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निर्यात के नए मौके

जयंतीलाल भंडारी Updated Thu, 06 Sep 2018 06:01 PM IST
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जयंतीलाल भंडारी

इस समय रुपया डॉलर के मुकाबले 72 के स्तर तक फिसल गया है और देश का विदेशी मुद्रा भंडार कम होते हुए 400 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया है। ऐसे में, निर्यात बढ़ाकर डॉलर की आवक बढ़ाने की संभावनाओं को साकार करने की रणनीति जरूरी है। अमेरिका चीन के बीच व्यापार युद्ध से इन दो देशों के अलावा कुछ यूरोपीय, अफ्रीकी और एशियाई देशों में भारतीय निर्यात बढ़ाया जा सकता है। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) की रिपोर्ट बताती है कि अमेरिका और चीन द्वारा एक दूसरे के आयात पर शुल्क बढ़ाए जाने के फैसलों से इन दोनों देशों के बाजारों में भारतीय उत्पादों के निर्यात की चमकीली संभावनाएं सामने आई हैं। वाणिज्य मंत्रालय के एक हालिया अध्ययन में पाया गया है कि भारत जहां अमेरिका में मशीनरी, इलेक्ट्रिकल उपकरण, वाहन, परिवहन कल-पुर्जे, रसायन, प्लास्टिक, रबड़ जैसे उत्पादों का निर्यात बढ़ा सकता है, वहीं तंबाकू, ताजा अंगूर, रबर की गोंद, लुब्रिकेंट्स, सोयाबीन, अलॉय स्टील, बादाम, अखरोट आदि समेत करीब 100 उत्पादों की आपूर्ति चीन को कर सकता है।



विगत 20 अगस्त को यूरोपीय संघ, चीन, जापान, कनाडा, रूस, श्रीलंका, ताइवान, दक्षिण कोरिया और थाईलैंड ने अमेरिका के साथ मिलकर विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में भारत की निर्यात संवर्धन योजनाओं के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया। विगत मार्च में भी अमेरिका ने डब्ल्यूटीओ में भारत द्वारा दी जा रही निर्यात सब्सिडी को रोकने हेतु आवेदन दिया था। इन देशों का कहना है कि अब भारत अपने निर्यातकों के लिए सब्सिडी योजनाएं लागू नहीं कर सकता, क्योंकि यह डब्ल्यूटीओ के समझौते का उल्लंघन है। निर्यात के लिए सब्सिडी वही देश दे सकते हैं, जहां प्रति व्यक्ति आय एक हजार डॉलर सालाना से कम हो। भारत में प्रति व्यक्ति आय इसके दोगुने के बराबर है।


भारत का कहना है कि उसके पास निर्यात संवर्धन योजनाओं को चरणबद्ध तरीके से खत्म करने के लिए आठ साल का समय है। पर इस मामले में भारत कमजोर पड़ सकता है और इस साल के अंत तक उसे विवादित योजनाओं पर निर्यात सब्सिडी खत्म करने के मद्देनजर बड़ा निर्णय लेना पड़ सकता है। निर्यात की ऐसी चिंताओं के बीच अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध से इन दोनों देशों में निर्यात बढ़ाने के लिए सुनियोजित कदम उठाना लाभदायी होगा।

 

अमेरिका से व्यापार युद्ध के बीच चीन ने भारत समेत पांच देशों से आयातित सामान पर टैक्स घटाने या फिर शून्य करने की घोषणा की है। केमिकल्स, कृषि उत्पाद, मेडिकल उत्पाद, सोयाबीन, कपड़े, स्टील और एल्युमीनियम के सामान पर आयात शुल्क घटने से भारतीय किसानों और उद्योग को बहुत फायदा होगा और व्यापार असंतुलन कम करने में मदद मिलेगी। भारतीय कंपनियां जेनेरिक दवाओं के लिए चीन की बढ़ती मांग पूरी करने की संभावनाएं तलाश रही हैं। हालांकि अमेरिका ने भारत के स्टील एवं एल्युमीनियम सहित कई वस्तुओं पर आयात शुल्क बढ़ा दिए हैं, लेकिन भारत ने अमेरिका से आने वाले सामान पर आयात शुल्क नहीं बढ़ाया है। भारत को अमेरिकी सामान पर आयात शुल्क लागू करने से बचना चाहिए, क्योंकि भारत से सबसे अधिक निर्यात अमेरिका को ही होता है।

 

उम्मीद करनी चाहिए कि सरकार द्वारा 2020 तक निर्यात बाजार में तेजी से आगे बढ़ने और वैश्विक निर्यात में भारत का हिस्सा दो फीसदी तक पहुंचाने के लिए निर्यात की नई संभावनाओं को साकार किया जाएगा तथा नए बाजारों में दस्तक दी जाएगी।

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