इस बजट में वायदा और विकल्प अनुबंधों पर प्रतिभूति लेनदेन कर बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है। कुछ वित्तीय परिसंपत्तियों पर होने वाले अल्पकालिक लाभ पर अब 20 फीसदी कर लगेगा, जबकि पहले यह मात्र 15 फीसदी था। कुछ वित्तीय परिसंपत्तियों पर दीर्घकालिक लाभ पर अब 12.5 फीसदी कर लगेगा, जबकि पहले यह 10 फीसदी था। कुछ वित्तीय साधनों पर कर योग्य पूंजीगत लाभ पर छूट की सीमा एक लाख रुपये से बढ़ाकर 1.25 लाख रुपये सालाना कर दी गई है।
बजट घोषणा के बाद बॉन्ड और रुपये में गिरावट आई। भारतीय शेयर बाजार में भी गिरावट आई, एनएसई निफ्टी 50 सूचकांक में 1.8 फीसदी की गिरावट आई, लेकिन नुकसान कम हुआ। स्मॉल कैप और मिडकैप सूचकांक में तेज गिरावट देखी गई, लेकिन निचले स्तरों पर खरीदारी के कारण दिन के अंत तक इनमें भी गिरावट देखी गई।
उच्च आयकर छूट के साथ-साथ सोना, चांदी, मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक्स वस्तुओं पर आयात शुल्क में कमी, साथ ही महिलाओं के लिए रोजगार प्रोत्साहन योजनाओं और कार्यक्रमों से समग्र खपत को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। जबकि प्रत्यक्ष कर नीति में बदलाव से कई कमाने वालों के हाथ में कर चुकाने के बाद ज्यादा पैसे बच सकते हैं। रोजगार कार्यक्रमों पर खर्च से देश के युवाओं के हाथों में अधिक पैसा आ सकता है।
बजट घोषणाओं के बाद भारत की उपभोक्ता वस्तुओं की कंपनियों और दोपहिया वाहन निर्माताओं को लाभ हुआ। प्रमुख राज्यों में स्थित बुनियादी ढांचा कंपनियों को भी निवेश पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिली। सोने और चांदी पर शुल्क कटौती के कारण आभूषण कंपनियों के शेयरों में भी तेजी आई। बजट में कोई अतिरिक्त शुल्क की घोषणा नहीं किए जाने के बावजूद तंबाकू कंपनियों के शेयरों की कीमतें बढ़ गईं।
बजट में ‘एंजल टैक्स’ को खत्म करने से देश के स्टार्ट-अप सेक्टर को लाभ होगा। यह टैक्स स्टार्ट-अप द्वारा उचित बाजार मूल्य से अधिक मूल्यांकन पर जुटाए गए फंड पर लगाया जाता है। इससे देश में स्टार्ट-अप परिदृश्य को बढ़ावा मिलेगा।
रक्षा से लेकर रेलवे, प्रॉपर्टी डेवलपर्स से लेकर निर्माण कंपनियों तक के प्रमुख शेयरों में मुनाफा वसूली देखी गई, जो कि भविष्य के उज्ज्वल अनुमानों के कारण काफी ऊपर चढ़े थे। बजट में रियल एस्टेट पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स को कम किया गया है, लेकिन इंडेक्सेशन लाभ को हटा दिया गया है। यह एक ऐसा प्रावधान था, जो अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति के आधार पर कर देयता को कम करने की अनुमति देता था। परिणामस्वरूप रियल एस्टेट कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आई।
रेटिंग एजेंसियों ने राजकोषीय घाटे पर नियंत्रण रखने और उधार कम करने की घोषणाओं की सराहना की है। पूंजी बाजार पूंजीगत लाभ करों में वृद्धि, बायबैक (अपने बकाया शेयरों की खरीद) को कराधान के दायरे में लाने और प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) में वृद्धि से बहुत खुश नहीं था। कुल मिलाकर, यह बजट सकारात्मक है और यह अर्थव्यवस्था के विकास को बढ़ावा देगा, जिससे अंततः बाजारों को भी मदद मिलेगी।