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मलयेशिया में मोदी: भारत की एक्ट ईस्ट नीति को नए सिरे से गति देने की कोशिश; द्विपक्षीय सहयोग की नई संभावनाएं

अमर उजाला Published by: पवन पांडेय Updated Tue, 10 Feb 2026 06:33 AM IST

सार

ऐसे वक्त में, जब वैश्विक शक्ति संतुलन तेजी से बदल रहा है, चीन व अमेरिका की प्रतिस्पर्धा हिंद-प्रशांत क्षेत्र को अनिश्चित बना रही है और आपूर्ति शृंखलाओं के पुनर्गठन की होड़ मची है, तब प्रधानमंत्री मोदी का मलयेशिया दौरा द्विपक्षीय सहयोग की नई संभावनाएं जगाता है।
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मलयेशिया में मोदी - फोटो : ANI


खास बात यह है कि मलयेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के निमंत्रण पर हुई यह यात्रा 2024 में दोनों देशों के बीच संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत करने के बाद पहली उच्च-स्तरीय यात्रा थी, जिसमें न केवल द्विपक्षीय व्यापार, रक्षा, सेमीकंडक्टर और डिजिटल सहयोग को नई गति दी गई है, बल्कि आतंकवाद विरोधी संकल्प और क्षेत्रीय स्थिरता पर भी साझा प्रतिबद्धता रेखांकित हुई है। भारत और मलयेशिया के संबंध ऐतिहासिक रूप से गहरे रहे हैं।


प्राचीन काल में समुद्री व्यापार, बौद्ध व हिंदू सांस्कृतिक प्रभाव और कालांतर में औपनिवेशिक दौर में भारतीय प्रवासियों की बड़ी उपस्थिति ने इन रिश्तों की नींव रखी। आज मलयेशिया में करीब 29 लाख भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जो वहां की अर्थव्यवस्था, राजनीति और समाज में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। इनके लिए ओसीआई (ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया) कार्ड की पात्रता बढ़ाए जाने और जल्द ही भारतीय यूपीआई सिस्टम मलयेशिया में शुरू होने की घोषणाएं अहम हैं। नहीं भूलना चाहिए कि मलयेशिया आसियान का एक प्रभावशाली सदस्य है।


भारत इस समय आसियान के साथ अपने मुक्त व्यापार समझौते में कुछ बदलाव लाने की कोशिश कर रहा है, जिसके लिए मलयेशिया का समर्थन अहम साबित हो सकता है। भारत लंबे समय से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नियम-आधारित व्यवस्था, समुद्री सुरक्षा और स्वतंत्र नौवहन का समर्थक रहा है। मलयेशिया के साथ रक्षा सहयोग और खुफिया साझेदारी मजबूत करना इसी रणनीति का हिस्सा है, जो चीन को सीधी चुनौती देने के बजाय संतुलन बनाने की भारतीय सोच को भी दर्शाता है।


भारत और मलयेशिया के बीच 2025 में द्विपक्षीय व्यापार 18.59 डॉलर तक पहुंच गया, जिसे और आगे बढ़ाने पर सहमति बनना अहम है। स्थानीय मुद्राओं में व्यापार पर बनी सहमति वैश्विक स्तर पर डॉलर पर निर्भरता घटाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। सेमीकंडक्टर क्षेत्र, जिसमें मलयेशिया पहले से ही एक मजबूत आधार रखता है, में सहयोग भारत की मेक इन इंडिया और डिजिटल इंडिया पहल को और सशक्त बना सकता है। जरूरी है कि प्रधानमंत्री मोदी के दौरे से निकले समझौते और संदेशों का समयबद्ध क्रियान्वयन हो, ताकि ये महज प्रतीकात्मक बनकर न रह जाएं।
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