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माउंट एवरेस्ट: हर वर्ष कुछ मिलीमीटर बढ़ रही ऊंचाई; क्या ऐसे ही बढ़ता जाएगा नेपाल का सागरमाथा?

रॉबिन जॉर्ज एंड्र्यूज Published by: शुभम कुमार Updated Sun, 20 Oct 2024 05:42 AM IST

सार

माउंट एवरेस्ट: दुनिया का सबसे ऊंचा पर्वत माउंट एवरेस्ट, जिसे नेपाल में सागरमाथा कहा जाता है, हर वर्ष कुछ मिलीमीटर ऊंचा हो रहा है। क्या यह अनंत तक यों ही बढ़ता जाएगा?
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माउंट एवरेस्ट - फोटो : Freepik


89,000 साल पहले एक शक्तिशाली नदी ने पास की एक और नदी को अपने में मिला लिया। एवरेस्ट का निर्माण लगभग 4.5 करोड़ वर्ष पहले शुरू हुआ था, जब टेक्टोनिक प्लेट (जिस पर भारत टिका हुआ है) यूरेशियन प्लेट से टकराई और फिर उसके नीचे धंसने लगी। 


हिमालय का निर्माण

भूपटल एक विशाल पैमाने पर मुड़ा और उखड़ गया, जिससे हिमालय का निर्माण हुआ। पृथ्वी की ऊपरी सतह (पपड़ी) कठोर लग सकती है, लेकिन ऐसा नहीं है। जब कोई भारी वस्तु, जैसे बर्फ की चादर या पर्वत शृंखला, इसे नीचे की ओर खींचती है, तो वह नीचे की ओर झुक जाती है। लेकिन नीचे का मेंटल उछालदार है, जो ढीली हुई परत को ऊपर की ओर धकेलता है। जब भूपटल न तो ऊपर उठता है और न ही डूबता है, तो इसे आइसोस्टेटिक संतुलन कहा जाता है। 


एवरेस्ट को न तो सिकुड़ना चाहिए और न ही बढ़ना चाहिए। लेकिन इसकी ऊंचाई से पता चलता है कि कोई चीज टेक्टोनिक पैमाने पर असंतुलन पैदा कर रही है। दरअसल, इसमें अरुण नदी की भूमिका है। अरुण घुमावदार मार्ग अपना कर उत्तरी हिमालय के साथ चलते हुए अचानक मुड़ जाती है और एवरेस्ट के पास एक रिज को काट देती है। इससे पता चलता है कि नदी के ऊपरी और निचले हिस्से हमेशा एकीकृत नहीं थे, किसी घटना ने उन्हें एक होने के लिए मजबूर किया। 


अध्यन में ये बाती आई सामने

अध्ययन से पता चला कि लगभग 89,000 साल पहले कोसी नदी का एक नेटवर्क हिमालय में पीछे की ओर कटाव करता हुआ अरुण तक पहुंचा और उसमें विलीन हो गया। उथल-पुथल भरे मेंटल समुद्र ने पतली परत को आसमान की ओर धकेल दिया, जिससे कई चोटियां ऊपर उठ गईं और एवरेस्ट की ऊंचाई 165 फुट तक बढ़ गई। तभी से यह पर्वत हर साल बढ़ रहा है। लेकिन भूविज्ञान के अनुसार यह हमेशा ऐसे ही जारी नहीं रहेगा। संतुलन जब दूसरी ओर झुकेगा, तब इसकी ऊंचाई कम भी हो सकती है, जैसा सभी पर्वत शृंखलाओं में होता है। यह वैसा ही है, मानो पृथ्वी सांस ले रही हो।
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