फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

महर्षि के तेज से दानव भस्म हो गए

Tue, 03 Sep 2013 07:58 PM IST
शिवकुमार गोयल
विज्ञापन
विज्ञापन
एक बार मानसरोवर के तट पर देवताओं ने विशाल यज्ञ का आयोजन किया। उस क्षेत्र में दैत्यों का आतंक था। अपने स्वभाव के अनुरूप वे सद्कर्मों में विघ्न डालते रहते थे। उनके उत्पात से बचने के लिए शांतिप्रिय लोग दूर-दराज के वनों में छिप जाते थे।
विज्ञापन


दानवों को जब देवताओं द्वारा किए जा रहे यज्ञ का पता चला, तो वे यज्ञस्थल पर पहुंचकर उपद्रव मचाने लगे। इंद्र को यह सूचना मिली, तो वह सेना लेकर यज्ञ की रक्षा करने पहुंच गए, लेकिन दानवों ने इंद्र की सेना को भी भागने के लिए विवश कर दिया।

कुछ दानवों ने यज्ञ के लिए घृत आदि सामग्री पहुंचाने वाली महिलाओं को अचानक घेर लिया और उनसे दुर्व्यवहार करने लगे। चारों ओर हाहाकार मच गया। आश्रमों से बाहर निकलकर ऋषियों ने कहा, दुष्ट दानव, महिलाएं साक्षात देवी स्वरूपा होती हैं। इनसे दुर्व्यवहार और कदाचार करने पर समझ लो कि तुम्हारे पापों का घड़ा भरने वाला है।
विज्ञापन


दानवों ने ऋषियों की बात अनसुनी कर उनके आश्रमों में भी उत्पात मचाना शुरू कर दिया। देवतागण तुरंत मुनि वशिष्ठ की शरण में गए। मुनि ने जब दानवों की करतूत सुनी, तो उन्होंने कहा, अब इन दानवों के पापों का घड़ा सचमुच भर चुका है।
विज्ञापन


वे तुरंत मानसरोवर तट पर पहुंचे। उनके तेज से तमाम दानव भस्म हो गए। यह देखकर सभी देवताओं ने राहत की सांस ली।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें