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Tourism: पड़ोसी पर्यटन स्थलों में भारतीय पर्यटकों को लुभाने की होड़; हम विदेशी पर्यटकों को कैसे आकर्षित करें?

जयंतीलाल भंडारी
Updated Thu, 14 Dec 2023 07:19 AM IST

सार

यूरोपीय संघ और अमेरिका के वीजा के लिए प्रतीक्षा अवधि लंबी होने से दक्षिण-पूर्व एशियाई देश विदेशी मुद्रा की कमाई के वास्ते भारतीय पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए नए सिरे से प्रयास कर रहे हैं। भारतीयों का विदेश यात्रा की ओर तेजी से बढ़ता रुझान घरेलू पर्यटन के लिए एक बड़ा नुकसान है और विदेशी मुद्रा कोष घटाने वाला भी है। अब भी दुनिया के कुल विदेशी पर्यटकों का दो फीसदी से भी कम हिस्सा ही भारत के खाते में आ रहा है।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया


विदेशी पर्यटन से जुड़ी दुनिया की प्रमुख एजेंसी बर्नस्टीन की रिपोर्ट-2023 के मुताबिक, 2019 में भारतीयों ने विदेश यात्राओं में करीब 38 अरब डॉलर खर्च किए थे और दुनिया में विदेशी पर्यटन के रूप में भारत का 10वां स्थान था, जबकि इस मामले में वर्ष 2027 तक हम दुनिया में पांचवें स्थान पर होंगे। दरअसल, इस समय भारतीयों द्वारा विदेश में बढ़ते हुए पर्यटन के लिए जो प्रमुख कारण दिखाई दे रहे हैं, उनमें मध्य वर्ग की तेजी से बढ़ती क्रय शक्ति व भारतीयों में विदेश यात्रा की बढ़ती ललक शामिल है। 


हाल ही में श्रीलंका, थाईलैंड और मलयेशिया ने अपने पर्यटन उद्योग एवं विदेशी मुद्रा की कमाई बढ़ाने के मद्देनजर यहां के पर्यटकों को तेजी से आकर्षित करने के लिए वीजा मुक्त प्रवेश की पहल की है। वहीं ऑस्ट्रेलिया और रूस ने भी वीजा संबंधित प्रक्रियाएं सरल बना दी हैं और अधिक से अधिक पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए ई-वीजा की शुरुआत की है। 


गौरतलब है कि यूरोपीय संघ और अमेरिका के वीजा के लिए प्रतीक्षा अवधि लंबी होने से दक्षिण-पूर्व एशियाई देश विदेशी मुद्रा की कमाई के वास्ते भारतीय पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए नए सिरे से प्रयास कर रहे हैं। भारतीयों का विदेश यात्रा की ओर तेजी से बढ़ता रुझान घरेलू पर्यटन के लिए एक बड़ा नुकसान है और विदेशी मुद्रा कोष घटाने वाला भी है। अब भी दुनिया के कुल विदेशी पर्यटकों का दो फीसदी से भी कम हिस्सा ही भारत के खाते में आ रहा है।


दुनिया में सबसे अधिक विदेशी पर्यटक मुख्यतः फ्रांस, स्पेन, अमेरिका, चीन और इटली जाते हैं। भारत के कई ऐसे आकर्षक पर्यटन केंद्र हैं, जो इसे विदेशी पर्यटकों की संख्या के मद्देनजर प्रमुख पर्यटन प्रधान देशों में स्थान दिला सकते हैं। देश में यूनेस्को धरोहर स्थलों की कोई कमी नहीं है। भारत की संस्कृति, संगीत, हस्तकला, खानपान से लेकर नैसर्गिक सुंदरता हमेशा से विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करती रही हैं। 


इसमें कोई दो मत नहीं हैं कि पिछले एक दशक में देश में विदेशी पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए पर्यटन के व्यापक बुनियादी ढांचे और अन्य पर्यटन सुविधाओं को नई वैश्विक पर्यटन सोच के साथ आकार दिया गया है। पर्यटन बजट में लगातार वृद्धि की गई है।  चालू वित्त वर्ष 2023-24 के केंद्रीय बजट में पर्यटन के लिए 2,400 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। पिछले वर्ष की तुलना में यह राशि 18.24 प्रतिशत अधिक है। 


खास बात यह भी है कि इस वर्ष जी-20 की अध्यक्षता के दौरान जी-20 के कार्यसमूह की 80 से अधिक विभिन्न बैठकों में हिस्सा लेने भारत आए विदेशी मेहमानों को देश के पर्यटक स्थलों का भ्रमण करवाकर भारत के बेजोड़ पर्यटन केंद्रों के वैश्विक प्रचार-प्रसार के अभूतपूर्व मौके का पूरा फायदा सरकार ने उठाया है। इन सबके साथ-साथ मजबूत सरकार और दुनिया भर में बढ़ती हुई आर्थिक और राजनीतिक प्रतिष्ठा के कारण अब भारत में  विदेशी पर्यटकों के कदम बढ़ने की नई संभावनाएं  दिखाई दे रही हैं।
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भारत के पर्यटन क्षेत्र को अधिक जीवंत बनाने के लिए ऐसी रणनीति के साथ आगे बढ़ना होगा, जिससे जहां विदेश जाने वाले भारतीय पर्यटक घरेलू पर्यटन को अधिक लाभप्रद और सुगम अनुभव करें, वहीं विदेशी पर्यटकों के कदम भी भारत की ओर तेजी से बढ़ने लगें। इसके लिए केंद्र सरकार, राज्यों और स्थानीय निकायों को पर्यटन विकास के लिए समन्वित रूप से साथ मिलकर काम करना होगा।


हम उम्मीद करें कि देश में भी विदेशी पर्यटकों को रिझाने के लिए वीजा नीति उदार बनाई जाएगी और अल्प अवधि में बड़ी संख्या में वीजा निर्गम करने के लिए एक ठोस प्रशासनिक ढांचा तैयार किया जाएगा। तभी देश  2030 तक विदेशी पर्यटकों से 56 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा अर्जित करने और  2047 तक एक लाख करोड़ डॉलर की पर्यटन अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य को पा सकेगा।

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