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नए श्रम कानून और नई संभावनाएं: भारत तेजी से व्यापार समझौते और उनके लाभप्रद क्रियान्वयन की राह पर आगे बढ़ रहा

जयंतीलाल भंडारी
Updated Wed, 20 May 2026 06:37 AM IST

सार

पश्चिम एशियाई संकट से बढ़ती वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत के नए श्रम कानून आर्थिक मजबूती और औद्योगिक विकास का नया आधार बन रहे हैं।
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नए श्रम कानून - फोटो : Adobe Stock


हाल ही में, प्रधानमंत्री मोदी ने पांच देशों-संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली की आधिकारिक यात्रा के दौरान इन देशों के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय व्यापार समझौते किए हैं। साथ ही, हाल ही में केंद्र सरकार ने गजट अधिसूचना के जरिये पूरे देश में चार नई श्रम संहिताएं लागू करके घटती हुई विकास दर को थामने तथा विकास की नई संभावनाओं को आकार देने का मार्ग प्रशस्त किया है। ये नई श्रम संहिताएं सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा, न्यूनतम और समय पर मजदूरी का भुगतान, सुरक्षित कार्यस्थल और नारी व युवा शक्ति के लिए लाभकारी अवसरों के लिए एक मजबूत नींव के रूप में काम करेंगी। साथ ही, भविष्य के लिए एक ऐसे इकोसिस्टम का निर्माण करेंगी, जो श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा और भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास को मजबूत बनाएगा। इन संहिताओं से देश सेवा क्षेत्र के साथ-साथ विनिर्माण केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा।


उल्लेखनीय है कि पश्चिम एशियाई संकट का दुनिया के साथ-साथ भारत की अर्थव्यवस्था पर भी प्रभाव पड़ने लगा है। ऐसे में, नए श्रम कानून देश की विकास दर बढ़ाने, देश में विदेशी निवेश के प्रवाह को आकर्षित करने तथा द्विपक्षीय व मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के माध्यम से निर्यात बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हुए दिखाई देंगे। एशियाई विकास बैंक (एडीबी) की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशियाई संकट के चलते चालू वित्त वर्ष 2026-27 में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 0.6 प्रतिशत गिरकर 6.3 प्रतिशत रह जाएगी। ऐसे में, नए श्रम कानूनों की मदद से भारतीय अर्थव्यवस्था के भविष्य में आगे बढ़ने और विकास करने की उम्मीद दिखाई दे रही है। नए श्रम कानूनों से वैश्विक चुनौतियों के बीच दुनिया में भारत तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था वाला देश बना रह सकता है। इसकी पुष्टि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की रिपोर्ट 2026 भी करती है, जिसके अनुसार, वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच 2026 में 6.5 प्रतिशत विकास दर के साथ भारत दुनिया की तेजी से बढ़ती विकास दर वाला देश बना रहेगा। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) और विश्व बैंक ने भी भारत के लिए ऐसे ही तेज विकास दर के अनुमान पेश किए हैं। अब देश में देशी-विदेशी निवेश बढ़ने की संभावनाएं बढ़ेंगी। भारतीय अर्थव्यवस्था के तेजी से बढ़ने के कारण दुनिया के विकसित और विकासशील देश भारत के साथ व्यापार बढ़ाने में ज्यादा रुचि दिखा सकते हैं।


यह कोई छोटी बात नहीं है कि अब दुनियाभर के देशों का मानना है कि अगर वे आर्थिक रूप से तेजी से बढ़ते हुए भारत के साथ नहीं जुड़ पाए, तो वे महत्वपूर्ण मौका गंवा देंगे। ऐसे में, नए श्रम कानून भारत के लिए व्यापार समझौतों से लाभ के मद्देनजर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए दिखाई देंगे। भारत के लिए एफटीए और द्विपक्षीय व्यापार समझौतों के जरिये निर्यात के नए बाजारों में दस्तक देने की संभावनाएं तेज होंगी। नए श्रम कानूनों से सेवा निर्यात में भी वृद्धि होते हुए दिखाई देगी। आईएमएफ की नई विश्व आर्थिक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कुछ दशकों में भारत से सेवाओं का निर्यात, वस्तुओं के निर्यात की तुलना में ज्यादा तेजी से बढ़ा है। साथ ही, एआई, डिजिटल प्लेटफॉर्म, क्लाउड कंप्यूटिंग और रिमोट वर्क ने कई सेवाओं को व्यापार योग्य बना दिया है। इसी का परिणाम है कि वित्त वर्ष 2024-25 में सेवाओं का निर्यात रिकॉर्ड 387.5 अरब डॉलर तक जा पहुंचा, जो 13.6 फीसदी की वृद्धि है।


उम्मीद है कि नए श्रम कानूनों से रोजगार व्यवस्था बेहतर होगी, उद्योग आधुनिक बनेंगे, श्रमिक हित का ख्याल रखा जाएगा और जरूरतों के अनुसार श्रम व्यवस्था मजबूत होगी। इससे भारत तेज विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ सकेगा। उम्मीद करें कि सरकार आर्थिक मजबूती के लिए कृषि, बैंकिंग, वित्तीय समावेशन, लॉजिस्टिक सुधार, डिजिटलीकरण व वित्तीय क्षेत्र में सुधारों की डगर पर बढ़ेगी। आशा है कि देश इन चार नई श्रम संहिताओं की मदद से श्रमिकों के कल्याण के साथ उत्पादन, निर्यात व रोजगार वृद्धि और विकास दर के ऊंचे लक्ष्यों को प्राप्त करते हुए वर्ष 2047 में विकसित भारत बनने की राह पर भी आगे बढ़ते हुए दिखाई दे सकेगा।  


edit@amarujala.com
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