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आईएसआई का नया पैंतरा

रवींद्र दुबे Updated Wed, 23 May 2018 06:25 PM IST
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नेपाल में ब्लास्ट
अप्रैल के अंत में संदिग्ध जिहादी तत्वों ने नेपाल के संखुवासभा में 900 मेगावाट के हाईड्रोपावर प्रोजेक्ट अरूण-3 को निशाना बनाया। इसे भारत का सतलुज जल विद्युत निगम विकसित कर रहा है। इस बिजली संयंत्र के कार्यालय पर तब हमला हुआ, जब नेपाल भारतीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के स्वागत की तैयारियां कर रहा था। करीब हफ्ते भर बाद वह नेपाल के प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली के साथ इस परियोजना की संयुक्त रूप से आधारशिला रखने वाले थे। इस धमाके की जिम्मेदारी किसी संगठन ने नहीं ली।


इस घटना से मोदी के नेपाल प्रवास पर कोई फर्क नहीं पड़ा और वहां उन्होंने रिमोट कंट्रोल के जरिये नेपाली प्रधानमंत्री के साथ इस महत्वाकांक्षी परियोजना की आधारशिला रखने के साथ ही कई और कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। जनकपुर से अयोध्या बस सेवा का उद्घाटन भी किया। उनकी यह यात्रा दोनों देशों के लिए उपयोगी साबित हुई। मगर अरूण-3 परियोजना के परिसर पर हुआ हमला इसलिए चिंता का कारण है, क्योंकि नेपाल में भारतीय हितों पर यह कोई पहला हमला नहीं था। 


इस घटना के ठीक एक पखवाड़ा पहले नेपाल के बिराटनगर क्षेत्र में भारतीय वाणिज्य दूतावास के दफ्तर के बाहर एक प्रेशर कुकर बम फटा, जिसमें वाणिज्य दूतावास भवन की दीवार क्षतिग्रस्त हो गई। नेपाली पुलिस को शुबहा है कि इन हमलों के पीछे पाकिस्तान की दुर्दांत खुफिया एजेंसी आईएसआई हो सकती है, जिसे नेपाल में स्थानीय स्तर पर मदद मिलती है। इस तरह की अनेक घटनाएं पिछले कुछ वर्षों के दौरान घट चुकी हैं और उनका इशारा सिर्फ एक तरफ है। आईएसआई के राडार पर कश्मीर के साथ-साथ पड़ोसी देश नेपाल भी आ चुका है।


वह नेपाल में अपनी भारत विरोधी गतिविधियों का जाल फैला रही है। उसका मकसद है नेपाली मुसलमानों को – खास कर कश्मीर और भारत के अन्य हिस्सों से जाकर वहां बसे मुसलमानों के बीच भारत विरोधी भावनाएं भड़काना और उन्हें इस्लामी जिहाद के नाम पर भारत में विध्वंसकारी गतिविधियों के लिए तैयार करना। इस काम में पाकिस्तानी दूतावास, पाकिस्तानी कंपनियां, बैंक और कुछ मुस्लिम संगठन उसके सबसे बड़े मददगार हैं। ऐसा नहीं है कि पाकिस्तान की इस दुर्दांत खुफिया एजेंसी की गतिविधियां नेपाल तक ही सीमित हैं।


गृह मंत्रालय एवं भारतीय खुफिया एजेंसियों के जानकारों का कहना हैं कि आईएसआई ने नेपाल के साथ ही बांग्लादेश, म्यांमार और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों में भी अपनी भारत विरोधी गतिविधियों का न सिर्फ नेटवर्क तैयार कर लिया है, वह उसका बाकायदा इस्तेमाल भी कर रही है। इन देशों के रास्ते वह भारत में अवैध नागरिकों, आतंकवादियों और हथियारों की घुसपैठ तो करवा ही रही है, वह भारत के साथ नेपाल की खुली सीमा का इस्तेमाल कर जिहादी आतंकवादियों, हथियारों और पैसों की खेप भी भारत में पहुंचा रही है। 


इंटेलिजेंस ब्यूरो के सूत्रों के अनुसार नियंत्रण रेखा पर सुरक्षा एजेंसियों की चौकसी बढ़ने के बाद से ही आईएसआई ने कश्मीरी उग्रवादी नेताओं और आतंकवादियों से मिलने जुलने के लिए नेपाल को सुरक्षित अड्डे के बतौर इस्तेमाल करना शुरू किया है। नेपाल के रास्ते कश्मीर में आतंकवादियों की घुसपैठ हो रही है। वे काठमांडू तक तो विमान से आते हैं, वहां से सड़क मार्ग से ट्रकों आदि के जरिये उन्हें कश्मीर में पहुंचा दिया जाता है।


इसी तरह से पाकिस्तान व पाक अधिकृत कश्मीर जाने के इच्छुक आतंकवादियों या कश्मीरी उग्रवादी नेता पहले सड़क मार्गों से काठमांडू आते हैं और फिर वहां से पाक दूतावास द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों के जरिये विमान से पाकिस्तान पहुंच जाते हैं। सूत्रों के अनुसार आईएसआई मुख्य रूप से जम्मू-कश्मीर इस्लामिक फ्रंट के जरिये भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम देती रही है, जबकि भारत में खास तरह की विध्वंसकारी गतिविधियों के लिए काडर भर्ती करने का काम नेपाल इस्लामिक युवा संघ के जरिये किया जा रहा है। संघ को सेमीनार एवं नेपाली मुस्लिम युवाओं के प्रशिक्षण के नाम पर पाकिस्तानी दूतावास से पैसे मिलते हैं। 
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इस काम में सचल इंजीनियरिंग वर्क्स ,पैंटेक ग्रुप ऑफ कंपनीज की शाखाओं के साथ ही पाकिस्तान के ‘मशहूर’ हबीब बैंक की साझेदारी में नेपाल में चल रहे हिमालयन बैंक का इस्तेमाल भी किया जा रहा है। इस बैंक के जरिये ही भारत में विघटनकारी और विध्वंसकारी गतिविधियों के लिए पैसे का लेन-देन होता है। स्पेस टाइम नेटवर्क के नाम से चलने वाली केबल टी वी कंपनी और ‘स्पेस टाइम दैनिक के जरिये भारत विरोधी भावनाएं भड़काई जाती हैं। इसके मालिक कश्मीरी मूल के जमीं उर्फ जम्मू शाह हैं।


आईएसआई के माफिया सरगना दाऊद इब्राहिम के साथ इनके गहरे ताल्लुकात बताए जाते हैं। नेपाल के बारे में फिल्म अभिनेता ऋतिक रोशन के एक आपत्तिजनक बयान को लेकर नेपाल में भड़के भारत विरोधी दंगों में उनके टी वी चैनल की भूमिका उजागर हुई थी। इंटेलिजेंस ब्यूरो के सूत्रों के अनुसार, काठमांडू स्थित पाक दूतावास अपने राजनयिकों को ढाल बनाकर लगातार भारत विरोधी गतिविधियों में संलग्न रहा है। 


12 अप्रैल, 2001 को पाक दूतावास में फर्स्ट सेक्रेटरी मोहम्मद अरशद चीमा के निवास पर छापा मारकर पुलिस ने भारी मात्रा में आरडीएक्स बरामद किया था। गिरफ्तारी और निष्कासन से कुछ ही दिन पहले ही वे ठेका कंपनी सचल इंजीनियरिंग वर्क्स मालिक गुलाम हुसैन चीमा द्वारा किराए पर लिए गए मकान में चले गए थे। उनकी कंपनी को मुगलिंग-पोखरन के बीच सड़क बनाने का ठेका मिला था। चीमा की गिरफ्तारी और उनके निष्कासन के बाद नेपाल सरकार ने सचल इंजीनियरिंग को बंद करने के साथ ही इस कंपनी के सभी पाकिस्तानी कर्मचारियों के वीसा रद्द कर दिए थे।


नेपाल पुलिस हाल ही में भारतीय हितों पर हुए हमलों की जांच कर रही है, लेकिन इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि वहां आईएसआई की भारत विरोधी गतिविधियां जारी हैं।
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