एक बार महात्मा गांधी ने कहा था, 'नेतृत्व लोगों को साथ लेकर चलने का नाम है।’ बापू की यह बात भारतीय राजनीति में लोगों ने सुनी तो बहुत, लेकिन इस पर शायद ही किसी ने अमल किया। संभवतः पहली बार नरेंद्र मोदी ने बापू के इस संदेश का अक्षरशः पालन किया है। कनेक्ट विद पीपुल नरेंद्र मोदी के जीवन का मूल मंत्र रहा है। अभी से नहीं, छात्र और संघ जीवन से ही और उसके बाद राजनीतिक जीवन में भी। लोगों से जुड़ने और समाज की चेतना को झकझोरने का काम मोदी के व्यक्तित्व का हिस्सा बन गया है। लोकसभा चुनाव से पहले जहां कांग्रेस समेत पूरा विपक्ष नकारात्मक नारे और मुद्दे गढ़ रहा है, वहीं मोदी ने ‘मैं भी चौकीदार’ नामक सामाजिक आंदोलन खड़ा कर पूरे देश को उसका भागीदार बना दिया है। केवल दो दिनों में लाखों लोगों ने इससे खुद को जोड़ लिया है। इसमें केवल भाजपा के ही नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग और हर क्षेत्र के लोग शामिल हैं। यह चुनाव में जा रहे देश को खुद की जिम्मेदारियों का बोध कराने और एक दूसरे को अच्छे कामों के लिए प्रेरित करने का सहज प्रयास है।
जब मोदी ने ‘मैं भी चौकीदार’ नाम का हैसटैग डालकर ट्वीट किया तो साथ में यह भी लिखा- 'आपका चौकीदार दृढ़ता से खड़ा है और देश की सेवा कर रहा है। लेकिन वह इस काम में अकेले नहीं है। हर वह आदमी उसके साथ खड़ा है, जो भ्रष्टाचार, गंदगी और सामाजिक बुराइयों से लड़ रहा है। आज हर भारतीय कह रहा है, 'मैं भी चौकीदार’। मोदी ने ‘मैं भी चौकीदार' का आह्वान इसीलिए किया, ताकि देश की जनता यह माने कि जो भी मोदी सरकार की उपलब्धि है, वह व्यक्ति नरेंद्र मोदी की नहीं, बल्कि हर नागरिक की उपलब्धि है।
वर्ष 2014 में जब मोदी प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार लाल किले से देश को संबोंधित कर रहे थे, तब भी उन्होंने कहा था कि बापू का सपना था कि देश में स्वच्छता का आंदोलन सबके जीवन का हिस्सा बने और वह बन गया। मोदी ने जिस तरह खुद आगे बढ़ हाथ में झाड़ू लिए सड़क, नाले-नदी और पार्कों की सफाई का अभियान चलाया, उससे पूरा देश एक साथ जाग्रत हो उठा।
यह बेहद राहत की बात है कि देश का नागरिक विपक्षी पार्टियों के नकारात्मक रवैये को गले से नीचे नहीं उतरने देता, क्योंकि देश का नागरिक यह जान गया है कि कुछ पार्टियां यही चाहती हैं कि भारत कमजोर और अन्य बड़े राष्ट्रों का पिछलग्गू बना रहे, ताकि वे कभी मजहब, कभी जाति, तो कभी अमीरी-गरीबी के नाम पर चुनाव जीतते रहें। वे चाहते ही नहीं कि भारतीयों का स्वामिमान जगे।
‘मैं भी चौकीदार’ भारत की समस्त बुराइयों को जड़ से उखाड़ फेंकने का एक सामाजिक अभियंत्र है। मोदी जी ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ हम सब चौकीदार, यानी देश में न कोई भ्रष्टाचार करेगा और न कोई इसको बढ़ावा देगा। मोदी सरकार के छोटे-छोटे फैसलों ने हजारों करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार पर पूरी तरह रोक लगा दी। यदि लोग फैसला कर लें और भ्रष्टाचार के प्रति चौकीदार की भूमिका में आ जाएं, तो फिर भारत उन देशों की श्रेणी में खड़ा हो जाएगा, जिसे लोग आज इकोनामिक सुपर पावर कहते हैं। इसी तरह यदि देश के नागरिक गंदगी, बलात्कार, चोरी, छुआछुत और अन्य सामाजिक बुराइयों के खिलाफ भी चौकीदार की भूमिका में खड़े हो जाते हैं, तो देश की तस्वीर बदल सकती है।
यह राजनीतिक नहीं, सकारात्मक सोच पर आधारित एक सामाजिक अभियान है। यह चुनाव जीतने के उद्देश्य से गढ़ा गया नारा नहीं, लोगों के दिल जीतने का अभियान है। इसकी गूंज सिर्फ चुनाव तक ही सुनाई नहीं देगी, आने वाले कई वर्षों तक यह अभियान चलता रहेगा और देश का भविष्य नए तरीके से लिखा जाएगा।