गया है। वर्ष 2024 के बजट में ‘शहरों को विकास केंद्र’ घोषित किया गया। इसे आगे बढ़ाने के लिए सरकार ने फरवरी, 2025 में 'शहरी चुनौती कोष' की घोषणा की, और इसके लिए बजट में एक लाख करोड़ रुपये आवंटित किए। क्या सांसदों ने इसकी स्थिति जानने के लिए सवाल उठाए?


इस बीच, बाढ़ का कहर कस्बों और शहरों में जारी है, खासकर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान में। 2021 की शुरुआत में ही आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय की एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि बाढ़ क्षेत्र में निर्माण कार्यों ने शहरों को असुरक्षित बना दिया है। इससे निपटने के लिए अब तक नीति नहीं बनाई गई है। अगस्त में, संसद की एक स्थायी समिति को बताया गया था कि 2024 में बाढ़ क्षेत्र के लिए तैयार दिशानिर्देश 'राज्यों के पास उनके सुझावों के लिए लंबित हैं।' बाढ़ रोकने और सूखे को कम करने के लिए नदियों को जोड़ने का विचार राज्यों के बीच आम सहमति के अभाव में अटका है। सर्वविदित है कि जीवन की गुणवत्ता विदेशी और घरेलू निवेश और पुनर्निवेश को निर्धारित करती है। तथ्य यह है कि देश में शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश पिछले वर्ष के 10 अरब डॉलर के मुकाबले तेजी से घटकर 40 करोड़ डॉलर रह गया, जबकि सकल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 80 अरब डॉलर रहा। सांसदों को इसके कारणों पर बहस करनी चाहिए थी। इस बहस से उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन योजना में सुधार लाया जा सकता था और चीन+1 मॉडल के लिए निवेश आकर्षित किया जा सकता था। ऑपरेशन सिंदूर से इसकी पुष्टि हुई कि रक्षा उत्पादन को निजी क्षेत्र के लिए खोलना इस सरकार की सफलता है। लेकिन यह व्यवस्था समस्याओं से घिरी हुई है। एक उदाहरण-सरकार ने बुलेटप्रूफ बॉडी प्रोटेक्टर बनाने के लिए 43 लाइसेंस जारी किए। रक्षा मामलों की संसदीय स्थायी समिति ने पाया है कि इनमें से 33 कंपनियों ने अभी तक उत्पादन शुरू नहीं किया है!


उच्च शिक्षा में निवेश क्षमता का विस्तार करता है और नवाचार को बढ़ावा देता है। इसके लिए संकाय क्षमता को बढ़ावा देने की जरूरत है। लेकिन सच यह है कि वैज्ञानिक अनुसंधान पर केंद्रित संस्थानों में सैकड़ों पद रिक्त हैं। सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में वैज्ञानिकों सहित 700 से अधिक पद रिक्त हैं। 23 एम्स केंद्रों में 2,500 से अधिक पद, आयुष मंत्रालय के अंतर्गत 2,200 से अधिक पद और केंद्रीय विश्वविद्यालयों में 4,889 शिक्षकों के पद अभी रिक्त हैं। प्राथमिक शिक्षा स्तर पर, केंद्रीय विद्यालयों में कुल 7,765 और नवोदय विद्यालयों में 4,323 शिक्षक पद रिक्त हैं। निवेशक कानूनी मुद्दों के निपटारे में देरी से परेशान हैं। एक अगस्त को, सरकार ने लंबित मामलों के आंकड़े जारी किए-सुप्रीम कोर्ट में 86,844, हाई कोर्ट में 63.32 लाख और अधीनस्थ न्यायालयों में 4.66 करोड़ मामले लंबित हैं।


अदालतों में लंबित मामलों का होना बहुचर्चित विषय है और इसका एक प्रमुख कारण रिक्तियां हैं-उच्च न्यायालयों में 334 न्यायाधीशों के पद और निचली अदालतों में 4,721 न्यायाधीशों के पद रिक्त हैं। दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता का वादा अधूरा पड़ा है-राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण में 14,961 मामले लंबित हैं। निवेश सम्मेलनों में कर विवाद लगातार चर्चा का विषय बने हुए हैं। देश का शासन और उसकी क्षमता, क्षुद्र पक्षपातपूर्ण राजनीति की बंधक बनी हुई है। और अनुत्तरित प्रश्नों के इस कोलाहल के बीच कोई भी दल खुद को निर्दोष नहीं कह सकता।   

विज्ञापन
विज्ञापन
Next