कई साल पहले उत्तर प्रदेश के एक गांव में एक नाबालिग दलित लड़की के साथ उसके स्कूल में पढ़ने वाले लड़के ने बलात्कार किया था। लड़के का कहना था कि लड़की आसमान में उड़ने लगी है, उसका दिमाग सही करना जरूरी है। लड़की पढ़ने में तेज थी और लड़के के नंबर कम ही रहते थे। लड़की लिंग और जाति में उससे निचले स्तर की थी, पर उससे आगे निकल रही थी, यह उसे बर्दाश्त नहीं था। तो लड़के ने उसके साथ बलात्कार कर उसे अधमरा कर दिया। लड़की की जान तो बच गई, पर वह पढ़ने की हिम्मत ही नहीं जुटा पाई। हाल में इस तरह का अनुभव हरियाणा की एक प्रतिभाशाली लड़की को भी हुआ। वह सीबीएसई की टॉपर है।
सच यह है कि समाज के भेदभाव भरे व्यवहार के बावजूद लड़कियां ऊंचाइयों को छूने की कोशिश करती है, और कभी-कभी सफल भी हो जाती है। लड़के की परीक्षा होती है, तो मां सुबह-सुबह उसके लिए चाय और गर्म रोटी बनाती है। उसकी पढ़ाई के लिए घरवाले कर्ज तक लेने को तैयार होते हैं। पर जो लड़की पढ़ना चाहती है, खासकर हरियाणा जैसे राज्यों के गांवों में, उन्हें घर के काम से छुटकारा नहीं मिल पाता। सारा काम करते हुए वह अपनी पढ़ाई पर ध्यान देती है। फिर स्कूल जाना भी आसान नहीं है। अक्सर प्राथमिक के बाद पढ़ाई के लिए गांव से दूर जाना पड़ता है, जो खतरनाक होता है।
दो साल पहले इसी हरियाणा में कई स्कूल की लड़कियों ने चिलचिलाती धूप में कई दिन तक इस मांग के साथ धरना दिया था कि माध्यमिक स्कूल का प्रबंध गांव में ही किया जाए, क्योंकि खेतों से होते हुए स्कूल तक जाना खतरनाक था।
ये सब परेशानियां झेलते हुए रेवाड़ी की उस बहादुर लड़की ने मेहनत की और टॉपर बनी। उसके बाद वह अपने गांव से दूर दूसरे जिले में ट्यूशन पढ़ने जाती थी। उसे रेलवे में नौकरी करने का सपना पूरा करना था। शायद उसके बारे में भी गांव के युवक यह समझने लगे थे कि उसका दिमाग खराब हो गया है। उसको सबक सिखाने की बात उन्होंने तय कर ली। उनकी साजिश में सेना का एक जवान भी शामिल हो गया, जिस पर देश की तमाम महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी थी और जिसके चरित्र पर सवाल उठाना अब राष्ट्रद्रोह समझा जाने लगा है। जब लड़की पढ़ने जा रही थी, तो उसे उठा लिया गया और खेत में ले जाकर लड़कों ने उसके साथ बलात्कार किया। जब उन्हें डर लगा कि वह मर जाएगी, तब वे उसे बस अड्डे पर छोड़कर चले गए। लड़की और उसके मां-बाप को घंटों एक थाने से दूसरे थाने तक चक्कर काटने को मजबूर किया गया। दो जिलों का मामला जो था। घंटों बाद जीरो एफआईआर लिखी गई, जबकि लड़की को तीन पुरुषों के नाम मालूम थे। और समाज? वह तो ‘आदर्श बहू-तीन महीन का कोर्स’ पढ़ाने में जुटा है! पहले खबर मिली कि बीएचयू-आईआईटी में यह कोर्स पढ़ाया जाएगा, पर उसकी इतनी आलोचना हुई कि मामले को दबा दिया गया। अब पता चला है कि मध्य प्रदेश के बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय में इसे पढ़ाए जाने की तैयारी हो रही है। जिनके नाम पर विश्वविद्यालय का नाम पड़ा है, उन बरकतुल्लाह साहब की रूह पर क्या गुजर रही होगी, यह कहना मुश्किल है। क्या विडंबना है कि युवकों को सामान्य इंसान बनाने की शिक्षा देने के लिए भी किसी कॉलेज या विश्वविद्यालय में कोर्स पढ़ाने की बात कोई नहीं सोच रहा है। लेकिन उससे पहले यह बात तो सुनिश्चित की जाए कि अस्पताल में तड़प रही लड़की वहां से निकलने के बाद अपनी पढ़ाई जारी रख सके।
-लेखिका माकपा पोलित ब्यूरो की सदस्य हैं।