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अंतरराष्ट्रीय: जो भारत और मालदीव को बांधता है, मुइज्जू के रुख में बदलाव इस वास्तविकता का प्रतीक

सुजन चिनॉय Published by: शिव शुक्ला Updated Wed, 23 Jul 2025 07:13 AM IST

सार

प्रधानमंत्री मोदी की मालदीव यात्रा और भारत को लेकर मुइज्जू के रुख में आया बदलाव उस वास्तविकता का प्रतीक है, जो दोनों देशों को बांधती है।
 
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मुइज्जू और एस जयशंकर - फोटो : amarujala.com


गौरतलब है कि मुइज्जू राष्ट्रपति चुनाव से पहले तथाकथित ‘इंडिया आउट’ अभियान से जुड़े थे, लेकिन उन्होंने ही दिसंबर 2023 में दुबई में कॉप28 के दौरान मोदी से मुलाकात के बाद आधिकारिक बयान में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने, आर्थिक सहयोग और संपर्क विकसित करने की बात की। दोनों पक्ष एक कोर ग्रुप बनाने पर भी सहमत हुए थे। इस बीच मीडिया रिपोर्टों में मुइज्जू की उस टिप्पणी को खूब प्रचारित किया गया, जिसमें उन्होंने भारतीय सेना के उन तकनीकी कर्मियों को वापस बुलाने की बात कही थी, जो डोर्नियर विमान और भारत द्वारा उपहार में दिए गए दो हेलिकॉप्टरों का परिचालन कर रहे थे। मार्च 2024 तक, दोनों पक्षों ने इस मुद्दे को चतुराई से सुलझा लिया था।


जून 2024 में मोदी के शपथ ग्रहण समारोह के लिए मुइज्जू की भारत यात्रा और उसके बाद अक्तूबर में उनकी राजकीय यात्रा अत्यधिक सफल रही। इस दौरान मुइज्जू ने न केवल आर्थिक और समुद्री सुरक्षा साझेदारी के लिए संयुक्त विजन दस्तावेज को अंतिम रूप दिया, बल्कि इस बात को भी दोहराया कि रक्षा व समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में भारत एक महत्वपूर्ण भागीदार देश है। भारत 1981 से ही मालदीव को खाद्यान्न और निर्माण सामग्री समेत कई आवश्यक वस्तुएं प्रदान करता रहा है।


उल्लेखनीय है कि 2024 की पहली तिमाही में मालदीव का ऋण भार असामान्य रूप से अधिक था। इसी पृष्ठभूमि में भारत ने 40 करोड़ डॉलर, 3,000 करोड़ रुपये की आपातकालीन बजटीय सहायता के साथ-साथ 10 करोड़ डॉलर मूल्य के ट्रेजरी बिलों के ब्याज-मुक्त रोल-ओवर के लिए एक मुद्रा विनिमय समझौता किया। इस वर्ष भी, मालदीव सरकार के अनुरोध पर, भारतीय स्टेट बैंक ने मालदीव के वित्त मंत्रालय द्वारा जारी पांच करोड़ डॉलर के सरकारी ट्रेजरी बिल को एक और वर्ष के लिए स्वीकार कर लिया है। ‘सबका साथ, सबका विकास’ केवल एक नारा नहीं है; यह भारत के अपने पड़ोस के साथ जुड़ाव का मार्गदर्शक सिद्धांत है।

बीते वर्ष कई उच्चस्तरीय संपर्कों ने मोदी की यात्रा की नींव रखी है। मालदीव के विदेश और रक्षा मंत्रियों के साथ-साथ मालदीव मजलिस के अध्यक्ष व अन्य प्रतिनिधिमंडलों ने भी भारत का दौरा किया है। भारतीय विदेश मंत्री ने भी अगस्त 2024 में मालदीव की यात्रा की थी। पिछले साल मुइज्जू की यात्रा के दौरान, दोनों पक्षों ने रक्षा और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की थी, जिसमें मालदीव राष्ट्रीय रक्षा बल (एमएनडीएफ) की निगरानी क्षमता को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया था। इसमें रडार प्रणाली और अन्य उपकरण देने की व्यवस्था भी शामिल थी।


संयुक्त विजन दस्तावेज में भारत द्वारा मालदीव की जरूरतों के अनुसार क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण सहित जल सर्वेक्षण मामलों पर मालदीव के समर्थन की भी बात कही गई थी। दोनों पक्ष आईयूयू मछली पकड़ने, ड्रग तस्करी व आतंकवाद जैसी चुनौतियों से निपटने, मालदीव के रक्षा बलों के प्रशिक्षण, हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता व समृद्धि तथा जल-सर्वेक्षण व आपदा कार्रवाई में सहयोग बढ़ाने के लिए साथ काम करने पर भी सहमत हुए थे। वह इस बात पर भी सहमत हुए थे कि भारत की सहायता से उथुरु थिला फल्हू (यूटीएफ) में चल रही एमएनडीएफ ‘एकथा’ बंदरगाह परियोजना, एमएनडीएफ की परिचालन क्षमताओं को बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान देगी। मुइज्जू की भारत यात्रा व मोदी की मालदीव यात्रा के बीच, भारत के दृष्टिकोण में एक स्पष्ट बदलाव आया है, जो सागर (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) से महासागर (क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति) में परिणत हो गया है।  


भारत हमेशा मालदीव के साथ खड़ा रहा है। कोविड-19 के दौरान टीके, बजटीय सहायता और विशेष ‘एयर ट्रैवल बबल’ प्रदान किया था। बीते वर्ष लाल सागर संकट में मालदीव को रमजान की पूर्व संध्या पर तुर्किये से खाद्य सामग्री मिलने में देरी हुई थी। भारत ने ही उसको चावल, चीनी और प्याज के निर्यात को मंजूरी देकर इस द्वीपीय पड़ोसी  को समस्या से उबरने में मदद की थी, जबकि भारत से इन वस्तुओं के निर्यात पर विश्वव्यापी प्रतिबंध लगा हुआ था। कुछ वास्तविकताएं भारत और मालदीव को व्यावहारिक और तथ्यात्मक स्तर पर एक साथ बांधती हैं। पिछले साल से बन रही आपसी सद्भावना के आधार पर मोदी की यात्रा दोनों देशों के बीच सुरक्षा और लोगों के आपसी सहयोग को और मजबूत करेगी।
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 (लेखक पूर्व राजदूत हैं और वर्तमान में मनोहर पर्रिकर रक्षा अध्ययन एवं विश्लेषण संस्थान के महानिदेशक हैं।)

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