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उत्तराखंड के जंगलों से संदेश : वे इसे महज एक कार्यक्रम मानने की भूल नहीं करेंगे

अनिल बलूनी Published by: अनिल बलूनी Updated Wed, 14 Aug 2019 01:44 AM IST
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मैन वर्सेज वाइल्ड के विशेष एपिसोड में बेयर ग्रिल्स और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - फोटो : यूट्यूब/डिस्कवरी चैनल इंडिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी डिस्कवरी चैनल के प्रसिद्ध एडवेंचर शो 'मैन वर्सेज वाइल्ड' के मेजबान बेयर ग्रिल्स के साथ उत्तराखंड के जिम कार्बेट पार्क के घने जंगल में चहलकदमी करते, नदी पार करते व हैरतअंगेज कारनामे करते दिखाई दिए। बिना सुरक्षा के जंगल में फिल्माया गया यह शो देश ही नहीं, अपितु 180 देशों में कौतूहल का विषय बना हुआ है। कार्यक्रम ने न केवल दुनिया भर में सुर्खियां बटोरीं, बल्कि सोशल मीडिया पर भी लगातार ट्रेंड करता रहा।

आमतौर पर कोई इसे एक बेहतरीन कार्यक्रम मानेगा, पर जो लोग प्रधानमंत्री मोदी को करीब से जानते हैं, वे इसे महज एक कार्यक्रम मानने की भूल नहीं करेंगे, क्योंकि उनके हर कदम के पीछे दूरदर्शी सोच, लंबी रणनीति होती है। आज पूरी दुनिया ग्लोबल वार्मिंग और लुप्तप्राय वन्यजीवों को लेकर चिंतित है। पेरिस जलवायु समझौते में हमने प्रधानमंत्री को विश्व का प्रतिनिधित्व करते हुए देखा है।



भारत का प्रकृति के साथ अटूट संबंध रहा है। जैसा कि प्रधानमंत्री मोदी ने भी इस शो में कहा कि भारत की संस्कृति का आधार ही ‘वसुधैव कुटुंबकम’ और ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः' है। प्रकृति की तो हम पूजा करते हैं, इसलिए यह हमारा दायित्व है कि हम इसका संरक्षण करें।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस शो के जरिये पर्यावरण और वन्य जीवों के संरक्षण के साथ-साथ इस दिशा में भारत के योगदान को रेखांकित करते हुए लोगों में जागरूकता फैलाने का जिम्मा खुद अपने कंधों पर लिया है। पर्यावरण की रक्षा में उनके योगदान के लिए संयुक्त राष्ट्र द्वारा उन्हें सर्वोच्च पर्यावरण पुरस्कार 'चैंपियंस ऑफ द अर्थ' अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है। निश्चित रूप से यह पर्यावरण एवं वन्य जीवों के संरक्षण के लिए दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के प्रधानमंत्री द्वारा उठाया गया एक सराहनीय कदम है।

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मैन वर्सेज वाइल्ड के विशेष एपिसोड में बेयर ग्रिल्स और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - फोटो : यूट्यूब/डिस्कवरी चैनल इंडिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी डिस्कवरी चैनल के प्रसिद्ध एडवेंचर शो 'मैन वर्सेज वाइल्ड' के मेजबान बेयर ग्रिल्स के साथ उत्तराखंड के जिम कार्बेट पार्क के घने जंगल में चहलकदमी करते, नदी पार करते व हैरतअंगेज कारनामे करते दिखाई दिए। बिना सुरक्षा के जंगल में फिल्माया गया यह शो देश ही नहीं, अपितु 180 देशों में कौतूहल का विषय बना हुआ है। कार्यक्रम ने न केवल दुनिया भर में सुर्खियां बटोरीं, बल्कि सोशल मीडिया पर भी लगातार ट्रेंड करता रहा।

आमतौर पर कोई इसे एक बेहतरीन कार्यक्रम मानेगा, पर जो लोग प्रधानमंत्री मोदी को करीब से जानते हैं, वे इसे महज एक कार्यक्रम मानने की भूल नहीं करेंगे, क्योंकि उनके हर कदम के पीछे दूरदर्शी सोच, लंबी रणनीति होती है। आज पूरी दुनिया ग्लोबल वार्मिंग और लुप्तप्राय वन्यजीवों को लेकर चिंतित है। पेरिस जलवायु समझौते में हमने प्रधानमंत्री को विश्व का प्रतिनिधित्व करते हुए देखा है।

भारत का प्रकृति के साथ अटूट संबंध रहा है। जैसा कि प्रधानमंत्री मोदी ने भी इस शो में कहा कि भारत की संस्कृति का आधार ही ‘वसुधैव कुटुंबकम’ और ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः' है। प्रकृति की तो हम पूजा करते हैं, इसलिए यह हमारा दायित्व है कि हम इसका संरक्षण करें।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस शो के जरिये पर्यावरण और वन्य जीवों के संरक्षण के साथ-साथ इस दिशा में भारत के योगदान को रेखांकित करते हुए लोगों में जागरूकता फैलाने का जिम्मा खुद अपने कंधों पर लिया है। पर्यावरण की रक्षा में उनके योगदान के लिए संयुक्त राष्ट्र द्वारा उन्हें सर्वोच्च पर्यावरण पुरस्कार 'चैंपियंस ऑफ द अर्थ' अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है। निश्चित रूप से यह पर्यावरण एवं वन्य जीवों के संरक्षण के लिए दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के प्रधानमंत्री द्वारा उठाया गया एक सराहनीय कदम है।

तीर्थाटन के लिए जाना जाने वाला उत्तराखंड अब एडवेंचर टूरिज्म और वन्य जीव संरक्षण के एक प्रमुख गंतव्य के रूप में स्थापित हो सकेगा। आने वाले कुछ महीने बताएंगे कि जिम कार्बेट के इस कार्यक्रम के वास्तविक उद्देश्य क्या थे और उसे कैसे हासिल किया जा रहा है। यहां कुछ अन्य घटनाओं का जिक्र करना प्रासंगिक होगा। इसी वर्ष मतदान और मतगणना के बीच प्रधानमंत्री ने केदारनाथ में एक गुफा में साधना की थी।

यह मजह एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं था, 2013 की प्रलंयकारी बाढ़ के बाद केदारनाथ में तीर्थयात्रियों की घटती संख्या को देखते हुए उठाया गया एक दूरगामी कदम था। प्रधानमंत्री द्वारा गुफा में ध्यान लगाने का परिणाम सबके सामने है। पिछले वर्ष जहां लगभग सात लाख तीर्थयात्री केदारनाथ धाम आए थे, वहीं इस वर्ष यह आंकड़ा 11 लाख को पार करने की उम्मीद है, जो एक रिकॉर्ड है।

उस गुफा की बुकिंग के लिए भी लोगों को महीनों इंतजार करना पड़ता है। पूरी दुनिया में उस गुफा के बारे में पूछताछ हो रही है। इससे न केवल पर्यटन बढ़ा है, बल्कि स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिल रहा है।

प्रधानमंत्री के प्रयासों से ही रिकॉर्ड टाइम में चारधाम को जोड़ने वाली ऑल वेदर रोड उत्तराखंड की भाग्य रेखा बनने वाली है। इससे राज्य का विकास और तेज हो सकेगा। भारतमाला परियोजना के तहत सड़कें बनाई जा रही है। कई रेल परियोजनाओं पर भी काम चल रहा है। उड़ान योजना से भी उत्तराखंड को जोड़ा गया है। पहाड़ से होने वाले पलायन को रोकने के लिए भी योजनाएं बनाई गई हैं। ये सभी कदम दर्शाते हैं कि मोदी उत्तराखंड के विकास के लिए कितने कृतसंकल्पित हैं।

-लेखक भाजपा मीडिया प्रभारी व राज्यसभा सांसद हैं।
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