महिलाओं के सशक्तिकरण के तमाम दावों के बावजूद मौजूदा समय में उनके खिलाफ हमले तेज हुए हैं और बाल तस्करी भी बढ़ी है। इन हालात से निपटने के लिए सरकार द्वारा की जा रही कोशिशों पर केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सचिव प्रेम नारायण से बातचीत...
महिलाओं और बच्चों के साथ अत्याचार और अमानवीय व्यवहार की घटनाएं आए दिन सुर्खियां बन रही हैं। क्या लगातार बढ़ती ऐसी घटनाओं पर लगाम कसने के लिए मंत्रालय के पास ठोस रोडमैप है?
राष्ट्रीय महिला आयोग और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की ओर से ऐसी घटनाओं पर नजर रखने के साथ ही अब हम महिलाओं के लिए विशेष हेल्पलाइन नंबर शुरू करने की तैयारी में हैं। जो महिलाएं प्रताड़ना या शोषण से गुजर रही हों, वे इस नंबर पर फोन कर अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगी। इस नंबर की देशव्यापी शुरुआत इस वित्त वर्ष के अंत तक हो जाएगी। यह हेल्पलाइन नंबर भविष्य में दक्षेस देशों की महिलाओं की शिकायत दर्ज करने के लिए भी इस्तेमाल किया जाएगा। इसी तरह मौजूदा चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 का इस्तेमाल भी अब दक्षेस देशों में किया जाएगा। इस नंबर पर गुमशुदगी, बाल श्रम, बाल अपराध समेत तमाम मामलों की जानकारियां दी जा सकती हैं।
बच्चों की तस्करी की घटनाएं कुछ राज्यों में तेजी से बढ़ी हैं। इन पर नजर रखने और बचाव अभियान को सफल बनाने के लिए मंत्रालय किस तरह का प्रयास कर रहा है?
पिछले कुछ समय से यह देखा जा रहा है कि बच्चों की तस्करी संगठित तरीके से हो रही है। खासतौर पर पश्चिम बंगाल और उत्तर पूर्वी राज्यों में इस धंधे ने जोर पकड़ लिया है। इसलिए मंत्रालय ने आधुनिक तकनीक से इस समस्या को काबू करने का निर्णय लिया है। बच्चों की तस्करी रोकने के लिए इस वर्ष एक नेशनल पोर्टल की शुरुआत ट्रैक चाइल्ड के नाम से होने वाली है। इसके जरिये बच्चों की गुमशुदगी और उसकी बरामदगी की जानकारी मिल सकेगी। पोर्टल के लिए फिलहाल तमाम राज्यों के पुलिस स्टेशनों, चाइल्ड केयर होम समेत अन्य जगहों से बच्चों की गुमशुदगी के आंकड़े इकट्ठे किए जा रहे हैं। इन सभी जानकारियों को वेबसाइट पर डाला जाएगा, ताकि किसी भी राज्य में इस पोर्टल का इस्तेमाल कर आसानी से बच्चों को खोजा जा सके। पायलट परियोजना के तौर पर पश्चिम बंगाल में इसके इस्तेमाल से सकारात्मक परिणाम नजर आए हैं।
महिलाओं-युवतियों पर एसिड हमले की बढ़ती बेहद गंभीर घटनाओं को रोकने के लिए मंत्रालय क्या कर रहा है?
एसिड हमले की बढ़ती घटनाओं में पीड़ित की मदद के लिए स्वास्थ्य मंत्री को एक चिट्ठी लिखी गई है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने कहा है कि ऐसे मामलों में पीड़ित का सरकारी और निजी अस्पतालों में मुफ्त इलाज होना चाहिए। फिलहाल यह प्रस्ताव स्वास्थ्य मंत्रालय के पास है। उन्हें ही इस योजना पर पहल करनी है।
आर्थिक दुर्बलता महिलाओं के उत्पीड़न का बड़ा कारण है, इस तसवीर को बदलने के लिए मंत्रालय क्या कदम उठाने जा रहा है?
मंत्रालय की ओर से राष्ट्रीय महिला कोष की स्थापना पहले ही हो चुकी है। इसका उद्देश्य गरीब महिलाओं को अपने पैरों पर खड़ा करना है। 12वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान इसका दायरा बढ़ाया जाएगा। अभी इसका एकमात्र दफ्तर दिल्ली में है, पर ज्यादा लोगों तक पहुंच बढ़ाने के लिए अगले पांच वर्षों में देश भर में इसके दफ्तर खोले जाएंगे। इस दौरान कोष के जरिये 100 करोड़ रुपये तक ऋण बांटने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि ज्यादा से ज्यादा गरीब महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाया जा सके।