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जी-20 के नए शुभंकर

Thu, 13 Jul 2017 06:32 PM IST
सुरेंद्र कुमार
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जी-20 सम्मेलन
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जर्मनी के बंदरगाह शहर हैम्बर्ग में पिछले दिनों हुए जी-20 देशों के बारहवें शिखर सम्मेलन ने विभिन्न देशों के बीच के मतभेदों को उजागर कर दिया। अमेरिका और यूरोप, दोनों ने खुद को एक दूसरे के विरोधी खेमों में पाया। जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल ने जोर देकर कहा कि 'असहमतियों को स्पष्ट किया जाना चाहिए। दुर्भाग्य से अमेरिका जलवायु समझौते से पीछे हट गया है और मैं इसकी निंदा करती हूं।' फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने यही बात कुछ इस तरह दोहराई, ‘हमारी दुनिया कभी इस तरह विभाजित नहीं थी।’ अमेरिका और यूरोप की मौजूदा कट्टरता के बीच ऐसा प्रतीत होता है कि तीन एम-मर्केल, मोदी और मैक्रों जी-20 के केंद्र में आ गए हैं। उनकी नेतृत्वकारी भूमिका, दृष्टिकोण और प्राथमिकताएं न केवल जी-20 को प्रभावित करेंगी, बल्कि उनके अपने राजनीतिक भाग्य को भी प्रभावित करेंगी।
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जी-20 के शिखर सम्मेलन में पहली बार ट्रंप के पेरिस समझौते से पीछे हटने के निर्णय और उनके संरक्षणवादी खतरों के कारण अमेरिका के खिलाफ शेष उन्नीस देश थे। ब्रिटिश प्रधानमंत्री टेरिजा मे के इस सुझाव के बावजूद, कि अमेरिका पेरिस समझौते पर वापस लौट सकता है, अंतिम संयुक्त विज्ञप्ति में घोषणा की गई कि 'जी-20 के सदस्य देशों के नेता मानते हैं कि पेरिस समझौता अपरिवर्तनीय है...हम पेरिस समझौते के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हैं और तेजी से इसके पूर्ण क्रियान्वयन की ओर बढ़ रहे हैं।' इसके बावजूद इसमें अमेरिकी आश्वासन को शामिल किया गया कि वह अन्य देशों के साथ मिलकर काम करने का प्रयास करेगा, ताकि वे जीवाश्म ईंधन तक पहुंच बनाकर उसका स्वच्छ उपयोग कर सकें। कोयले के दो बड़े उपयोगकर्ता भारत और चीन को शिकायत नहीं होनी चाहिए।

वैश्विक व्यापार के मुद्दे पर भी अमेरिका का नजरिया जी-20 के बाकी सदस्यों के दृष्टिकोण से अलग था। हालांकि जी-20 ने पारस्परिक निवेश और व्यापार लाभ के महत्व को स्वीकार किया, लेकिन उसने अन्यायपूर्ण व्यापार प्रथाओं सहित संरक्षणवाद से लड़ने की कसम खाई और वैध व्यापार रक्षा उपकरणों को मान्यता दी।
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अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के नारे 'मेक अमेरिका ग्रेट एगेन' के विरोध में इमैन्युएल मैक्रों ने 'मेक आवर प्लानेट ग्रेट एगेन' का नारा दिया, जो कुछ ही मिनटों में वायरल हो गया। उन्होंने फिर से उन अमेरिकी वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को फ्रांस आकर जलवायु समाधान पर काम करने के लिए आमंत्रित किया, जो ट्रंप के पेरिस समझौते से पीछे हटने के निर्णय से नाराज हैं। बहुत तेजी से वैश्विक नेताओं के बीच पोस्टर बॉय बनने वाले 39 वर्षीय मैक्रों ने व्यापार असंतुलन पर ट्रंप की टिप्पणी भी खारिज कर दी। एप्पल आईफोन (जिसे अमेरिका में डिजाइन किया गया, चीन में एसेंबल किया गया और पूरी दुनिया में बेचा जाता है) का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि घाटे या बचत के चश्मे से व्यापार के लाभ को आंकना एक गंभीर गलती है। इस तर्क के बावजूद अगर अमेरिका स्टील आयात पर शुल्क और  कोटा लगाता है, तो वैश्विक स्तर पर इसका असर होगा।

प्रधानमंत्री मोदी अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष के सबसे मजबूत और उत्साही पैरोकार के रूप में उभरे। उनके 11 सूत्री एजेंडे के प्रति कई जी-20 नेताओं और इसके बाहर के लोगों ने समर्थन किया। आतंकवादी समूहों की पहचान, उनके लिए धन एवं हथियारों के प्रवाह को बंद करने, उनकी गतिविधियों कीे सूचनाएं साझा करने, उनके प्रत्यर्पण और साइबर सुरक्षा के बारे में उनके सुझावों पर अगर गंभीरता से अमल किया जाए, तो आतंकवाद के वैश्विक खतरे से निपटने में बहुत सहायता मिलेगी।

हालांकि अतंरराष्ट्रीय आतंकवाद से संबंधित व्यापक संधि पर कार्रवाई, आतंकवाद के समर्थक देशों के खिलाफ निवारक कार्रवाई, आतंकी संगठनों को धन और हथियारों की आपूर्ति से संबंधित पिछला रिकॉर्ड देखें, तो यह संदिग्ध दिखता है। आतंकवाद को प्रश्रय, संरक्षण, प्रशिक्षण देने और राज्य नीति के साधन के रूप में आतंकवाद का इस्तेमाल करने के मामले में पाकिस्तान की भूमिका जग जाहिर है, पर उसके खिलाफ कभी कोई कार्रवाई नहीं हुई। दुनिया के विभिन्न हिस्सों में कट्टरपंथियों की पाठशाला बने मस्जिदों को सऊदी अरब से धन प्राप्त होता है, लेकिन ट्रंप अपने पहले विदेशी दौरे पर सऊदी अरब ही गए। आतंकी संगठनों को धन एवं हथियार कहां से मिलता है, उसका स्रोत भी पता है। चीन ने बार-बार संयुक्त राष्ट्र द्वारा जमात उद दावा के सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित किए जाने के कदम को रोका। इसलिए इसकी कोई संभावना नहीं है कि लश्कर-ए तैयबा, जमात उद दावा और हक्कानी गुट को इस्लामिक स्टेट और अल कायदा के बराबर मानने की मोदी की अपील पर कोई सुनवाई होगी।

प्रधानमंत्री ने अपनी सरकार के कामकाज की उपलब्धियों-काले धन और भ्रष्टाचार पर रोक, डिजिटलीकरण का जोरदार प्रचार, स्टार्ट अप को वित्तीय सहायता, श्रम बाजार में सुधार, कार्यबल में महिलाओं की व्यापक भागीदारी और व्यापार में अनुकूलता-के बारे में जो बताया, उसकी समकक्ष नेताओं ने प्रशंसा की। विमुद्रीकरण और जीएसटी भारत के लिए परिवर्तनकारी फैसले हैं।

जी-20 के संयुक्त उद्देश्यों (मजबूत, टिकाऊ, संतुलित एवं समावेशी विकास) को समर्थन देने के लिए नेताओं ने  वैश्विक समुदाय की साझा चुनौतियों-आतंकवाद, विस्थापन, गरीबी, स्वास्थ्य सेवा, रोजगार सृजन, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा सुरक्षा और लैंगिक भेदभाव से निपटने के लिए समाधान तलाशा। लेकिन सभी देशों के अपने-अपने घरेलू राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक विचार हावी रहते हैं। तथ्य यह है कि जी-20 के पास अपने फैसलों को लागू करवाने के लिए वैधानिक अधिकार नहीं है। फिर भी जी-20 आर्थिक सहयोग के लिए एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मंच है। धीरे-धीरे इसका सम्मेलन अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर समझौता करने और तनाव कम करने का एक उपयोगी मंच बन रहा है।
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