सऊदी अरब में नई श्रम नीति लागू होने से वहां काम कर रहे लाखों प्रवासी भारतीयों के सामने बेरोजगारी का खतरा पैदा हो गया है। हमारे देश के करीब 25 लाख लोग सऊदी अरब एवं कुवैत में काम कर रहे हैं।
नए कानून के अनुसार, कम से कम 49 कर्मचारियों वाली निजी कंपनियों में दस फीसदी स्थानीय लोगों को रोजगार देना बाध्यकारी बना दिया गया है। हालांकि वहां की अर्थव्यवस्था निजी व सार्वजनिक उपक्रमों में प्रवासियों की मौजूदगी पर निर्भर है, बावजूद इसके वहां बेरोजगारी बहुत ज्यादा है। इसी समस्या से निजात पाने के लिए नई श्रम नीति लागू की गई है, जिसे निताकत नाम दिया गया है।
दरअसल, बेरोजगारी से निजात के लिए वहां 1994 में सऊदीकरण की नीति लागू की गई थी, जिसके तहत 30 फीसदी स्थानीय लोगों को रोजगार देने का प्रावधान किया गया था। लेकिन वह हर तरह की गतिविधियों के लिए व्यावहारिक नहीं था, क्योंकि विभिन्न कामों के लिए योग्य स्थानीय श्रमिक नहीं मिलते थे। इसलिए यह नई नीति लागू की गई है।
निताकत के तहत श्रम बाजार को 41 गतिविधियों (कामों) में बांटा गया है और हर काम की पांच श्रेणियां-विशाल, बड़ा, मध्यम, लघु एवं अति लघु बनाई गई हैं। इस प्रकार कुल 205 श्रेणियां बनाई गई हैं। इस नीति के तहत कंपनियों द्वारा रोजगार के स्थानीयकरण का मूल्यांकन किया जाएगा और उन्हें एक्सीलेंट, ग्रीन, येलो एवं रेड ग्रेड प्रदान किए जाएंगे।
उच्चतम स्तर पर स्थानीय लोगों को रोजगार देने वाली कंपनियों को कई तरह की राहत एवं प्रोत्साहन दिए जाएंगे, जबकि रोजगार का कम स्थानीयकरण करने वाली कंपनियों पर स्थानीय लोगों को रोजगार देने का दबाव डाला जाएगा और उन्हें नया वर्क परमिट भी नहीं दिया जाएगा।