जब मेरी पत्नी का निधन हुआ, तो मैं एक वर्ष तक बहुत परेशान रहा। उस समय सब चाहते थे कि मैं दूसरी शादी कर लूं, लेकिन मैंने अपने दिल की सुनी, और तय किया कि शादी नहीं करूंगा। हर तरफ से मैं उस वक्त लोगों के विचारों के दबाव में दब रहा था, लेकिन मैंने उन लोगों को कहा कि मेरा साथी शहनाई है। एक रात मैं गहरे ध्यान में था, मुझे कहीं से कुछ सुगंध आ रही थी, यह एक अवर्णनीय सुगंध थी, कुछ-कुछ चंदन और चमेली जैसी। मैंने सोचा कि यह गंगा की सुगंध है, लेकिन सुगंध और अधिक तीव्र हो गई।
जब मैंने अपनी आंखें खोलीं, तो बालाजी मेरे ठीक बगल में खड़े थे, बिल्कुल वैसे ही जैसे उन्हें चित्रित किया गया है। उस क्षण मुझे एहसास हुआ कि ईश्वर किसी धर्म को नहीं जानता, ईश्वर केवल मानव जाति के हैं। बनारस में बालाजी और मंगला गौरी का मंदिर है-बालाजी तक पहुंचने के लिए आपको सीढ़ियों की मदद से थोड़ा नीचे जाना होगा, लेकिन मंगला गौरी थोड़ी ऊंचाई पर हैं। मैं आजकल वहां नहीं जा पाता।
मुझे अमेरिका में रहने को कहा गया, लेकिन मैंने कहा, वाराणसी वह जगह है, जहां गंगा बहती है, जहां मैं भगवान बालाजी के लिए शहनाई बजा सकता हूं। मैं अपने घर पर रहूंगा, कहीं और नहीं। मेरे पूर्वज बालाजी मंदिर में कार्यक्रम पेश करते थे। उन्हें पूरे महीने के लिए 35 या 40 रुपये मिलते थे, और जब मेरी दादी कार्यक्रम करती थीं, तो उन्हें 14 आने मिलते थे। एक बार इराक के एक मौलाना से मेरी बहस हुई थी। उसने कहा कि संगीत ईशनिंदा है, शैतान का जाल है, और तुम्हें इसमें नहीं पड़ना चाहिए। मैंने उनसे कहा, मौलाना, मैं बस इतना चाहता हूं कि आप निष्पक्ष रहो। फिर मैंने गाना शुरू किया और जब मैंने गाना खत्म किया, तो मैंने उनसे पूछा कि क्या यह ईशनिंदा है। इसे किस दृष्टि से ईशनिंदा कहा जाएगा? वह अवाक रह गए, उनके पास कहने को कुछ नहीं बचा था। मैंने उनसे कहा कि ऐसी गलतियों में न पड़ें। मैंने उनसे पूछा कि क्या राग में ईश्वर का नाम लेना गलत है। हर कोई अलग-अलग सोचता है।
सूत्र: एक बार और प्रयास करें
हमारी सबसे बड़ी कमजोरी हार मान लेना है। सफल होने का सबसे पक्का तरीका हमेशा एक बार और प्रयास करना है। जहां आप हैं, वहीं से शुरुआत करें। जो आपके पास है, उसका इस्तेमाल करें। जो आप कर सकते हैं, वह करें। याद रखें, यदि संघर्ष नहीं होगा, तो प्रगति भी नहीं होगी।