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बनाने भी दो यारो

Mon, 25 Aug 2014 08:40 PM IST
राजेंद्र शर्मा
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भाई मामला बहुत ही कन्फ्यूजनात्मक हो लिया है। भारत स्वतंत्रता के सड़सठ साल बाद भी भारतपने में अटका हुआ है या मेकओवर कर हिंदू राष्ट्र हो लिया है! और हिंदू राष्ट्र होने में भी कौन कम कनफ्यूजन है। कोई कह रहा है कि नरेंद्र भाई के आने के बाद इंडिया हिंदू राष्ट्र बनने के रास्ते पर चल पड़ा है, तो कोई कह रहा है कि चलने-वलने का कोई चक्कर नहीं है, हिंदू राष्ट्र तो कब का बना पड़ा है।
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भागवत साहब कह रहे हैं कि बनना-बनाना क्या, यह तो हमेशा का हिंदू राष्ट्र है! प्रधानमंत्री से उम्मीद थी कि वह ऑफिशियली स्थिति क्लियर करेंगे। पर वह बड़ी होशियारी से लाल किले के अपने भाषण में इस झगड़े से बचकर निकल गए। माना कि मौन को स्वीकृति का लक्षण माना गया है। पर यह तो पता चले कि पीएम की मौन स्वीकृति किसके लिए है-बन रहा है, बन चुका है, बना हुआ था या फिर न था, न है, न बन रहा है!

वैसे हिंदू राष्ट्र वालों की मानें, तो कहीं कोई कनफ्यूजन नहीं है। सब सेक्यूलर दलों की उड़ाई अफवाह है। असली बात है हिंदू राष्ट्र। बन गया है, तो अच्छी बात है। पर अगर बनना शुरू भी हुआ है, तब भी कोई बात नहीं, अभी बहुत टैम पड़ा है। नरेंद्र भाई का दो टर्म तो कहीं गया नहीं है। और अगर पहले से ही बना-बनाया था, तब तो खैर कहना ही क्या! वैसे भी बनाने वालों को बनाने से मतलब। बनाने के रास्ते में जो आए, उसे हटाने से मतलब। कब से बन रहा है, कब तक पूरा हो जाएगा, कितना बन गया है, कितना और बनना है, ऐसे सवालों की तरफ बनाने वाले नहीं देखते। बनाने वाले सिर्फ बनाने का कर्म करते हैं, फल की परवाह का कर्म दूसरे करते रहें!
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पर एक बात समझ में नहीं आई। अगर हिंदू राष्ट्र पहले का बना-बनाया नहीं है और बनाना है, तो पहले वाले में ही तोड़-फोड़ कर बनाएंगे या योजना आयोग की तरह पहले वाले को पूरा ढहाएंगे और नए सिरे से नई इमारत बनाएंगे। क्यों न सरकार नए राष्ट्र के लिए लगे हाथों नई जनता भी बना ले-हिंदू राष्ट्र में गैरों का और कम-वफादारों का झंझट ही क्यों रहे!
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