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विचार: अकेलापन कोई महामारी नहीं, तलाशें ऐसा एकांत जहां हो अपने अस्तित्व की स्वतंत्रता पर गर्व

जेसिका ग्रोस Published by: शिव शुक्ला Updated Sun, 05 Jan 2025 06:53 AM IST

सार

इस वर्ष शहरी और डिजिटल शोर से दूर होकर उस एकांत को ढूंढें, जहां आप अपने अस्तित्व की स्वतंत्रता पर गर्व कर सकें।
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अकेलापन (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Meta AI


हालांकि मैं जानती हूं कि जंगल में यों अकेले रहना मुश्किल है और ऐसा करने की मेरी कोई मंशा भी नहीं। लेकिन मुझे अकेले समय बिताने का विचार आकर्षित करता है। लेकिन चिंता मुझे इस बात की है कि हम ऐसी संस्कृति बन गए हैं, जो एकांत के विचार को असहनीय और नकारात्मक मानती है। मैंने एक प्रख्यात लेखक का निबंध पढ़ा था, जिसमें बताया गया कि इंटरनेट ने परस्पर जुड़े एक ऐसे समाज का निर्माण किया है, जिसने एकांत ढूंढने की क्षमता ही खो दी है। मुझे लगता है कि एकांत की चाह रखने की भावना बिल्कुल सामान्य है, जो सभी की जिंदगी में कभी न कभी आती है। इसके लिए डॉक्टर को खोजने की जरूरत नहीं होती, इसे बस स्वीकारना होता है।


अकेलापन कोई महामारी नहीं है, लेकिन लोग इससे ऐसे घबराते हैं, मानो यह कोई महामारी हो। अकेलेपन का स्वास्थ्य पर भी बुरा असर बताया गया है। यहां तक कहा गया कि अकेलेपन और मृत्यु दर का संबंध एक दिन में पंद्रह सिगरेट पीने जैसा होता है। इस तरह के विचार दरअसल इतनी बार दोहरा दिए गए हैं, कि ये सत्य लगने लगते हैं। जबकि सच तो यह है कि एकांत पसंद करने और सामाजिक जुड़ाव में कमी, कमजोर सामाजिक समर्थन या समाज से अलग-थलग होने में अंतर है। एकांत की चाह रखना एक शारीरिक संकेत है कि हमें कुछ बेहतर संबंधों की जरूरत है। नए साल में मुझे उस संत-सरीखे एकांत की जरूरत महसूस हो रही है, तो इसका मतलब है कि मैं अकेलेपन को झेलने की ताकत खुद के भीतर पैदा करूंगी। अगर मैं ऐसा कर सकी, तो शायद मेरा एकांत भी एक खूबसूरत अनुभव बन सके। मैं उस शहरी व डिजिटल शोर से दूर होने की कोशिश करूंगी, जिसका फिलहाल मैं हर वक्त अनुभव करती हूं। मैं कोशिश करूंगी कि इस साल मैं भी अपनी स्वतंत्रता की भावना पर गर्व कर सकूं।

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