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बंगाल में नई शुरुआत: शुभेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री, भारतीय राजनीति का सबसे महत्वपूर्ण बदलाव

अमर उजाला Published by: Pavan Updated Sat, 09 May 2026 08:26 AM IST
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बंगाल में नई शुरुआत - फोटो : ANI
शुभेंदु अधिकारी का पश्चिम बंगाल में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री के रूप में चुना जाना महज एक औपचारिक घोषणा नहीं, बल्कि राज्य में एक नई शुरुआत का संकेत है। यह घटना इसलिए भी ऐतिहासिक है, क्योंकि भाजपा ने पश्चिम बंगाल में अपनी राजनीतिक यात्रा तकरीबन शून्य से शुरू की थी। लेकिन, पिछले एक दशक में उसने अपने संगठन और जनाधार का जिस तरह से विस्तार किया, वह भारतीय राजनीति के सबसे महत्वपूर्ण बदलावों में गिना जाएगा।


बंगाल में इस उभार के केंद्र में अगर किसी एक नेता का नाम प्रमुखता से लिया जाएगा, तो वह शुभेंदु अधिकारी ही होंगे। यह शुभेंदु ही हैं, जो 34 वर्षों के वामपंथी शासन के बाद 2011 में सत्ता में आईं ममता बनर्जी को उनके गढ़ में चुनौती देकर और नंदीग्राम से लेकर भवानीपुर तक सीधी लड़ाई में उन्हें परास्त कर पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के नतीजों का सबसे अहम चेहरा बनकर उभरे। हालांकि, उनके लिए यहां तक का सफर आसान नहीं था।


पश्चिम बंगाल के बारे में कहा जाता है कि जो सड़क जीत लेता है, वह चुनाव जीत लेता है। पिछले करीब पांच वर्षों से शुभेंदु पूरी आक्रामकता के साथ बंगाल की सड़कों से लेकर विधानसभा तक दिखे हैं, शायद यही वजह है कि जनता ने इस बार उन पर भरोसा जताया है। दूसरी ओर, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और महिला असुरक्षा जैसे मुद्दों पर ममता सरकार की नाकामियों ने भी उनके लिए जगह तैयार की। लिहाजा, आज जब वह मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे, तो  औपचारिक रूप से उस परिवर्तन का चेहरा भी बनेंगे, जिसका वादा भाजपा वर्षों से करती आ रही है।


बंगाल लंबे समय से चुनावी हिंसा और दलगत टकराव के लिए बदनाम रहा है। ऐसे में, उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि नई सरकार प्रतिशोध की राजनीति में न उलझे, क्योंकि ऐसा होने पर परिवर्तन का विचार ही कमजोर होगा। कभी देश का औद्योगिक केंद्र रहा यह राज्य अब निवेश आकर्षित करने में दूसरे राज्यों से काफी पीछे छूट चुका है।


जाहिर है कि नई सरकार के सामने ठोस आर्थिक सुधारों की राह पर बढ़ने की भी चुनौती होगी। इसमें विपक्ष की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। चुनावी हार-जीत स्थायी नहीं होती। ममता बनर्जी बड़ी नेता हैं, लेकिन उनकी पार्टी को लोकतंत्र की सीमाओं में रहकर ही विपक्ष की भूमिका निभानी होगी। बंगाल ने हमेशा देश की राजनीति को दिशा दी है। अब देखना यह होगा कि शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में यह राज्य परिवर्तन का कौन-सा नया मॉडल प्रस्तुत करता है।

 
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