फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एक तीर से कई निशाने

Sun, 09 Oct 2016 07:38 PM IST
सुरेंद्र कुमार
विज्ञापन
सुरेंद्र कुमार
विज्ञापन
वर्ष 2014 के चुनाव प्रचार के दौरान जब नरेंद्र मोदी ने 56 इंच की छाती का दावा किया था, तब विपक्ष, खासकर कांग्रेसी नेताओं ने उनका मजाक उड़ाया था। नियंत्रण रेखा के पार पाक अधिकृत कश्मीर में बिहार एवं डोगरा रेजीमेंट के विशेष प्रशिक्षित कमांडो द्वारा भारत की सर्जिकल स्ट्राइक के बाद शायद ही किसी को शक होगा कि असाधारण नेतृत्व के गुणों के अलावा मोदी के पास 56 इंच की छाती है। कारगिल युद्ध के बाद पहली बार पूरा देश एकजुट है। यहां तक कि मोदी के प्रबल विरोधी राहुल गांधी तक ने अनिच्छा से स्वीकार किया कि मोदी ने वैसा काम किया है, जो एक प्रधानमंत्री को करना चाहिए।
विज्ञापन


यह खुफिया जानकारियों पर आधारित, बेहतर तालमेल के साथ सावधानीपूर्वक किया गया ऑपरेशन था, जिसे बिल्कुल सफाई से अंजाम दिया गया। मोदी के कुछ अति उत्साही प्रशंसक मोदी के नेतृत्व की तुलना इंदिरा गांधी से करने लगे हैं। इंदिरा गांधी ने तब बांग्लादेश के जन्म में मदद की, जब एक भी मुस्लिम देश भारत के साथ खड़ा नहीं था, और दुनिया के सबसे ताकतवर देश ने सातवां बेड़ा भेजने की धमकी देकर भारत को डराया भी था, इसलिए वह एक अलग ही उपलब्धि थी। हालांकि हाल के दिनों में मोदी ने दिखाया है कि अगर उस तरह का कोई संकट आता है, तो वह भी इंदिरा गांधी से कम नहीं हैं!

वर्ष 1947 के बाद से भारत के सभी प्रधानमंत्रियों ने पाकिस्तान के साथ बेहतर रिश्ते बनाए रखने की कोशिश की, लेकिन मोदी की तरह अन्य किसी भी प्रधानमंत्री की राजनीतिक व व्यक्तिगत प्रतिष्ठा दांव पर नहीं लगी थी। दिसंबर, 2015 में नवाज शरीफ के जन्मदिन पर मोदी लाहौर गए थे। पर उसके एक हफ्ते बाद ही पठानकोट एयरबेस पर आतंकवादी हमला हुआ, जो मोदी के लिए एक बड़ा झटका था। इसने मोदी के आलोचकों को हथियार थमा दिया कि उनकी पाकिस्तान नीति बेकार और जमीनी हकीकत से परे है। उसके बाद पाक संसद में नवाज शरीफ द्वारा कश्मीर में कथित मानवाधिकार उल्लंघन की बात से निराश मोदी का मोहभंग हो गया। नवाज शरीफ ने हिजबुल के कमांडर बुरहान वानी को, जिस पर दस लाख रुपये का इनाम था, महान शहीद भी बताया। तभी मोदी ने पाकिस्तान के खिलाफ सख्त रुख अपनाने का फैसला किया।
विज्ञापन


विधिपूर्वक मोदी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आतंकवाद की बीमारी के प्रति संवेदनशील बनाते हुए और बार-बार आतंक के स्रोत के बारे में बताते हुए पाकिस्तान को अलग-थलग करने की कोशिश की। उन्होंने अपने राजनयिकों को आक्रामक रूप से पाकिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघन का मुद्दे उठाने के लिए कहा। उन्होंने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर बलूचिस्तान में पाकिस्तान सरकार द्वारा की जाने वाली ज्यादतियों का जिक्र अनायास नहीं किया था, बल्कि यह उनकी रणनीति का हिस्सा था।

मोदी ने जी-20 शिखर सम्मेलन और आसियान की बैठक में भी जोर देकर कहा कि मात्र एक देश है, जो आतंक का निर्यात करता है और आतंकवाद का अपनी राष्ट्रनीति की तरह इस्तेमाल करता है। पहली बार भारतीय राजनयिक ने जेनेवा में मानवाधिकार परिषद में बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघन का मुद्दा उठाया।

निश्चित रूप से इसका आशय यह था कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद का केंद्र है। इतने बेहतर ढंग से यह कूटनीतिक आक्रमण किया गया कि इसका लाभ मिलने लगा। अमेरिकी संसद में दो सांसदों ने पाकिस्तान को आतंकवादी देश घोषित करने के लिए प्रस्ताव पेश किया। यूरोपीय संघ के कुछ सदस्यों ने मांग की है कि पाकिस्तान पर आर्थिक प्रतिबंध लगाया जाए। चीन एवं इस्लामिक सहयोग संगठन के कुछ सदस्यों को छोड़कर पाकिस्तान के बहुत कम मित्र बचे हैं। इस्लामाबाद में नवंबर में प्रस्तावित सार्क सम्मेलन रद्द हो गया, जिसमें भारत सहित चार देशों ने जाने से मना कर दिया।

उड़ी में सैन्य शिविर पर हुआ आतंकवादी हमला पाकिस्तान की ओर से बेहद भड़काऊ घटना थी। जाहिर है, पाकिस्तान ने मोदी की पलटवार करने की क्षमता को कम करके आंका था। संकट के इन क्षणों में मोदी ने प्रधानमंत्री एवं राष्ट्रनायक की छवि पेश की है। सर्जिकल स्ट्राइक के कुछ ही घंटों के बाद पाकिस्तान के डीजीएमओ को उसकी सूचना दी गई। हमारे जवानों ने पाक अधिकृत कश्मीर में सिर्फ आतंकी ठिकानों पर हमला किया, न कि पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों पर। इसने मोदी की राजनीतिक इच्छाशक्ति और हमारी सेना के पाकिस्तान की जमीन पर लड़ने की पेशेवर क्षमता को प्रदर्शित किया। सोनिया गांधी और अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं को सूचना देना विवेकपूर्ण था, जिसने राष्ट्रीय एकता की भावना पैदा करने में मदद की। लगता है, राजग ने जीएसटी प्रकरण से सबक सीख लिया है।

चतुर राजनेता और प्रखर कूटनीतिक के रूप में मोदी ने एक तीर से कई निशाने साधे हैं। पहला, पाकिस्तान के सैन्य व असैन्य नेतृत्व तथा आतंकवादियों को यह चेतावनी दी गई कि भारत पर हमले की सजा उन्हें जरूर मिलेगी। अगर पाकिस्तान नॉन-स्टेट ऐक्टर पर लगाम नहीं लगाता, तो यह काम भारत करेगा। दूसरा, यह चीन को भी संदेश है कि वह एक आतंकवादी देश का समर्थन करता है, जिसके आतंकी एक दिन उसे भी नहीं छोड़ेंगे। तीसरा, मोदी एक परिपक्व और जिम्मेदार विश्व स्टेट्समैन के रूप में उभरे हैं, जो भारतीय हितों की रक्षा करेंगे, लेकिन अपने पड़ोसी देशों के साथ तनाव बढ़ाने का उनका कोई इरादा नहीं है। और चौथा, इस स्ट्राइक के बाद मोदी की लोकप्रियता काफी बढ़ गई है, जो आगामी चुनावों में भाजपा को काफी फायदा पहुंचाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें